लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के साढ़े तीन करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए यूपी बिजली दरें (UP Bijli Dar) न बढ़ाने का फैसला लिया है। यह लगातार छठा साल है जब प्रदेश में बिजली की दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई है, जिससे उपभोक्ताओं को छह साल पहले तय दरों पर ही बिजली का भुगतान करना होगा।READ ALSO:-UP में 'कामगारों' के अच्छे दिन: अब 1 साल में मिलेगी ग्रेच्युटी, ओवरटाइम का डबल पैसा; महिलाओं को नाइट शिफ्ट की आजादी
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हालांकि, यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) द्वारा नियामक आयोग में बिजली दरें बढ़ाने का प्रस्ताव दाखिल किया गया था, लेकिन आयोग ने इसे खारिज करते हुए उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोपरि रखा।
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देश का पहला राज्य जिसने 6 साल तक दरें स्थिर रखीं
\r\n\r\nऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने इस निर्णय पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे जन-केंद्रित नीतियों और उपभोक्ता हितों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए लगातार छठे वर्ष बिजली दरों में कोई वृद्धि न करने की परंपरा कायम रखी है।
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सर्च परिणामों के अनुसार, दरें स्थिर रखने का यह निर्णय इसलिए संभव हो सका क्योंकि UPPCL के पास 1 अप्रैल 2025 तक लगभग ₹18,592.38 करोड़ का संचित नियामक अधिशेष (Accumulated Regulatory Surplus) होने का अनुमान है, जिसने टैरिफ वृद्धि की आवश्यकता को संतुलित कर दिया।
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सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं को लाभ
\r\n\r\nनियामक आयोग ने स्पष्ट किया है कि घरेलू, व्यावसायिक, औद्योगिक, कृषि और ग्रामीण उपभोक्ताओं सहित सभी उपभोक्ता श्रेणियों के लिए बिजली के टैरिफ लगातार छठवें वर्ष भी पहले की तरह ही रखे गए हैं।
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- \r\n घरेलू उपभोक्ता: गरीब परिवारों का घरेलू बजट सुरक्षित रहेगा।\r\n \r\n
- \r\n किसान: किसानों के लिए सिंचाई लागत स्थिर रहेगी, जिससे उनकी खेती की लागत पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा।\r\n \r\n
- \r\n व्यापारी और उद्योग: यूपी बिजली दरें स्थिर रहने से व्यापारियों, दुकानदारों और उद्योगों को अपनी परिचालन लागत (Cost of Operation) को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी, जिससे प्रदेश में निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।\r\n \r\n
- \r\n ग्रीन एनर्जी टैरिफ में राहत: आयोग ने सभी उपभोक्ताओं के लिए ग्रीन एनर्जी टैरिफ (Green Energy Tariff) के विकल्प का विस्तार किया है और हाई-वोल्टेज (HV) उपभोक्ताओं के लिए अतिरिक्त सरचार्ज को ₹0.36/यूनिट से घटाकर ₹0.34/यूनिट और लो-वोल्टेज (LV) उपभोक्ताओं के लिए ₹0.17/यूनिट तय किया है।\r\n \r\n
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बुनियादी ढांचे पर फोकस और भविष्य की योजना
\r\n\r\nऊर्जा मंत्री ने यह भी बताया कि दरों में स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ सरकार बिजली व्यवस्था को सुधारने के लिए दिन-रात कार्य कर रही है।
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- \r\n बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण: प्रदेश भर में विद्युत अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को आधुनिक बनाने, पुराने तारों व ट्रांसफॉर्मरों को बदलने, और भूमिगत केबलिंग जैसे कार्य तेजी से किए जा रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n क्षति को कम करने का लक्ष्य: नियामक आयोग ने UPPCL को वित्तीय वर्ष 2024-25 में 13.78% के वितरण लॉस (Distribution Loss) को वित्तीय वर्ष 2029-30 तक घटाकर 10.74% करने का लक्ष्य भी दिया है।\r\n \r\n
- \r\n ग्रामीण सब्सिडी जारी: ग्रामीण और कमजोर वर्ग के उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी जारी रहेगी। लाइफलाइन कंज्यूमर (Lifeline Consumers), ग्रामीण मीटर्ड घरेलू उपभोक्ता और किसानों के निजी नलकूप को पहले की तरह ही सब्सिडी मिलती रहेगी।\r\n \r\n
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सरकार के इस निर्णय से स्पष्ट होता है कि वह उपभोक्ता सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है, खासकर ऐसे समय में जब देश के कई अन्य राज्यों में बिजली दरें बढ़ाई जा रही हैं। ऊर्जा विभाग की टीम बिजली आपूर्ति और सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार लाने के लिए प्रयासरत है।
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यूपी विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए यूपी बिजली दरें न बढ़ाने का फैसला किया है, जिससे प्रदेश के 3.5 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं को लगातार छठे साल राहत मिली है। UPPCL के प्रस्ताव को खारिज करने का मुख्य कारण नियामक अधिशेष (Regulatory Surplus) की उपलब्धता है। यह निर्णय घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों और उद्योगों सभी को लाभ पहुंचाएगा और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा, जबकि सरकार बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और वितरण लॉस को कम करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
Sabse pehle comment karne wale banein.