लखनऊ: उत्तर प्रदेश में भारत सरकार द्वारा अधिसूचित चार नए श्रम कानूनों (New Labour Codes) को लागू कर दिया गया है। ये कानून देश के 29 पुराने और खंडित श्रम कानूनों की जगह लेंगे, जिसका उद्देश्य श्रमिकों के हितों की रक्षा करना, कार्यस्थल में पारदर्शिता लाना और प्रदेश में औद्योगिक व्यवस्था को आधुनिक बनाना है। उत्तर प्रदेश श्रम विभाग की विज्ञप्ति के अनुसार, ये नए कोड राज्य के लाखों श्रमिकों, खासकर असंगठित क्षेत्र और महिला कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आए हैं।READ ALSO:-बिजनौर के लड़के का 'विदेशी' स्वैग या बड़ी साजिश? हाथ में AK-47 और ग्रेनेड लेकर बनाया वीडियो, पुलिस महकमे में हड़कंप
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इन कानूनों के लागू होने से अब श्रमिकों को न्यूनतम वेतन की गारंटी, नियुक्ति पत्र का अधिकार, समान वेतन, बेहतर सोशल सिक्योरिटी, और ओवर टाइम पर डबल वेतन जैसे महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे।
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महिलाओं के लिए 'नाइट शिफ्ट' का नया अधिकार

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नए यूपी नया श्रम कानून में कामकाजी महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। अब महिलाओं को उनकी लिखित सहमति के बाद नाइट शिफ्ट (रात 7 बजे से सुबह 6 बजे तक) में काम करने की आजादी होगी।
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    डबल वेतन और सुरक्षा: सर्च परिणामों के अनुसार, इस दौरान काम करने वाली महिलाओं को सामान्य वेतन दर से दोगुना वेतन दिया जाएगा। साथ ही, नियोक्ताओं को उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन के लिए सीसीटीवी निगरानी, ट्रांसपोर्ट और विशेष सुरक्षा गार्डों की व्यवस्था करना अनिवार्य होगा। 
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    समान काम, समान वेतन: लिंग के आधार पर भेदभाव को अब कानूनी रूप से प्रतिबंधित किया गया है, और समान काम के लिए समान वेतन की गारंटी अनिवार्य है।
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ग्रेच्युटी और न्यूनतम वेतन पर सबसे बड़े बदलाव

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नए श्रम कानूनों ने वेतन और सामाजिक सुरक्षा के नियमों में कई बड़े बदलाव किए हैं, जो सीधे तौर पर प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को फायदा पहुंचाएंगे:
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    1 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी: पहले किसी कर्मचारी को ग्रेच्युटी के लिए 5 साल की स्थायी नौकरी पूरी करनी होती थी। अब यह अवधि घटाकर सिर्फ एक साल की स्थायी नौकरी कर दी गई है। फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को भी आनुपातिक आधार पर ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा।
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    न्यूनतम वेतन की गारंटी: न्यूनतम वेतन अब पूरे प्रदेश में लागू हो गया है, और नियोक्ता के लिए समय पर (हर महीने की 7 तारीख तक) वेतन देना एक कानूनी बाध्यता होगी।
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    ओवर टाइम का डबल भुगतान: कर्मचारियों को निर्धारित वर्किंग ऑवर से अधिक काम करने पर ओवर टाइम का भुगतान डबल रेट पर किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
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गिग वर्कर्स और सामाजिक सुरक्षा का विस्तार

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पुराने कानूनों में गिग वर्कर्स (Ola-Uber ड्राइवर) और प्लेटफॉर्म वर्कर्स (Zomato-Swiggy डिलीवरी पार्टनर) की कोई परिभाषा नहीं थी। यूपी नया श्रम कानून अब इन सभी को कानूनी मान्यता देता है और सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाता है।
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    कल्याण कोष: एग्रीगेटर्स (कंपनियों) को अपने टर्नओवर का 1-2% (भुगतान की गई राशि के 5% की अधिकतम सीमा तक) इन वर्कर्स के लिए बनाए गए सामाजिक सुरक्षा कोष में योगदान देना होगा।
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    UAN की पोर्टेबिलिटी: आधार से लिंक होने के कारण, श्रमिकों को मिला UAN (Universal Account Number) राज्य बदलने पर भी काम करता रहेगा, जिससे सामाजिक सुरक्षा लाभों की पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित होगी।
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    अन्य सुरक्षा: ट्रांसजेंडर कर्मचारियों को समान अधिकार, 40 वर्ष से अधिक उम्र वाले कर्मचारियों की साल में एक बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच और खतरनाक क्षेत्रों में पूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा भी अब अनिवार्य है।
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राजनीतिक और यूनियन की प्रतिक्रिया

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इस ऐतिहासिक कदम पर मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है:
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    कर्मचारी यूनियन का स्वागत: जवाहर भवन कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष सतीश पांडे ने नए श्रम कानून का स्वागत करते हुए इसे कर्मचारी और श्रमिकों के हित में बताया। उन्होंने एक साल पर ग्रेच्युटी और महिलाओं को नाइट ड्यूटी के हक के प्रावधानों की सराहना की।
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    विपक्ष की आलोचना: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस कानून पर असहमति जताते हुए कहा कि यह कानून प्राइवेट कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बना है और इसमें मजदूर भाइयों के हितों को नजरअंदाज किया गया है। 
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उत्तर प्रदेश में लागू हुआ यूपी नया श्रम कानून 29 पुराने कानूनों को बदलकर एक आधुनिक, पारदर्शी और कर्मचारी-केंद्रित व्यवस्था की नींव रखता है। न्यूनतम वेतन की गारंटी, एक साल में ग्रेच्युटी और महिलाओं को सुरक्षित नाइट शिफ्ट का अधिकार जैसे प्रावधान राज्य के करोड़ों श्रमिकों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। हालांकि, सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि इन नियमों का सख्ती से और बिना किसी लालफीताशाही के पालन हो।
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