उत्तर प्रदेश की BJP सरकार के ‘भयमुक्त’ यूपी के दावों पर मेरठ का विकल चपराना विवाद अब एक गहरे राजनीतिक संकट में बदल गया है। राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर के करीबी रहे विकल चपराना द्वारा व्यापारी सत्यम रस्तोगी को सरेआम अपमानित कर नाक रगड़वाने की घटना ने पार्टी की छवि पर ऐसा धब्बा लगाया है कि संगठन अब दो गुटों में बँट गया है। यह विवाद अब सिर्फ एक ‘पार्किंग झगड़े’ तक सीमित नहीं, बल्कि गुर्जर वोट बनाम वैश्य समाज की वर्चस्व की लड़ाई बन गया है।READ ALSO:-उत्तर प्रदेश में 1812 परिषदीय स्कूलों के 5000+ शिक्षकों की नए सिरे से तैनाती, वरिष्ठता सूची में होगा बदलाव
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

वायरल वीडियो ने BJP की मुश्किलें बढ़ाईं

\r\n\r\n
विकल चपराना की गुंडागर्दी का वीडियो वायरल होते ही BJP पर चारों ओर से सवाल उठने लगे। विधायकों से लेकर सांसदों तक, पार्टी के हर स्तर पर ‘डैमेज कंट्रोल’ की कोशिशें शुरू हो गईं।
\r\nयह मामला सिर्फ मेरठ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे पश्चिम यूपी में गुर्जर और वैश्य वोटों के संतुलन को हिला गया है। आगामी पंचायत चुनाव से पहले यह विवाद BJP के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

घटना और गिरफ्तारी का पूरा सिलसिला

\r\n\r\n
यह घटना 19 अक्टूबर की रात मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर के कार्यालय के नीचे पार्किंग विवाद से शुरू हुई। विकल चपराना ने मंत्री का नाम लेकर दबंगई दिखाई और व्यापारी सत्यम रस्तोगी को सार्वजनिक रूप से नाक रगड़वाने पर मजबूर किया। विडंबना यह रही कि पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन पूरी तरह निष्क्रिय रही।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

जमानत का खेल और बढ़ा बवाल

\r\n\r\n
    \r\n
  • वीडियो वायरल होने के बाद मेरठ पुलिस ने तत्काल विकल चपराना को गिरफ्तार तो किया, लेकिन मामूली धाराओं में केस दर्ज होने से आरोपी को देर रात ही जमानत मिल गई।
  • \r\n
  • इससे वैश्य समाज और विपक्षी दलों का गुस्सा भड़क उठा। बाद में BJP के एक धड़े के दबाव पर पुलिस ने केस में रंगदारी और अन्य गैर-जमानती धाराएँ जोड़ दीं।
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

BJP में खुली गुटबाजी: सोमेंद्र तोमर बनाम लक्ष्मीकांत वाजपेयी

\r\n\r\n
    \r\n
  • यह विवाद सीधे BJP के दो पावर सेंटर्स में टकराव का कारण बन गया।
  • \r\n
  • मंत्री समर्थक गुट (गुर्जर वोट) — ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर पर गुर्जर समाज को साधने की जिम्मेदारी है। उन्होंने विवाद बढ़ने पर विकल चपराना से सार्वजनिक दूरी बना ली और किसी भी संबंध से इनकार किया।
  • \r\n
  • वैश्य समाज समर्थक गुट (वरिष्ठ नेतृत्व) — राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, सांसद अरुण गोविल, विधायक अमित अग्रवाल और अन्य दिग्गज नेता व्यापारी सत्यम रस्तोगी के पक्ष में खुलकर सामने आए।
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

वैश्य समाज का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा SSP दफ्तर

\r\n\r\n
BJP के वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को SSP डॉ. विपिन ताडा से मिला। इसमें शामिल थे:
\r\n\r\n
    \r\n
  • डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी (राज्यसभा सांसद)
  • \r\n
  • अरुण गोविल (सांसद)
  • \r\n
  • अमित अग्रवाल (विधायक, कैंट)
  • \r\n
  • धर्मेंद्र भारद्वाज (एमएलसी)
  • \r\n
  • विवेक रस्तोगी (महानगर अध्यक्ष)
  • \r\n
  • गौरव चौधरी (जिला पंचायत अध्यक्ष)
  • \r\n
  • विनीत अग्रवाल शारदा (भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ प्रदेश संयोजक)
  • \r\n
\r\n\r\n


\r\nमुख्य मांगें:

\r\n\r\n
दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई: नेताओं ने कहा कि पुलिस की मौजूदगी में यह घटना हुई, इसलिए केवल विकल चपराना नहीं बल्कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी भी जवाबदेह हैं।
\r\n\r\n
निष्पक्ष जांच: नेताओं ने साफ कहा कि किसी भी राजनीतिक दबाव के बिना रंगदारी की धाराओं में निष्पक्ष जांच हो।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

अरुण गोविल और वाजपेयी के तीखे बयान

\r\n\r\n
एसएसपी से मुलाकात के बाद सांसद अरुण गोविल ने कहा —
\r\n\r\n

“यह घटना मानवीय और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत घृणित है। पार्टी इस तरह की गुंडागर्दी को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।”

\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

वहीं डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा —

\r\n\r\n
“हमारे शहरी के साथ अन्याय हुआ है। सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। विपक्ष को बैठे-बिठाए मुद्दा मिला है, लेकिन ये ट्विटर के शेर हैं, सड़क पर नहीं उतर सकते।”
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

सोमेंद्र तोमर का पलटवार उल्टा पड़ा

\r\n\r\n
विवाद बढ़ने के बाद मंत्री सोमेंद्र तोमर ने विकल चपराना से किसी भी प्रकार के संबंध से इनकार किया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

लेकिन उनके ही सोशल मीडिया पोस्ट्स और फोटो ने यह दावा झुठला दिया। घटना से कुछ घंटे पहले ही मंत्री और विकल चपराना की केक काटते हुए तस्वीरें सामने आईं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि मंत्री का यह इनकार जनता को रास नहीं आया।

\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

जातीय समीकरण और पंचायत चुनाव पर असर

\r\n\r\n
    \r\n
  • यह विवाद BJP की “एकता” पर सीधा प्रहार है।
  • \r\n
  • गुर्जर वोट (सोमेंद्र तोमर का आधार) और वैश्य समाज (पार्टी का पारंपरिक समर्थक वर्ग) के बीच खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है।
  • \r\n
  • विकल चपराना का निलंबन वैश्य समाज को शांत करने की कोशिश तो है, लेकिन गुर्जर समाज के एक वर्ग का उसके समर्थन में उतरना पार्टी के लिए नया संकट बना हुआ है।
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

माफीनामा और विवाद का नया मोड़

\r\n\r\n
    \r\n
  • जेल जाने से पहले विकल चपराना ने Facebook वीडियो जारी कर माफी मांगी, खुद को “राजनीतिक बकरा” बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की।
  • \r\n
  • इसी बीच सोशल मीडिया पर यह खबर भी फैली कि व्यापारी सत्यम रस्तोगी कथित रूप से नशे में था और उसने मंत्री सोमेंद्र तोमर के खिलाफ अपशब्द कहे थे। इस दावे के बाद गुर्जर समाज का एक तबका चपराना के समर्थन में उतर आया।
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अब मामला केवल गुंडागर्दी नहीं, बल्कि दो समुदायों की इज्जत की जंग बन चुका है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

BJP की चुनावी रणनीति पर गहरा असर

\r\n\r\n
    \r\n
  • विकल चपराना विवाद ने BJP के “भयमुक्त यूपी” के दावों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
  • \r\n
  • मेरठ का यह मामला दिखाता है कि सत्ता का अहंकार, जातीय समीकरण और राजनीतिक मजबूरी एक साथ कैसे टकराते हैं।
  • \r\n
  • पार्टी का वैश्य समाज को शांत करने का प्रयास तो साफ दिख रहा है, लेकिन गुर्जर समाज में नाराजगी BJP के लिए पंचायत चुनाव से पहले बड़ा सिरदर्द बन सकती है।
    \r\n  
  • \r\n
विज्ञापन
विज्ञापन