हस्तिनापुर: हस्तिनापुर-चांदपुर मार्ग पर बनी एक पुलिया हाल ही में आई बाढ़ के पानी में बह गई है, जिससे एक बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब ₹5 करोड़ की लागत से बनी यह सड़क और पुलिया, जो केवल छह महीने पहले ही तैयार हुई थी, घटिया निर्माण सामग्री के कारण क्षतिग्रस्त हुई है। पुलिया के टूटने से सैकड़ों ग्रामीणों, किसानों और स्कूली बच्चों का आवागमन ठप हो गया है।Read also:-बेटी को छेड़ने का किया विरोध तो 'मां' पर तेजाब से हमला: मेरठ में नर्स पर एसिड अटैक, हालत गंभीर
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जान जोखिम में डालकर कर रहे सफर
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पुलिया टूटने के बाद, स्थानीय ग्रामीणों ने लोहे की चादरों और रस्सियों का उपयोग करके एक अस्थाई और बेहद खतरनाक रास्ता बनाया है। इस रास्ते से गुजरना किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि इसी जगह पर पहले भी एक ग्रामीण की डूबने से मौत हो चुकी है, जिससे इस अस्थाई व्यवस्था की खतरनाकता और भी बढ़ जाती है।
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क्यों टूटा पुल?
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ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में ठेकेदारों ने घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि भीमकुंड मोड़ से पुल तक एक मजबूत पुलिया बनाने की लगातार मांग की गई थी, लेकिन अधिकारियों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि बाढ़ का दबाव झेल न पाने के कारण पुलिया चंद महीनों में ही ढह गई।
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किसानों और छात्रों के लिए बड़ी मुसीबत
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हस्तिनापुर के किसानों के लिए यह मार्ग जीवनरेखा जैसा है, क्योंकि उनकी हजारों बीघा जमीन गंगा पार स्थित है। पुल टूटने से न केवल उनकी खेती के काम प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि स्कूल जाने वाले बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। ग्राम बधवा और हादीपुर गांवडी के ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द एक पक्की और मजबूत पुलिया बनाने की माँग की है।
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इस मामले में, मवाना के उपजिलाधिकारी ने बताया है कि उन्होंने पीडब्ल्यूडी विभाग को इस संबंध में एक पत्र भेजा है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि पानी का स्तर कम होने के बाद पुल का निर्माण कार्य फिर से शुरू किया जाएगा। हालांकि, सवाल यह है कि क्या इस बार निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान रखा जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
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