मेरठ: लोहियानगर में कूड़े के पहाड़ को हटाने के लिए जारी किए गए ₹33 करोड़ के ई-टेंडर में मेरठ नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निगम ने दावा किया था कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी, लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि नियमों की अनदेखी कर एक विशेष कंपनी को फायदा पहुँचाने की कोशिश की गई है।READ ALSO:-₹5 करोड़ की सड़क 6 महीने में ही बहा ले गई बाढ़: हस्तिनापुर में टूटा पुल, ग्रामीणों ने रस्सी से बनाया जानलेवा रास्ता
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क्या है पूरा मामला?
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नगर निगम ने लोहियानगर के कूड़ा निस्तारण के लिए ई-टेंडर जारी किया था, जिसमें चार कंपनियों ने हिस्सा लिया। टेंडर प्रक्रिया के दौरान एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था, जिसमें अपर नगर आयुक्त लवी त्रिपाठी, मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, मुख्य लेखा नगर परीक्षक अमित भार्गव और एक अधिशासी अभियंता शामिल थे।
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    नियमों का उल्लंघन: आरोप है कि इस विशेषज्ञ समिति की मौजूदगी के बिना ही कंपनियों की तकनीकी जाँच को दरकिनार करते हुए उनकी फाइनेंशियल बिड (वित्तीय बोलियाँ) खोल दी गईं। यह प्रक्रिया नियमों के खिलाफ है।
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    पक्षपात का आरोप: टेंडर में हिस्सा लेने वाली एक कंपनी ने खुलकर आरोप लगाया है कि यह पूरी कवायद एक खास कंपनी को लाभ पहुँचाने के लिए की गई थी।
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अधिकारियों का खंडन और संदेह
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इन आरोपों के बावजूद, अपर नगर आयुक्त लवी त्रिपाठी ने सभी आरोपों को "निराधार" बताया है। उनका कहना है कि "पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई है और समिति के सदस्य भी मौजूद थे।" हालांकि, मंगलवार रात तक टेंडर के परिणाम आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड नहीं किए गए थे, जबकि चारों कंपनियों की लगाई गई दरों को सार्वजनिक कर दिया गया था, जिससे इस मामले में और भी संदेह पैदा हो रहा है।
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इस घटना ने एक बार फिर स्थानीय निकाय की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर किया है। इस तरह के आरोप जनता के बीच विश्वास को कमजोर करते हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त जाँच की आवश्यकता है कि सार्वजनिक परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की धांधली न हो।
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