बिजनौर, यूपी: बिजनौर में गंगा नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है, जहां गंगा बैराज से रावली तक बना एफ्लेक्स बांध बुरी तरह से कटान का शिकार हो गया है। तटबंध का 500 मीटर से अधिक हिस्सा गंगा के तेज बहाव में बह गया है, जिससे इस पर बनी पक्की सड़क भी नदी में समा गई है। इस गंभीर स्थिति के कारण एक दर्जन से अधिक गांवों और हजारों एकड़ की फसल पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।READ ALSO:-दुष्कर्म पीड़िता की गुहार बनी पुलिसकर्मियों की बर्खास्ती की वजह: SSP ने मुंडारी SO और दरोगा को किया निलंबित
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सरकारी टीमें युद्धस्तर पर जुटीं, ग्रामीण भी बने सहारा
\r\n\r\nइस संकट से निपटने के लिए सिंचाई विभाग, नेशनल हाईवे और स्थानीय प्रशासन की टीमें युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। सैकड़ों मजदूर, जेसीबी और डंपर के साथ तटबंध को बचाने में जुटे हैं। लेकिन, प्राकृतिक आपदा की इस घड़ी में स्थानीय ग्रामीणों ने भी दिल खोलकर मदद की है। वे अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर स्वेच्छा से मिट्टी और पत्थर पहुंचा रहे हैं ताकि कटाव को रोका जा सके। यह दिखाता है कि इस मुश्किल समय में सरकार और जनता कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
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सामने आया सामुदायिक सहयोग: गंगा मैया से प्रार्थना और राहत सामग्री वितरण
\r\n\r\nजहां प्रशासन तकनीकी और इंजीनियरिंग समाधानों पर काम कर रहा है, वहीं स्थानीय लोगों ने आस्था का सहारा लिया है। अनुज मलिक और कई अन्य लोगों ने गंगा के तट पर विशेष पूजा-अर्चना की, गंगा में नारियल और प्रसाद अर्पित किए और गंगा मैया से इस प्रकोप को शांत करने की विनती की।
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वहीं, राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के नेता डॉ. नीरज चौधरी ने भी मानवता की मिसाल पेश करते हुए मौके पर पहुंचे और काम कर रहे श्रमिकों और ग्रामीणों को फल और खाद्य सामग्री वितरित की। कई अन्य लोग भी अपने स्तर पर राहत सामग्री बांटकर लोगों का हौसला बढ़ा रहे हैं। यह घटना बताती है कि जब प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखाती है, तो इंसानियत और एकजुटता ही सबसे बड़ा सहारा बनती है।
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Sabse pehle comment karne wale banein.