मेरठ। जनपद के थाना भावनपुर क्षेत्र में धोखाधड़ी और जालसाजी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां शातिर जालसाजों ने फर्जी पहचान पत्र (आधार कार्ड) का इस्तेमाल कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता मंसूर अली नकवी की करीब 5 लाख रुपये की शटरिंग सामग्री हड़प ली। पीड़ित की शिकायत पर भावनपुर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

फर्जी पहचान पत्र देकर किराए पर ली सामग्री

प्राप्त जानकारी के अनुसार, भाजपा नेता मंसूर अली नकवी भवन निर्माण में उपयोग होने वाली शटरिंग सामग्री किराए पर देने का कार्य करते हैं। कुछ समय पूर्व अज्ञात जालसाज उनके पास पहुंचे और किसी निर्माण कार्य का हवाला देते हुए बड़े पैमाने पर शटरिंग सामग्री किराए पर मांगी।

विश्वास जीतने के लिए आरोपियों ने पहचान पत्र के तौर पर एक आधार कार्ड की छायाप्रति सौंपी और औपचारिकताएं पूरी करने का नाटक किया। इसके बाद वे करीब 5 लाख रुपये मूल्य की शटरिंग सामग्री वाहनों में लोड करवाकर ले गए।

न किराया दिया, न वापस की सामग्री

तय समयावधि बीत जाने के बाद जब भाजपा नेता ने किराए की रकम और सामग्री वापसी के लिए संपर्क करने का प्रयास किया, तो आरोपियों के फोन नंबर बंद आने लगे। संदेह होने पर जब उनके द्वारा दिए गए दस्तावेजों और पते की छानबीन की गई, तो पता चला कि जालसाजों द्वारा दिया गया आधार कार्ड और पहचान का विवरण पूरी तरह से फर्जी था।

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इसके बाद पीड़ित को अपने साथ हुई बड़ी धोखाधड़ी का अहसास हुआ। आरोपियों ने न तो तय किराया चुकाया और न ही सामग्री लौटाई।

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, जांच शुरू

धोखाधड़ी का शिकार होने के बाद भाजपा नेता मंसूर अली नकवी ने पूरे मामले की लिखित तहरीर थाना भावनपुर में दी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात जालसाजों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और अमानत में खयानत से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

पुलिस अब घटना स्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज और संदिग्ध मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के आधार पर आरोपियों की शिनाख्त में जुटी है।

महत्वपूर्ण डिस्क्लेमर

यह समाचार पीड़ित द्वारा पुलिस को दी गई प्राथमिक तहरीर, दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) और स्थानीय पुलिस सूत्रों से प्राप्त प्राथमिक विवरणों पर आधारित है। मामले में पुलिस की विवेचना जारी है और कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपियों की गिरफ्तारी तथा अदालत में दोष सिद्ध होना शेष है।

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