उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर से ठगी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। Bijnor Sherkot Thagi के इस मामले में पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो भोली-भाली महिलाओं को अपना शिकार बनाता था। यह गिरोह महिलाओं को उनकी गंभीर बीमारी ठीक करने का झूठा झांसा देकर उनके सोने के कुंडल और आभूषण ठग लेता था। शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को शेरकोट पुलिस ने मुखबिर की सटीक सूचना पर इस कथित नेटवर्क के दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों के तार अमरोहा से जुड़े हुए हैं और यह गिरोह पिछले काफी समय से इस इलाके में सक्रिय था।

अस्पताल के बाहर करते थे रेकी, ऐसे बनाते थे शिकार पुलिस जांच में सामने आया है कि ठग गिरोह के सदस्य मुख्य रूप से उन महिलाओं को निशाना बनाते थे जो शारीरिक रूप से परेशान होती थीं। घटना का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़िता कमलेश रुहेला सरकारी अस्पताल से अपनी दवा लेकर बाहर निकल रही थीं। पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने कमलेश को अपनी मीठी बातों में उलझाया और किसी चमत्कारी तरीके से बीमारी ठीक करने का झूठा दावा किया। इसी दौरान उन्होंने धोखे से महिला के सोने के कुंडल उतरवा लिए और वहां से रफूचक्कर हो गए। पीड़िता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज किया और घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए।

अमरोहा कनेक्शन का खुलासा, दो गिरफ्तार सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस टीम की मदद से पुलिस को अहम सुराग मिले, जिसमें जांच की आंच अमरोहा तक पहुंच गई। शेरकोट पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 16 अक्टूबर को हिरदेश और पुलकित नामक दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया। पुलिस के दावे के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से 5,000 रुपये नकद और पीली धातु (सोना) का एक कुंडल बरामद किया गया है। पूछताछ के दौरान पुलिस को इस संगठित अपराध के काम करने के तरीके के बारे में चौंकाने वाली जानकारी मिली है।

डेढ़ साल से चल रहा था नेटवर्क, 13 लाख के सोने का लेनदेन पुलिस पूछताछ में आरोपी पुलकित ने कथित तौर पर यह बात कबूल की है कि वह महिलाओं को अपने जाल में फंसाकर उनसे सोने के कुंडल ठगता था। ठगी के बाद वह इन आभूषणों को दूसरे आरोपी हिरदेश को सौंप देता था, जिसके बदले उसे मोटा कमीशन मिलता था। पुलिस के अनुसार, हिरदेश का काम ठगे गए सोने को खरीदना, उसे भट्टी में गलाना और फिर बाजार में ऊंचे दामों पर बेचना था। हिरदेश ने पुलिस के सामने यह स्वीकार किया है कि वह पिछले करीब डेढ़ साल से इस अवैध धंधे में शामिल है और अब तक लगभग 12 से 13 लाख रुपये का सोना खरीद चुका है।

एसपी के निर्देश पर आगे की कार्रवाई पुलिस को जांच में यह भी पता चला है कि इस गिरोह ने 7 अक्टूबर को भी इसी तर्ज पर एक ठगी को अंजाम दिया था। उस दौरान ठगा गया सोने का कुंडल आरोपियों ने 26 हजार रुपये में बेच दिया था। बिजनौर के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पुलिस टीम ने इस मामले में संबंधित कानूनी धाराएं बढ़ा दी हैं। गिरोह के अन्य फरार या अज्ञात सदस्यों की भूमिका की भी गहनता से जांच की जा रही है।

बिजनौर के शेरकोट में ठगी का यह मामला आम जनता के लिए एक बड़ी चेतावनी है। पुलिस प्रशासन ने अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के द्वारा चमत्कार करने या तंत्र-मंत्र से बीमारी ठीक करने के झांसे में बिल्कुल न आएं और सतर्क रहें।

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