मुजफ्फरनगर (क्राइम डेस्क / विशेष रिपोर्ट): त्योहार खुशियां लेकर आते हैं। अपनों से मिलने, गिले-शिकवे मिटाने और प्यार बांटने का नाम ही त्योहार है। लेकिन उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली और हृदय विदारक खबर सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक पवित्र त्योहार पर दी गई 'ईदी' (उपहार की राशि) एक हंसते-खेलते परिवार के लिए 'मौत का फरमान' बन गई। मात्र 1500 रुपये के पीछे उपजे पारिवारिक विवाद ने इतना विकराल रूप ले लिया कि एक ही झटके में एक ही परिवार के चार लोगों की जिंदगी खत्म हो गई।READ ALSO:-यूपी के ग्रामीण परिवहन में ऐतिहासिक क्रांति: 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना' के तहत मई से गांवों की पगडंडियों पर दौड़ेंगी मिनी बसें, ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय तक का सफर होगा आसान
\r\n\r\n\r\n\r\n
मुजफ्फरनगर के थाना सिविल लाइन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सरवट मोहल्ले में मंगलवार की सुबह उस वक्त चीख-पुकार और कोहराम मच गया, जब एक घर के बंद कमरे से पति, पत्नी और उनके दो छोटे-छोटे मासूम बच्चों के शव बरामद हुए। मरने वालों में एक बच्चा तो महज 1 महीने का था, जिसने अभी ठीक से आंखें भी नहीं खोली थीं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक भाई द्वारा अपनी बहन को दिए गए 1500 रुपये ने एक पति को इतना खूंखार बना दिया कि उसने अपने ही जिगर के टुकड़ों और जीवनसंगिनी की जान ले ली, और फिर खुद भी मौत को गले लगा लिया? इस विशेष और विस्तृत रिपोर्ट में हम मुजफ्फरनगर के इस सनसनीखेज हत्याकांड और आत्महत्या (Murder-Suicide/Familicide) के हर पहलू, पुलिस की जांच, फोरेंसिक सुरागों और समाज में बढ़ते पारिवारिक तनाव की गहराई से पड़ताल करेंगे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
घटना का खौफनाक मंजर: जब सुबह नहीं खुला कमरे का दरवाजा (The Fateful Morning)
\r\n\r\nसरवट मोहल्ले की वह मंगलवार की सुबह किसी आम दिन जैसी नहीं थी। 32 वर्षीय इरशाद के घर में रोजमर्रा की तरह सुबह की हलचल नहीं हो रही थी। इरशाद, उसकी 25 वर्षीय पत्नी नौरिन, 2 साल का बेटा आहिल और महज 1 महीने की बेटी अक्सा अपने कमरे में सोए हुए थे।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
भाई की बेचैनी और दरवाजा टूटना
\r\n\r\nजब सुबह काफी देर तक इरशाद के कमरे का गेट नहीं खुला और अंदर से बच्चों के रोने या किसी के बोलने की कोई आवाज नहीं आई, तो परिवार के अन्य सदस्यों को चिंता होने लगी। इरशाद के भाई ने कई बार दरवाजा खटखटाया, आवाजें दीं, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया (Response) नहीं मिली। पिछली रात हुए भयंकर विवाद को याद कर परिजनों का दिल किसी अनहोनी की आशंका से बैठने लगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आखिरकार, जब कोई विकल्प नहीं बचा, तो इरशाद के भाई और कुछ पड़ोसियों ने मिलकर कमरे का दरवाजा तोड़ दिया। दरवाजा टूटते ही जो मंजर सामने आया, उसे देखकर वहां मौजूद हर शख्स की चीख निकल गई और उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
\r\n\r\n\r\n\r\n
कमरे के अंदर मौत का सन्नाटा:-
\r\n\r\n\r\n\r\n
कमरे के अंदर का दृश्य किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं था:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n इरशाद (32 वर्ष): कमरे के बीचों-बीच, छत के पंखे के सहारे एक चादर का फंदा बना हुआ था और इरशाद का निर्जीव शरीर उस पर झूल रहा था।\r\n \r\n
- \r\n नौरिन और बच्चे: कमरे के फर्श और बिस्तर पर इरशाद की 25 वर्षीय पत्नी नौरिन, 2 साल के बेटे आहिल और 1 महीने की नवजात बेटी अक्सा के शव पड़े हुए थे। उनके शरीर में कोई हलचल नहीं थी।\r\n \r\n
\r\n\r\n
पूरे कमरे में मौत का खौफनाक सन्नाटा पसरा था। घटना की सूचना आग की तरह पूरे मोहल्ले में फैल गई और देखते ही देखते इरशाद के घर के बाहर सैकड़ों लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।
\r\n\r\n\r\n\r\n
कत्ल और खुदकुशी की वजह: 1500 रुपये की 'ईदी' और पारिवारिक क्लेश (The Root Cause)
\r\n\r\nपुलिस की अब तक की जांच और पड़ोसियों/परिजनों के बयानों से जो कहानी निकलकर सामने आई है, वह इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि कैसे एक छोटी सी बात, अहंकार और क्रोध के चलते एक पूरे परिवार का नामोनिशान मिटा सकती है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
बहन को ईदी देना बना गुनाह
\r\n\r\nमुस्लिम समाज में ईद के मौके पर बड़े अपने छोटों को, और भाई अपनी बहनों को प्यार के तौर पर कुछ नकद राशि या उपहार देते हैं, जिसे 'ईदी' (Eidi) कहा जाता है। यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
मृतक इरशाद ने भी इस ईद पर अपनी एक विवाहित बहन को शगुन के तौर पर 1500 रुपये की ईदी दी थी। लेकिन इरशाद की पत्नी नौरिन को अपने पति का अपनी ननद को ये पैसे देना बिल्कुल भी रास नहीं आया। नौरिन का मानना था कि इरशाद को अपनी बहन को इतने पैसे नहीं देने चाहिए थे। इसी बात को लेकर घर में कलह का बीज बोया गया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सास और सहेलियों का दखल: विवाद ने पकड़ा तूल
\r\n\r\nआमतौर पर पति-पत्नी के बीच के विवाद अगर चारदीवारी के अंदर रहें, तो वे सुलझ जाते हैं। लेकिन इस मामले में बाहरी हस्तक्षेप (External Interference) ने आग में घी का काम किया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n जब नौरिन को ईदी की बात पता चली, तो वह इरशाद से भिड़ गई।\r\n \r\n
- \r\n हद तो तब हो गई जब सोमवार (घटना से एक दिन पहले) नौरिन की मां (यानी इरशाद की सास) और नौरिन की कुछ सहेलियां इरशाद के घर पहुंच गईं।\r\n \r\n
- \r\n परिजनों के अनुसार, सास और नौरिन की सहेलियों ने इरशाद को खूब खरी-खोटी सुनाई और उसके साथ जमकर झगड़ा किया।\r\n \r\n
\r\n\r\n
एक आदमी के लिए अपनी ही पत्नी, सास और बाहरी लोगों (सहेलियों) द्वारा इस तरह से जलील होना, उसके अहम (Ego) पर गहरी चोट कर गया। सोमवार की देर रात तक इरशाद और नौरिन के बीच इस 1500 रुपये के मुद्दे को लेकर भयंकर विवाद और चीख-पुकार होती रही। शायद उसी रात के अंधेरे में इरशाद के दिमाग ने एक ऐसा खौफनाक ताना-बाना बुना, जिसकी भनक नौरिन को सोते समय भी नहीं लगी होगी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
पुलिस और फोरेंसिक की एंट्री: कैसे हुई तीनों की हत्या? (Police Investigation & Forensics)
\r\n\r\nघटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुजफ्फरनगर के एसएसपी (Senior Superintendent of Police) संजय कुमार वर्मा और अन्य कई आला अधिकारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
एसएसपी संजय कुमार वर्मा का बयान
\r\n\r\nएसएसपी संजय कुमार वर्मा ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना करने के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए बताया:
\r\n\r\n\r\n\r\n
\r\n\r\n\r\n"सिविल लाइन थाना क्षेत्र के सरवट मोहल्ले से सूचना मिली थी कि एक घर के एक कमरे में चार लोगों के शव पड़े हैं। पुलिस टीम तुरंत पहुंची। कमरे में एक व्यक्ति (इरशाद) चादर से पंखे के सहारे फांसी पर लटका हुआ था। उसकी पत्नी और दो छोटे बच्चों के शव जमीन पर पड़े थे। प्रारंभिक जांच में ईदी के पैसों को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद की बात सामने आई है। हमने फोरेंसिक टीम को बुला लिया है और चारों शवों को कब्जे में लेकर वीडियोग्राफी के साथ पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।"\r\n
\r\n\r\n
मर्डर थ्योरी: क्या जहर देकर मारा गया?
\r\n\r\nपुलिस की सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि नौरिन और दोनों बच्चों की मौत कैसे हुई। चूंकि उनके शरीर पर किसी धारदार हथियार (Sharp weapon) से हमले के गहरे निशान या खून से लथपथ होने की बात शुरुआती रिपोर्ट्स में सामने नहीं आई है, इसलिए पुलिस एक विशेष थ्योरी पर काम कर रही है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
संभावित घटनाक्रम (Reconstructing the Crime):
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n जहर का इस्तेमाल: पुलिस को अंदेशा है कि रात के झगड़े के बाद जब नौरिन और बच्चे सो गए होंगे, या फिर रात के खाने/पानी में इरशाद ने कोई अत्यधिक जहरीला पदार्थ (Poison/Pesticide) मिला दिया होगा।\r\n \r\n
- \r\n गला घोंटना (Strangulation): दूसरी संभावना यह भी हो सकती है कि नींद की हालत में इरशाद ने पहले अपनी पत्नी का गला घोंटा हो (Asphyxiation) और फिर मासूम बच्चों की तकिये से मुंह दबाकर हत्या कर दी हो।\r\n \r\n
- \r\n खुदकुशी: जब इरशाद को यह यकीन हो गया कि उसकी पत्नी और दोनों बच्चे मर चुके हैं, तब उसने अपनी जीवन लीला समाप्त करने के लिए छत के पंखे से चादर बांधी और फांसी लगा ली।\r\n \r\n
\r\n\r\n
फोरेंसिक साक्ष्य संकलन (Forensic Evidence Collection)
\r\n\r\nक्राइम सीन (Crime Scene) से सुराग जुटाने के लिए मुजफ्फरनगर पुलिस की फोरेंसिक फील्ड यूनिट (FFU) ने चप्पे-चप्पे की जांच की है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n कमरे से पानी के गिलास, खाने के बर्तन और किसी भी तरह की दवा या केमिकल की शीशी को सीज किया गया है।\r\n \r\n
- \r\n फंदे के लिए इस्तेमाल की गई चादर को जांच के लिए लैब भेजा गया है।\r\n \r\n
- \r\n फिंगरप्रिंट्स (Fingerprints) और फुटप्रिंट्स लिए गए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कमरे में कोई तीसरा बाहरी व्यक्ति मौजूद नहीं था।\r\n \r\n
\r\n\r\n
मासूमों का क्या कसूर था? 1 महीने की अक्सा और 2 साल के आहिल की दर्दनाक मौत (The Innocent Victims)
\r\n\r\nइस पूरी घटना का सबसे दर्दनाक और विचलित कर देने वाला पहलू उन दो मासूम बच्चों की मौत है, जिन्हें यह भी नहीं पता था कि 'ईदी' क्या होती है, 1500 रुपये की कीमत क्या होती है, और उनके माता-पिता किस बात पर लड़ रहे हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n 2 साल का बेटा आहिल: जो बच्चा अभी ठीक से बोलना और चलना सीख रहा था, जिसके खिलौने अभी कमरे में बिखरे पड़े होंगे, उसे उसके अपने ही पिता ने मौत के घाट उतार दिया।\r\n \r\n
- \r\n 1 महीने की बेटी अक्सा: एक नवजात शिशु, जिसने महज 30 दिन पहले इस दुनिया में आंखें खोली थीं। जिसे अभी अपनी मां की छाती से लगकर दूध पीना था, उसे क्रूरता से हमेशा के लिए सुला दिया गया।\r\n \r\n
\r\n\r\n
अपराध शास्त्र (Criminology) में इसे "Familicide" (परिवार की हत्या) कहा जाता है। अक्सर ऐसे मामलों में हत्यारा (जो अमूमन परिवार का मुखिया या पिता होता है) अत्यधिक मानसिक तनाव (Extreme Psychological Distress) से गुजर रहा होता है। वह यह मान बैठता है कि उसके मरने के बाद उसके बच्चों का इस 'कठोर दुनिया' में कोई सहारा नहीं होगा, इसलिए वह उन्हें भी अपने साथ मार डालता है। इरशाद के मामले में भी संभवतः अत्यधिक क्रोध और भविष्य की चिंताओं ने उसके सोचने-समझने की शक्ति को शून्य कर दिया था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
पोस्टमार्टम और बिसरा रिपोर्ट का इंतजार: आगे की कानूनी प्रक्रिया (Post-mortem & Legal Procedures)
\r\n\r\nपुलिस ने चारों शवों का पंचनामा (Inquest Report) भरकर उन्हें पोस्टमार्टम हाउस (Mortuary) भेज दिया है। इस केस के खुलासे में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सबसे अहम कड़ी साबित होगी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
पोस्टमार्टम में किन बातों का चलेगा पता?
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n मौत का सही समय (Time of Death): इससे यह पता चलेगा कि क्या पत्नी और बच्चों की हत्या फांसी लगाने से कई घंटे पहले की गई थी।\r\n \r\n
- \r\n मौत का सटीक कारण (Cause of Death): क्या नौरिन और बच्चों की मौत जहर से हुई (Poisoning), दम घुटने से हुई (Smothering/Strangulation), या किसी अन्य तरीके से?\r\n \r\n
- \r\n बिसरा सुरक्षित करना (Viscera Preservation): अगर जहर की पुष्टि होती है, तो डॉक्टरों का पैनल मृतकों के पेट, लीवर, किडनी और आंतों का कुछ हिस्सा (Viscera) सुरक्षित कर लेगा। इसे स्टेट मेडिको-लीगल लैब (State Medico-Legal Lab) भेजा जाएगा ताकि यह पता चल सके कि किस प्रकार का जहर इस्तेमाल किया गया था।\r\n \r\n
- \r\n इरशाद की फांसी: इरशाद के गले पर 'वी-शेप' (V-shape) लिगेचर मार्क की जांच होगी, जिससे यह साबित होगा कि उसकी मौत एंटी-मार्टम हैंगिंग (जिंदा रहते हुए फांसी लगाना) से हुई है या उसे मारकर टांगा गया है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
कानूनी धाराएं (Legal Sections)
\r\n\r\nहालांकि मुख्य आरोपी इरशाद की मौत हो चुकी है, फिर भी पुलिस इस मामले में CrPC (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता - BNSS) की धारा 174 के तहत मर्ग कायम कर जांच करेगी। यदि जांच में यह सामने आता है कि नौरिन की मां (सास) और सहेलियों द्वारा दी गई मानसिक प्रताड़ना (Mental Harassment) या उकसावे के कारण इरशाद ने यह खौफनाक कदम उठाया, तो पुलिस उनके खिलाफ "आत्महत्या के लिए उकसाने" (Abetment of Suicide - IPC Section 306 / BNS Section 108) का मुकदमा भी दर्ज कर सकती है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
समाज के लिए एक कड़ा सबक: आखिर कहां जा रहे हैं हमारे रिश्ते? (Sociological & Psychological Analysis)
\r\n\r\nमुजफ्फरनगर का यह सरवट कांड कोई आम अपराध नहीं है। यह हमारे समाज के माथे पर एक गहरा कलंक है और हमारे गिरते हुए पारिवारिक मूल्यों का एक डरावना आईना है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
रिश्तों में बढ़ती असहिष्णुता (Growing Intolerance in Relationships)
\r\n\r\nआज के दौर में पति-पत्नी के बीच सहनशीलता (Tolerance) लगभग खत्म होती जा रही है। 1500 रुपये कोई इतनी बड़ी रकम नहीं थी जिसके लिए किसी की जान ली जाए। लेकिन मामला पैसों का नहीं, बल्कि 'अहंकार' (Ego) का था। पत्नी को लगा कि पति ने उससे बिना पूछे ननद को पैसे क्यों दिए, और पति को लगा कि पत्नी उसकी बहन को दी गई छोटी सी रकम पर इतना बवाल क्यों कर रही है। यह छोटी सी जिद चार लाशों में तब्दील हो गई।
\r\n\r\n\r\n\r\n
मायके वालों का अनावश्यक हस्तक्षेप
\r\n\r\nभारतीय समाज में शादियों के टूटने या पारिवारिक विवादों के विकराल होने का एक बड़ा कारण 'मायके वालों का अत्यधिक हस्तक्षेप' होता है। इस मामले में भी नौरिन की मां (सास) और सहेलियों का इरशाद के घर आकर उससे झगड़ा करना एक बहुत बड़ा ट्रिगर पॉइंट (Trigger Point) साबित हुआ।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n जब एक पति को उसके अपने घर में उसकी पत्नी के रिश्तेदारों द्वारा अपमानित किया जाता है, तो वह अत्यधिक हीन भावना और क्रोध (Inferiority complex and Rage) से भर जाता है।\r\n \r\n
- \r\n मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी को अपने विवाद खुद सुलझाने चाहिए। तीसरे व्यक्ति के प्रवेश से सुलह के बजाय विनाश के रास्ते खुलते हैं।\r\n \r\n
\r\n\r\n
मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) की अनदेखी
\r\n\r\nहम अक्सर शारीरिक बीमारियों का तो इलाज कराते हैं, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य (Anger Management, Stress, Depression) को नजरअंदाज कर देते हैं। इरशाद ने जिस बेरहमी से अपने एक महीने और दो साल के बच्चे को मारा, वह स्पष्ट रूप से एक 'साइकोटिक ब्रेकडाउन' (Psychotic Breakdown) का मामला लगता है। जब इंसान गुस्से के चरम पर होता है, तो उसके मस्तिष्क का तार्किक हिस्सा (Prefrontal Cortex) काम करना बंद कर देता है, और वह 'एनिमल इंस्टिंक्ट' (पशु प्रवृत्ति) पर काम करने लगता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
पोस्ट-पार्टम डिप्रेशन (Post-partum Depression) का एंगल
\r\n\r\nनौरिन ने मात्र 1 महीने पहले ही एक बेटी को जन्म दिया था। प्रसव के बाद महिलाओं के शरीर में तेजी से हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसे 'पोस्ट-पार्टम डिप्रेशन' कहा जाता है। इस दौरान महिला अत्यधिक चिड़चिड़ी, उदास और तनावग्रस्त हो सकती है। हो सकता है कि 1500 रुपये की ईदी पर उसका इतना भयंकर रिएक्शन इसी डिप्रेशन का नतीजा रहा हो, जिसे इरशाद या उसका परिवार समझ नहीं पाया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
ऐसे हादसों को कैसे रोका जा सकता है? (Prevention and Way Forward)
\r\n\r\nमुजफ्फरनगर की घटना से हमें यह सीखना चाहिए कि पारिवारिक विवादों को कभी भी इतना नहीं बढ़ने देना चाहिए कि वापसी का कोई रास्ता न बचे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n संवाद (Communication) है सबसे जरूरी: पति-पत्नी के बीच वित्तीय मामलों (Financial matters) को लेकर हमेशा स्पष्ट संवाद होना चाहिए। किसी को पैसे देने या खर्च करने से पहले एक-दूसरे को विश्वास में लेना चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n तीसरे व्यक्ति को बाहर रखें: मियां-बीवी के झगड़े में सास, ससुर, दोस्तों या रिश्तेदारों को तब तक शामिल नहीं करना चाहिए जब तक कि बात शारीरिक हिंसा (Physical violence) तक न पहुंच जाए।\r\n \r\n
- \r\n गुस्से पर नियंत्रण (Anger Management): जब भी विवाद अत्यधिक बढ़ जाए, तो किसी एक को उस जगह से कुछ समय के लिए हट जाना चाहिए। रात के समय विवाद करने से बचना चाहिए क्योंकि उस समय सोचने-समझने की क्षमता कम हो जाती है।\r\n \r\n
- \r\n काउंसलिंग (Counseling) की मदद लें: अगर पति-पत्नी के बीच लगातार क्लेश रहता है, तो उन्हें पारिवारिक परामर्शदाता (Family Counselor) या मनोवैज्ञानिक की मदद लेनी चाहिए। इसे समाज में कोई 'पागलपन' नहीं, बल्कि समझदारी का कदम माना जाना चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n पुलिस और महिला हेल्पलाइन का सही इस्तेमाल: अगर घरेलू हिंसा हो रही है, तो खुद कानून हाथ में लेने या जहर खाने के बजाय पुलिस (Dial 112) या वीमेन पॉवर लाइन (1090) की मदद लेनी चाहिए।\r\n \r\n
\r\n\r\n
मुजफ्फरनगर के सरवट मोहल्ले के उस बंद कमरे में केवल चार लोगों की मौत नहीं हुई है, बल्कि वहां इंसानियत, रिश्तों की पवित्रता और सहनशीलता ने भी दम तोड़ा है। 1500 रुपये की ईदी, जो बहन के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए दी गई थी, उसने इरशाद और नौरिन के पूरे परिवार को निगल लिया। आहिल और अक्सा जैसे मासूम फूल, जिन्हें दुनिया की कोई समझ नहीं थी, वे अपने ही माता-पिता के बेकाबू गुस्से की भेंट चढ़ गए।
\r\n\r\n\r\n\r\n
मुजफ्फरनगर पुलिस और फॉरेंसिक टीम अब इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में लगी है। जल्द ही पोस्टमार्टम और बिसरा रिपोर्ट से मौत का सही तरीका सामने आ जाएगा। लेकिन कोई भी रिपोर्ट उन दो मासूम बच्चों को वापस नहीं ला सकती। यह घटना समाज के हर व्यक्ति के लिए एक चेतावनी है— क्रोध वह आग है जो सबसे पहले उसी को जलाती है जिसने उसे अपने अंदर पाला हो। हमें अपने घरों को कुरुक्षेत्र बनने से रोकना होगा, अन्यथा ऐसे खौफनाक मंजर समाज को डराते रहेंगे। पुलिस की अंतिम रिपोर्ट का सभी को इंतजार है, ताकि इस केस की पूरी सच्चाई और कानूनी तस्वीर साफ हो सके।
Sabse pehle comment karne wale banein.