अगर आप नया मकान, प्लॉट या जमीन खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो Property Documents Verification को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। केवल विक्रेता द्वारा दिखाए गए कागजात या रजिस्ट्री की कॉपी देखकर संपत्ति खरीदने का फैसला नहीं करना चाहिए। कई राज्यों में जमीन और रजिस्ट्रेशन से जुड़े रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जिनसे आप शुरुआती स्तर पर दस्तावेजों की जानकारी का मिलान कर सकते हैं।

हालांकि, एक जरूरी बात समझना जरूरी है। ऑनलाइन रिकॉर्ड में जानकारी मिल जाने का मतलब यह नहीं है कि पूरी संपत्ति कानूनी रूप से विवादमुक्त या हर तरह से सुरक्षित है। खरीद से पहले संबंधित रिकॉर्ड की विस्तृत जांच और जरूरत पड़ने पर कानूनी सलाह भी जरूरी है।

ऑनलाइन प्रॉपर्टी रिकॉर्ड चेक करना क्यों जरूरी है?

जमीन खरीदते समय सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि रिकॉर्ड में संपत्ति किसके नाम दर्ज है। इसके साथ जमीन का खसरा या गाटा नंबर, क्षेत्रफल, स्थान और उपलब्ध अन्य रिकॉर्ड भी मिलाए जा सकते हैं।

उत्तर प्रदेश में राजस्व परिषद का भूलेख पोर्टल खतौनी और जमीन से संबंधित कई जानकारियां ऑनलाइन उपलब्ध कराता है। पोर्टल पर भूखंड या गाटा की बिक्री की स्थिति, वादग्रस्त होने की स्थिति और नामांतरण जैसी जानकारियों से जुड़े विकल्प भी उपलब्ध हैं।

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रजिस्ट्री ऑनलाइन कैसे जांचें?

हर राज्य का अपना स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन या भूमि रिकॉर्ड पोर्टल हो सकता है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर सम्पत्ति खोजें और सम्पत्ति विवरण जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं।

ऑनलाइन जांच के लिए सामान्य तौर पर ये कदम अपनाएं:

1. आधिकारिक सरकारी पोर्टल खोलें।
अपने राज्य के स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की वेबसाइट पर जाएं। उत्तर प्रदेश के लिए IGRSUP आधिकारिक पोर्टल है।

2. Property Search या संपत्ति खोजें विकल्प चुनें।
जहां उपलब्ध हो, संपत्ति खोजने या संपत्ति विवरण देखने वाली सेवा का इस्तेमाल करें।

3. संपत्ति की जानकारी दर्ज करें।
जिला, तहसील या संबंधित कार्यालय, संपत्ति का विवरण, खसरा/गाटा नंबर, रजिस्ट्री से जुड़ी उपलब्ध जानकारी आदि मांगी जा सकती है। अलग-अलग राज्यों में प्रक्रिया और उपलब्ध विकल्प अलग हो सकते हैं।

4. ऑनलाइन रिकॉर्ड का मिलान करें।
रिकॉर्ड में उपलब्ध नाम, संपत्ति का विवरण, क्षेत्रफल, रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी और अपनी रजिस्ट्री के कागजात की जानकारी को ध्यान से मिलाएं।

भूलेख और खतौनी भी जरूर देखें

सिर्फ रजिस्ट्री रिकॉर्ड देखना पर्याप्त नहीं है। उत्तर प्रदेश के भूलेख पोर्टल पर अधिकार अभिलेख यानी खतौनी, भूखंड/गाटा की बिक्री की स्थिति, वादग्रस्त स्थिति और नामांतरण से जुड़ी जानकारी देखने की सुविधा उपलब्ध है।

इसलिए जमीन खरीदने से पहले रजिस्ट्री में मौजूद जानकारी और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी के बीच अंतर जरूर जांचें।

Mutation यानी दाखिल-खारिज क्यों महत्वपूर्ण है?

दाखिल-खारिज या Mutation का रिकॉर्ड यह देखने में मदद करता है कि जमीन से संबंधित राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण की स्थिति क्या है। लेकिन इसे अकेले अंतिम स्वामित्व प्रमाण नहीं मानना चाहिए। जमीन के अधिकार से जुड़े दस्तावेजों की पूरी श्रृंखला और स्थानीय रिकॉर्ड भी देखना जरूरी हो सकता है।

Encumbrance Certificate यानी EC भी जांचें

प्रॉपर्टी खरीदने से पहले उपलब्ध होने पर Encumbrance Certificate (EC) या संबंधित भार/बंधक रिकॉर्ड की जांच करना भी महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य यह पता लगाने में मदद करना है कि संपत्ति से संबंधित पंजीकृत लेनदेन या भार की कोई जानकारी रिकॉर्ड में मौजूद है या नहीं।

लेकिन EC Clear होने को यह प्रमाण नहीं मानना चाहिए कि संपत्ति हर तरह के विवाद से पूरी तरह मुक्त है। इसलिए कोर्ट केस, राजस्व विवाद, बैंक बंधक और अन्य संबंधित रिकॉर्ड की अलग से जांच आवश्यक हो सकती है।

Record Not Found आए तो क्या करें?

अगर ऑनलाइन रिकॉर्ड नहीं मिलता है, तो तुरंत दस्तावेज को फर्जी मान लेना सही नहीं होगा। रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के पीछे डेटा अपडेट, पुराने रिकॉर्ड के डिजिटाइजेशन की स्थिति या पोर्टल से जुड़ी दूसरी वजहें हो सकती हैं।

ऐसी स्थिति में संबंधित Sub-Registrar Office या राजस्व कार्यालय से रिकॉर्ड की पुष्टि कराएं। जरूरत पड़ने पर प्रमाणित प्रति या आधिकारिक रिकॉर्ड भी प्राप्त करें।

5 मिनट की ऑनलाइन जांच के बाद भी ये सावधानी रखें

प्रॉपर्टी खरीदना बड़ा वित्तीय फैसला है। इसलिए ऑनलाइन रिकॉर्ड को शुरुआती सत्यापन के तौर पर इस्तेमाल करें, अंतिम कानूनी निष्कर्ष के तौर पर नहीं। रजिस्ट्री, खतौनी, नामांतरण, EC, जमीन की स्थिति और उपलब्ध न्यायिक/राजस्व रिकॉर्ड का आपस में मिलान करें।

अगर दस्तावेजों में नाम, क्षेत्रफल, खसरा/गाटा नंबर या संपत्ति के विवरण में अंतर दिखाई देता है, तो पैसा देने से पहले संबंधित सरकारी कार्यालय और योग्य प्रॉपर्टी वकील से सत्यापन कराना बेहतर है।

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