मेरठ (Meerut Crime News): उत्तर प्रदेश में अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ चलाए जा रहे 'जीरो टॉलरेंस' अभियान के तहत मेरठ पुलिस ने एक ऐसी खौफनाक साजिश को नाकाम किया है, जिसने पूरे पुलिस महकमे को भी हैरत में डाल दिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हथियारों की तस्करी के नेटवर्क को नेस्तनाबूद करते हुए मेरठ की स्वाट (SWAT) टीम, सर्विलांस सेल और थाना लोहियानगर पुलिस की संयुक्त टीम ने एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया। पुलिस ने एक मकान के तहखाने (बेसमेंट) में बेहद शातिर तरीके से चलाई जा रही अवैध शस्त्र फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है। यह 'मौत का कारखाना' किसी सुनसान जंगल में नहीं, बल्कि लोगों की नजरों से बचने के लिए एक कब्रिस्तान के ठीक पास संचालित किया जा रहा था। इस कार्रवाई में 11 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके पास से भारी मात्रा में असलहे, कारतूस और उन्हें बनाने के अत्याधुनिक उपकरण बरामद हुए हैं।READ ALSO:-बिजनौर में खौफ का अंत: नजीबाबाद पुलिस ने नाकाम की बड़ी साजिश, बाग में खूनी खेल की योजना बनाते 4 हिस्ट्रीशीटर हथियारों के जखीरे के साथ गिरफ्तार!
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कब्रिस्तान का सन्नाटा और तहखाने का राज: खौफनाक थी जगह की लोकेशन

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अपराधियों के दिमाग कितने शातिर हो सकते हैं, इसका अंदाजा इस फैक्ट्री की लोकेशन देखकर लगाया जा सकता है। थाना लोहियानगर क्षेत्र के ग्राम अल्लीपुर में स्थित एक कब्रिस्तान के पास के मकान को इस गिरोह ने अपना सुरक्षित ठिकाना बनाया था। अमूमन कब्रिस्तान के आस-पास सन्नाटा रहता है और रात के समय लोग इधर आने से कतराते हैं। इसी मनोवैज्ञानिक तथ्य का फायदा उठाते हुए इस गिरोह ने मकान के बेसमेंट (तहखाने) में हथियार बनाने का काम शुरू किया।
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जमीन के नीचे बने इस तहखाने की दीवारों को इस तरह से तैयार किया गया था कि अंदर चलने वाली ड्रिल मशीन, ग्राइंडर, हथौड़ी और आरी की आवाज बाहर न आ सके। बाहर से देखने पर यह एक बेहद सामान्य मकान नजर आता था, लेकिन इसके ठीक नीचे एक मिनी-फैक्ट्री चल रही थी जहाँ दिन-रात अवैध पिस्टल गढ़ी जा रही थीं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह जगह इसलिए चुनी गई थी ताकि पुलिस की पेट्रोलिंग टीमों या स्थानीय निवासियों को किसी भी प्रकार का शक न हो।
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मुखबिर की सटीक सूचना और स्वाट टीम का अचूक 'क्रैकडाउन'

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मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पांडेय के कुशल निर्देशन में जिले की स्वाट टीम और सर्विलांस सेल पिछले कई दिनों से अवैध हथियारों की तस्करी के इनपुट पर काम कर रही थी। इसी बीच पुलिस के मुखबिर तंत्र से एक पुख्ता सूचना प्राप्त हुई कि अल्लीपुर ग्राम के पास बड़े पैमाने पर हथियारों का निर्माण और खरीद-फरोख्त हो रही है।
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सूचना को गंभीरता से लेते हुए तुरंत एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। पुलिस ने बेहद गुपचुप तरीके से सादे कपड़ों में इलाके की रेकी की। जब यह पुष्टि हो गई कि मकान के अंदर संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं, तो पुलिस की भारी भरकम टीम ने चारों तरफ से घेराबंदी कर मकान पर अचानक धावा बोल दिया। जब पुलिस बेसमेंट का दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई, तो वहां का नजारा देखकर खुद पुलिसकर्मी भी दंग रह गए। तहखाने के अंदर कई लोग हथियारों को अंतिम रूप देने और मशीनों पर काम करने में व्यस्त थे। पुलिस की इस त्वरित और अचूक कार्रवाई ने किसी भी अपराधी को भागने या हथियार उठाने का मौका नहीं दिया।
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'ऑन डिमांड' तैयार होती थी पिस्टल: 35 से 60 हजार रुपये का था रेट

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गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों से जब सख्ती से पूछताछ की गई, तो इस पूरे काले कारोबार के काम करने के तरीके (Modus Operandi) का चौंकाने वाला खुलासा हुआ। यह गिरोह बाजार में थोक के भाव हथियार नहीं बेचता था, बल्कि यह एक 'कस्टमाइज्ड' और 'ऑन-डिमांड' सिंडिकेट था।
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आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे केवल ऑर्डर मिलने पर ही पिस्टल तैयार करते थे। हथियारों के शौकीन लोग, स्थानीय गुंडे या दूसरे गिरोह के लोग इनसे संपर्क करते थे। एक पिस्टल की कीमत उसकी गुणवत्ता, धातु और फिनिशिंग के आधार पर तय की जाती थी, जो 35,000 रुपये से लेकर 60,000 रुपये तक होती थी। जो ग्राहक जितनी ज्यादा रकम देता था, उसे उतनी ही बेहतरीन क्वालिटी और चमकदार फिनिश वाली .32 बोर की पिस्टल बनाकर दी जाती थी। इस गिरोह का नेटवर्क मेरठ ही नहीं बल्कि आस-पास के कई जनपदों तक फैला हुआ था।
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हाल ही में बिकी थीं 8 पिस्टल: खरीदारों की तलाश में जुटी पुलिस

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पूछताछ में एक और बेहद अहम और चिंताजनक बात सामने आई है। सरगना असलम और उसके साथियों ने कबूल किया है कि हाल ही के दिनों में इस फैक्ट्री से तैयार 8 अवैध पिस्टल ग्राहकों को बेची जा चुकी हैं। इन हथियारों का इस्तेमाल आगामी किसी बड़ी आपराधिक वारदात, हत्या, डकैती या रंगदारी मांगने में किया जा सकता है।
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इस खुलासे के बाद मेरठ पुलिस हाई अलर्ट पर है। एसएसपी अविनाश पांडेय ने निर्देश दिए हैं कि उन आठ खरीदारों की जल्द से जल्द पहचान की जाए और उन्हें गिरफ्तार कर वे हथियार रिकवर किए जाएं। इसके लिए पुलिस सर्विलांस और पकड़े गए आरोपियों के मोबाइल डेटा की गहन जांच कर रही है।
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कौन हैं ये 11 शातिर अपराधी? (गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण)

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पुलिस ने मौके से जिन 11 लोगों को गिरफ्तार किया है, वे सभी इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ियां हैं। इनमें से कुछ हथियार बनाने के कारीगर थे, कुछ कच्चा माल लाते थे और कुछ ग्राहकों से डील करके माल की सुरक्षित डिलीवरी (सप्लाई) सुनिश्चित करते थे। गिरफ्तार किए गए मुख्य अभियुक्तों के नाम हैं:
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    असलम (मुख्य कारीगर और मास्टरमाइंड)
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    अलाउद्दीन
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    अनस
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    शक्ति
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    मुनीर
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    आरिश (इनके साथ 5 अन्य सहयोगी भी रंगे हाथों पकड़े गए हैं।)
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इसके अलावा, पुलिस की जांच में इस गिरोह से जुड़े 8 अन्य सदस्यों के नाम भी सामने आए हैं जो फिलहाल फरार हैं। पुलिस की कई टीमें इन फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
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बरामदगी का विस्तृत विवरण: पुलिस के हाथ लगा हथियारों और मशीनों का बड़ा जखीरा

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इस अंडरग्राउंड फैक्ट्री से पुलिस ने जो सामान बरामद किया है, वह यह बताने के लिए काफी है कि यहां कितने बड़े पैमाने पर काम हो रहा था:
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    तैयार असलहे: 08 अदद पूरी तरह से तैयार .32 बोर की उच्च गुणवत्ता वाली पिस्टल (मय मैगजीन)।
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    अधबने असलहे: 03 अधबनी पिस्टल, जिन पर फिनिशिंग का काम चल रहा था।
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    अतिरिक्त सामग्री: 12 अतिरिक्त मैगजीन और भारी मात्रा में खोखे व कारतूस।
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    शस्त्र बनाने के भारी उपकरण: लेथ मशीन, ग्राइंडर, कई तरह की आरी, हथौड़ी, भारी ड्रिल मशीन, वेल्डिंग रॉड, वेल्डिंग मशीन, स्प्रिंग और लोहे की चादरें।
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    वाहन और संचार उपकरण: 03 स्विफ्ट कारें (जिनका इस्तेमाल हथियारों की सुरक्षित डिलीवरी और वीआईपी ग्राहकों तक माल पहुंचाने के लिए किया जाता था) और 07 मोबाइल फोन।
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एसएसपी अविनाश पांडेय का स्पष्ट संदेश: लगेगी गैंगस्टर एक्ट

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इस बड़ी कामयाबी पर मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय ने स्वाट टीम और थाना लोहियानगर पुलिस की जमकर सराहना की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, "यह गिरोह काफी समय से क्षेत्र में सक्रिय था और चोरी-छिपे हथियारों की सप्लाई कर समाज की शांति व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन गया था। पुलिस की इस संयुक्त कामयाबी ने अपराधियों के पूरे नेटवर्क को करारा झटका दिया है।"
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एसएसपी ने आगे बताया कि पुलिस इन सभी 11 अभियुक्तों को जेल भेज रही है और इनके आपराधिक इतिहास को खंगाला जा रहा है। इन सभी पर न केवल आर्म्स एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी, बल्कि भविष्य में इन पर गैंगस्टर एक्ट (Gangster Act) भी लगाया जाएगा। इसके तहत इनके द्वारा अपराध के जरिए अर्जित की गई तमाम अवैध संपत्तियों को कुर्क (Seize) करने की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। मेरठ पुलिस की यह कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि कानून के हाथ बहुत लंबे हैं और चाहे अपराधी तहखाने में छिपें या कब्रिस्तान में, वे पुलिस की नजरों से बच नहीं सकते।
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