दिल्ली-एनसीआर (Delhi NCR) में हवा की गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में पहुँचने के बाद, प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। अब जल्द ही राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में क्लाउड सीडिंग (Cloud Seeding) यानी कृत्रिम बारिश कराई जाएगी। इस हाई-टेक ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए सेना का एक विशेष एयरक्राफ्ट कानपुर से मेरठ पहुँच चुका है। यह पहल Delhi NCR Pollution के संकट से जूझ रहे लोगों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है।READ ALSO:-UP एक्सप्रेस-वे पर सफर होगा हाईटेक और सेफ! CM योगी का बड़ा फैसला, हर 100KM पर खुलेगी फायर चौकी, आग लगते ही 'गोल्डन ऑवर' में पहुंचेगी टीम
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प्रदूषण के कारण बेहाल दिल्ली
\r\n\r\nDelhi NCR पिछले कई हफ्तों से 'बहुत खराब' और 'गंभीर' श्रेणी के AQI (Air Quality Index) का सामना कर रहा है। प्रदूषण के कारण स्कूलों को बंद करना पड़ा है और ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के कड़े प्रतिबंध लागू किए गए हैं।
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- \r\n पिछला रिकॉर्ड: वायु गुणवत्ता 'खतरनाक' स्तर पर पहुँच चुकी है, जिससे लोगों को सांस लेने में भारी दिक्कत हो रही है और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसे एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (Public Health Emergency) बताया है।\r\n \r\n
- \r\n समाधान: Cloud Seeding (कृत्रिम बारिश) को प्रदूषण के कणों को नीचे लाने और हवा को साफ करने का एक प्रभावी और त्वरित तरीका माना जाता है।\r\n \r\n
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अगले 3 दिनों में होगी कृत्रिम बारिश
\r\n\r\nताज़ा जानकारी के अनुसार, इस विशेष एयरक्राफ्ट के मेरठ पहुँचने के बाद, अगले 72 घंटों में कभी भी Delhi NCR में कृत्रिम बारिश को अंजाम दिया जा सकता है।
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- \r\n गोपनीय ऑपरेशन: यह पूरी प्रक्रिया फिलहाल गोपनीयता बनाए रखते हुए की जाएगी। अधिकारियों द्वारा इस प्रक्रिया के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद ही इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n अनुकूल स्थिति: बादलों की अनुकूल स्थिति को देखते हुए, शुक्रवार से अगले तीन दिनों के भीतर कभी भी कृत्रिम बारिश शुरू हो सकती है।\r\n \r\n
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ऐसे की जाएगी कृत्रिम बारिश: पाइरोटेक्निक तकनीक
\r\n\r\nDelhi NCR के प्रदूषण को कम करने के लिए पाइरोटेक्निक (Pyrotechnic) नाम की एक विशेष और आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
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- \r\n एयरक्राफ्ट की तैयारी: विशेष एयरक्राफ्ट की दोनों विंड्स (पंखों) के नीचे 8 से 10 पॉकेट (जिन्हें पाइरोटेक्निक फ्लेयर्स कहा जाता है) लगाई गई हैं। इन पॉकेट्स में क्लाउड सीडिंग के लिए आवश्यक केमिकल्स (जैसे सिल्वर आयोडाइड) रखे गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n ब्लास्ट प्रक्रिया: एयरक्राफ्ट में मौजूद बटन दबाकर इन पॉकेट्स में रखे केमिकल्स को बादलों के नीचे ब्लास्ट किया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n बारिश का कारण: इस तकनीक में फ्लेयर्स निकलती हैं जो नीचे से ऊपर की ओर बादलों के साथ रिएक्ट करती हैं और संघनन (Condensation) को बढ़ाकर कृत्रिम रूप से बारिश कराती हैं।\r\n \r\n
- \r\n असर: इस कृत्रिम बारिश का असर लगभग 100 किलोमीटर तक महसूस होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे Delhi NCR Pollution से काफी हद तक राहत मिल सकती है।\r\n \r\n
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राहत की उम्मीद
\r\n\r\nCloud Seeding का यह प्रयोग अगर सफल होता है, तो यह प्रदूषण से निपटने के लिए एक बड़ी सफलता होगी। स्थानीय प्रशासन और NCR की जनता को उम्मीद है कि यह कृत्रिम बारिश हवा की गुणवत्ता में तेजी से सुधार लाएगी और लोगों को जहरीली हवा से मुक्ति मिलेगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.