उत्तराखंड के धराली में 5 अगस्त को बादल फटने से हुई भारी तबाही अब राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के रडार पर आ गई है। मेरठ के प्रियंक भारती द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए, NGT की प्रिंसिपल बेंच ने इस मामले में केंद्र सरकार के साथ-साथ उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। याचिका में गंगोत्री से गढ़मुक्तेश्वर तक नदी के फ्लड प्लेन (बाढ़ मैदान) में हुए बड़े पैमाने पर अतिक्रमण को इस तबाही का मुख्य कारण बताया गया है।READ ALSO:-मेरठ में आवास विकास की धमाकेदार स्कीम: माधवपुरम के 30 प्लाट आवंटित, अब 31 और संपत्तियों की ई-नीलामी का मौका!
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क्या है पूरा मामला?
\r\n\r\n5 अगस्त को धराली में भागीरथी और खीरगाड़ के संगम पर बादल फटने से भीषण आपदा आई थी। इस आपदा का असर केवल उत्तराखंड तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव उत्तर प्रदेश के बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़ जैसे कई जनपदों में भी महसूस किया गया।
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- \r\n याचिकाकर्ता की दलील: शोभित यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर और नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट मेरठ के अध्यक्ष प्रियंक भारती ने अपनी याचिका में दलील दी है कि, "भले ही बादल फटना एक प्राकृतिक आपदा हो, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर हुई तबाही का मूल कारण नदी के फ्लड प्लेन क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण और भारी अतिक्रमण हैं।"\r\n \r\n
- \r\n उपग्रह चित्र प्रस्तुत: सुनवाई के दौरान, प्रियंक भारती ने उपग्रह चित्र भी पेश किए, जिनमें यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि करीब 148 भवन सीधे फ्लड प्लेन में बने हुए हैं, जो पर्यावरणीय नियमों का गंभीर उल्लंघन है।\r\n \r\n
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NGT का गंभीर रुख और नोटिस
\r\n\r\nNGT ने इस मामले को पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन से जुड़ा एक "गंभीर मुद्दा" माना है।
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- \r\n नोटिस जारी: अदालत ने संबंधित पक्षों (केंद्र सरकार, उत्तराखंड सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार) को नोटिस जारी किया है।\r\n \r\n
- \r\n शपथपत्र के साथ जवाब: NGT ने निर्देश दिया है कि ये सभी पक्ष अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले शपथपत्र (Affidavit) के साथ अपना जवाब दाखिल करें।\r\n \r\n
- \r\n अगली सुनवाई: इस मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को निर्धारित की गई है।\r\n \r\n
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दो मामलों की संयुक्त सुनवाई
\r\n\r\nप्रियंक भारती ने यह भी बताया कि NGT ने स्पष्ट किया है कि इसी तरह का एक और मुद्दा गंगोत्री धाम क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर दायर याचिका में भी विचाराधीन है। अब इन दोनों मामलों की संयुक्त सुनवाई 27 नवंबर को होगी। यह दर्शाता है कि NGT नदी के किनारों और संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्रों में अवैध निर्माण को लेकर बेहद सख्त है और ऐसे मामलों में कड़ा रुख अपना रही है ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सके।
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Sabse pehle comment karne wale banein.