उत्तर प्रदेश के मेरठ में दो दिनों के भीतर पति की हत्या के दो चर्चित मामलों में चार दोषियों को मृत्युदंड सुनाया गया है। पहले 14 अक्टूबर 2026 को सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई गई। इसके बाद 16 अक्टूबर को अमित कश्यप हत्याकांड में पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड दिया गया। एक मामले में पति के शव के टुकड़े कर सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाए गए, जबकि दूसरे में हत्या को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने की कोशिश की गई। दोनों मामलों में पुलिस की जांच, पोस्टमार्टम और अन्य साक्ष्य आरोपियों को दोषी ठहराने में अहम रहे।
पहला मामला: मुस्कान और साहिल ने कैसे की सौरभ की हत्या?
मेरठ के इंद्रानगर निवासी सौरभ राजपूत मर्चेंट नेवी में काम कर चुके थे। वह फरवरी 2025 में लंदन से मेरठ लौटे थे। उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी का साहिल शुक्ला से प्रेम संबंध था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सौरभ को इस संबंध के बारे में पता चलने के बाद दोनों ने उनकी हत्या की साजिश रची।
अभियोजन के मुताबिक, तीन मार्च 2025 को मुस्कान ने सौरभ को खाने में नशीला पदार्थ देकर बेहोश किया। इसके बाद साहिल को घर बुलाया गया। दोनों ने मिलकर सौरभ पर चाकू से हमला किया, जिससे उनकी मौत हो गई। हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें घर के बाथरूम में रखा गया।
इसके बाद शव के टुकड़ों को एक बड़े नीले प्लास्टिक ड्रम में रखा गया। बदबू रोकने और शव छिपाने के लिए ड्रम में रेत, पानी और सीमेंट का मिश्रण भरा गया। ड्रम को बंद कर दिया गया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि हत्या के बाद दोनों हिमाचल प्रदेश चले गए थे। मुस्कान ने सौरभ के मोबाइल फोन से उनके परिजनों को संदेश भेजे, ताकि उन्हें लगे कि सौरभ जीवित हैं और काम के सिलसिले में बाहर गए हैं।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›नीले ड्रम से कैसे खुला हत्या का राज?
सौरभ के परिजनों को उनकी गतिविधियों और संपर्क को लेकर संदेह होने लगा। 17 मार्च 2025 को परिजन और स्थानीय लोग घर पहुंचे। वहां नीले ड्रम को लेकर संदेह गहराया। इसके बाद पुलिस ने ड्रम खुलवाया, जिसमें सौरभ के शव के टुकड़े मिले।
शव मिलने के बाद पुलिस ने मुस्कान और साहिल की तलाश शुरू की। दोनों को 18 मार्च 2025 को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल टावर की लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए गए। दुकानदारों के बयान भी अहम रहे, जिन्होंने ड्रम, सीमेंट, रेत और वारदात में इस्तेमाल किए गए सामान की खरीद से संबंधित जानकारी दी।
मामले में पुलिस ने मई 2025 में लगभग एक हजार पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाह पेश किए और अदालत में 126 सुनवाइयां हुईं। 30 सितंबर 2026 को अदालत ने मुस्कान और साहिल को हत्या तथा साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराया। 14 अक्टूबर को दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया।
खबरीलाल न्यूज़ का Telegram चैनल जॉइन करें Join ›दूसरा मामला: रविता और अमरदीप ने अमित कश्यप को क्यों मारा?
मेरठ के बहसूमा क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव के निवासी अमित कश्यप की हत्या का मामला भी पत्नी और उसके प्रेमी से जुड़ा था। अमित और रविता पति-पत्नी थे। अमरदीप अमित के साथ टाइल्स और पत्थर लगाने का काम करता था और उसका अमित के घर आना-जाना था। पुलिस जांच और अभियोजन के अनुसार, इसी दौरान रविता और अमरदीप के बीच प्रेम संबंध बन गए।
अभियोजन पक्ष का कहना था कि अमित को दोनों के संबंधों की जानकारी हो गई थी। इसके बाद रविता और अमरदीप ने अमित को रास्ते से हटाने की साजिश रची। अदालत में पेश किए गए अभियोजन के अनुसार, अमरदीप ने एक सपेरे से करीब एक हजार रुपये में सांप खरीदा था। बताया गया था कि सांप धार्मिक जागरण के लिए चाहिए।
गला घोंटा, फिर शव के पास छोड़ा सांप
अभियोजन के मुताबिक, 12 अप्रैल 2025 की रात अमित के सो जाने के बाद रविता ने अमरदीप को घर बुलाया। आरोप था कि दोनों ने मिलकर अमित का गला और नाक-मुंह दबाया, जिससे दम घुटने के कारण उनकी मौत हो गई। इसके बाद शव के पास और बिस्तर पर सांप छोड़ दिया गया, ताकि परिवार को लगे कि अमित की मौत सांप के काटने से हुई है।
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13 अप्रैल की सुबह अमित बिस्तर पर मृत मिले। उनके शरीर पर सांप के काटने जैसे निशान बताए गए और शव के नीचे एक जीवित सांप मिला। रविता ने शुरुआत में मौत को सर्पदंश से जोड़कर बताया। परिवार ने सांप पकड़ने वाले को बुलाया, जिसने सांप को पकड़कर वहां से हटाया। शुरुआत में यह घटना सांप के काटने से हुई मौत जैसी दिखाई दी, लेकिन पोस्टमार्टम ने मामले की दिशा बदल दी।
पोस्टमार्टम ने खोली हत्या की साजिश
अमित के शव का पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक डॉ. कपिल गर्ग की रिपोर्ट में मौत का कारण सांप का काटना नहीं, बल्कि दम घुटना बताया गया। अभियोजन के अनुसार, गले की हड्डियों और कार्टिलेज में टूट-फूट के निशान मिले थे। नाक-मुंह और गर्दन पर दबाव से संबंधित चोटें भी सामने आईं। इन मेडिकल साक्ष्यों ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए कि अमित की मौत सांप के काटने से हुई थी।
इसके बाद अमित के भाई मोनू कश्यप ने पोस्टमार्टम के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने रविता से पूछताछ की और जांच में अमरदीप की भूमिका सामने आई। दोनों के बीच हुई फोन बातचीत, गवाहों के बयान और सांप खरीदने से जुड़ी जानकारी जांच का हिस्सा बनी।
51 फोन कॉल, गवाह और सांप खरीदने का सुराग
अमित कश्यप मामले में अभियोजन ने मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड को अहम साक्ष्य के रूप में पेश किया। रिपोर्टों के मुताबिक, वारदात की रात से अगले दिन तक रविता और अमरदीप के बीच 51 बार बातचीत हुई थी। अभियोजन ने इस बातचीत को दोनों के संपर्क और घटनाक्रम से जोड़कर अदालत के सामने रखा।
सांप खरीदने से संबंधित गवाही भी महत्वपूर्ण रही। अदालत में सपेरे और सांप उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति से जुड़े गवाहों के बयान दर्ज हुए। इसके अलावा अमित की मां, भाई, पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक, पुलिस विवेचक और मोबाइल कंपनियों के अधिकारियों ने भी गवाही दी। अभियोजन पक्ष ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अपनी दलील रखी।
अदालत ने सात अक्टूबर 2026 को रविता और अमरदीप को हत्या और आपराधिक साजिश के मामले में दोषी ठहराया। 16 अक्टूबर को मेरठ की अदालत ने दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
दो दिनों में चार दोषियों को मृत्युदंड
इन दोनों मामलों में अपराध छिपाने के तरीके अलग-अलग थे। सौरभ राजपूत की हत्या के बाद शव के टुकड़े कर सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाए गए, जबकि अमित कश्यप की हत्या के बाद सांप के काटने से मौत होने का भ्रम पैदा करने की कोशिश की गई। दोनों मामलों में शुरुआती कहानी से अलग तथ्य जांच और मेडिकल साक्ष्यों के बाद सामने आए।
14 अक्टूबर को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला तथा 16 अक्टूबर को रविता और अमरदीप को मृत्युदंड सुनाया गया। हालांकि, मृत्युदंड का आदेश सुनाए जाने और सजा पर अमल होने में कानूनी अंतर है। मृत्युदंड के मामलों में कानून के अनुसार आगे की न्यायिक प्रक्रिया भी लागू होती है।
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