मेरठ में Meerut Illegal Arms Case में भावनपुर थाना पुलिस ने अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान हुई मुठभेड़ में एक आरोपी घायल हुआ। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक पिस्टल, एक तमंचा और कुल 46 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार, इस मामले की जानकारी 5 अक्टूबर को मोटरसाइकिल लूट की जांच के दौरान सामने आई थी। उस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी फैजान के मोबाइल फोन की जांच की गई। इसी दौरान पुलिस को कथित अवैध हथियारों के कारोबार से जुड़ी जानकारी मिली।
पुलिस ने बनाई टीम, चार आरोपियों की गिरफ्तारी
पुलिस के मुताबिक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर मामले की जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की गई। टीम ने 7 अक्टूबर को कार्तिक, विशाल, अर्जुन और राशिद उर्फ मंत्री को गिरफ्तार किया।
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों से हथियार और कारतूस की खरीद से जुड़ी जानकारी मिलने का दावा किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने करीब एक साल पहले सहारनपुर से कारतूस खरीदे थे। हालांकि, इस कथित खरीद-फरोख्त से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच अभी जारी है।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›किनानगर के जंगल में बरामदगी
पुलिस के अनुसार, आरोपियों से पूछताछ के बाद किनानगर के जंगल में बरामदगी की कार्रवाई की गई। यहां कार्तिक के पास से 25 जिंदा कारतूस और विशाल के पास से 18 कारतूस मिलने की बात पुलिस ने कही है।
इसके अलावा अर्जुन के पास से एक तमंचा बरामद किया गया। राशिद उर्फ मंत्री के कब्जे से एक पिस्टल और तीन जिंदा कारतूस बरामद होने का पुलिस ने दावा किया है। इस तरह पुलिस के मुताबिक कुल 46 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं।
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गिरफ्तारी के दौरान मुठभेड़, एक आरोपी घायल
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की गिरफ्तारी के दौरान मुठभेड़ भी हुई। इसमें एक आरोपी घायल हो गया। घायल आरोपी को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है।
पुलिस अब बरामद हथियारों और कारतूसों के स्रोत की जानकारी जुटा रही है। जांच का एक अहम बिंदु यह भी है कि आरोपियों को हथियार और कारतूस कहां से मिले तथा कथित अवैध कारोबार में और कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े अन्य संभावित लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। फिलहाल आरोपियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और जांच उपलब्ध जानकारी के आधार पर आगे बढ़ रही है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त संबंधी बातें पुलिस की जांच और दावों पर आधारित हैं। अदालत से दोष सिद्ध होने तक आरोपियों को कानूनी रूप से दोषी नहीं माना जा सकता।
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