उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) में पढ़ाई करने वाले और नए सत्र में दाखिला लेने के इच्छुक छात्रों के लिए एक बेहद अहम खबर है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने CCSU NEP 2020 Rules (राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों के पूरे ढांचे में व्यापक बदलाव कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत छात्रों की पढ़ाई, क्रेडिट व्यवस्था और परीक्षा मूल्यांकन के तरीके को पूरी तरह से आधुनिक मानकों के अनुरूप ढाला गया है। अब छात्रों की मार्कशीट पर केवल अंक (Marks) नहीं दिखेंगे, बल्कि उनका पूरा मूल्यांकन ग्रेडिंग सिस्टम पर आधारित होगा।

ग्रेड, SGPA और CGPA से तैयार होगा परिणाम नए प्रावधानों के लागू होने के बाद, परीक्षा परिणामों का स्वरूप पूरी तरह से बदल जाएगा। अब विद्यार्थियों की सफलता का पैमाना महज नंबर नहीं होंगे, बल्कि उनके प्रदर्शन को ग्रेड (Grade), ग्रेड प्वाइंट (Grade Point), सेमेस्टर ग्रेड प्वाइंट एवरेज (SGPA) और क्यूम्युलेटिव ग्रेड प्वाइंट एवरेज (CGPA) के आधार पर आंका जाएगा। एसजीपीए (SGPA) के माध्यम से छात्र के एक विशेष सेमेस्टर के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा, जबकि सीजीपीए (CGPA) से पाठ्यक्रम के सभी सेमेस्टरों के समग्र (Overall) प्रदर्शन का सटीक मूल्यांकन होगा।

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शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी नई व्यवस्था विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल (विद्वत परिषद) की बैठक में नए एनईपी आर्डिनेंस (अध्यादेश) को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी गई है। इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद पाठ्यक्रमों की क्रेडिट संरचना में बदलाव का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह नई व्यवस्था आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में प्रवेश लेने वाले नए विद्यार्थियों पर ही लागू की जाएगी। जो विद्यार्थी पहले से यूजी या पीजी पाठ्यक्रमों में पढ़ाई कर रहे हैं, उन पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और उनकी डिग्री पुरानी व्यवस्था के तहत ही पूरी कराई जाएगी।

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पीजी (स्नातकोत्तर) पाठ्यक्रमों में बड़ा बदलाव: रिसर्च पर जोर स्नातकोत्तर (PG) स्तर पर विद्यार्थियों को उनके मुख्य विषय में विशेषज्ञता हासिल कराने के लिए मेजर विषयों पर फोकस काफी बढ़ा दिया गया है:

  • नया क्रेडिट सिस्टम: पीजी के पहले, दूसरे और तीसरे सेमेस्टर में अब 20-20 क्रेडिट के मेजर विषय ही पढ़ाए जाएंगे।

  • शोध (रिसर्च) अनिवार्य: चौथे और अंतिम सेमेस्टर में 20 क्रेडिट के मेजर विषयों की पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों को 4 क्रेडिट का एक रिसर्च प्रोजेक्ट (शोध परियोजना) पूरा करना अनिवार्य होगा।

  • पुरानी व्यवस्था से कैसे अलग है: मौजूदा व्यवस्था में पीजी के प्रथम वर्ष के एक सेमेस्टर में माइनर विषय पढ़ने का प्रावधान था। इसके अलावा प्रथम और द्वितीय वर्ष में आठ-आठ क्रेडिट के प्रोजेक्ट की व्यवस्था लागू थी। नए बदलाव से छात्रों को अपने मुख्य विषय में गहराई से अध्ययन करने और उच्च स्तरीय शोध करने का सीधा अवसर प्राप्त होगा।

यूजी (स्नातक) के 6 सेमेस्टरों का क्रेडिट ढांचा स्नातक (UG) स्तर पर तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को कुल 120 क्रेडिट अर्जित करने होंगे। विश्वविद्यालय ने सभी छह सेमेस्टरों के लिए क्रेडिट का स्पष्ट निर्धारण कर दिया है:

  • प्रथम सेमेस्टर: 23 क्रेडिट

  • दूसरा सेमेस्टर: 17 क्रेडिट

  • तीसरा सेमेस्टर: 23 क्रेडिट

  • चौथा सेमेस्टर: 17 क्रेडिट

  • पांचवां और छठा सेमेस्टर: 20-20 क्रेडिट

यूजी की इस नई पाठ्यक्रम संरचना में मेजर और माइनर विषयों के साथ-साथ स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) और को-करिकुलर (सह-पाठ्यक्रमों) को भी अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है। इसके अलावा, चौथे सेमेस्टर में चयनित दो मेजर विषयों में से किसी एक विषय से संबंधित 3 क्रेडिट की शोध परियोजना (रिसर्च प्रोजेक्ट) भी शामिल की गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्नातक स्तर से ही विद्यार्थियों की मानसिकता को शोध आधारित अध्ययन (Research-based learning) से जोड़ना है।

प्रमोशन, बैक पेपर और डिग्री पूरी करने के नियम विश्वविद्यालय ने छात्रों के प्रमोशन के नियमों को लचीला बनाया है। अब विद्यार्थियों को उनके वर्तमान सेमेस्टर के परिणाम (पास या फेल) की परवाह किए बिना सीधे अगले सेमेस्टर में प्रमोट कर दिया जाएगा। हालांकि, अंतिम डिग्री प्राप्त करने के लिए छात्र को सभी निर्धारित विषयों में उत्तीर्ण होना अनिवार्य रहेगा। अगर किसी विषय में छात्र फेल हो जाता है, तो उसे बैक पेपर, प्रायोगिक परीक्षा (प्रैक्टिकल) और अंक सुधार (इंप्रूवमेंट) के अवसर विश्वविद्यालय के निर्धारित पुराने नियमों के अनुसार ही प्रदान किए जाएंगे। स्नातक की तीन वर्षीय डिग्री को पूरा करने के लिए छात्रों को अधिकतम छह वर्ष का समय दिया जाएगा।

पास होने के लिए हर विषय में 33 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य परीक्षा एवं मूल्यांकन के नए कड़े नियमों के अनुसार, किसी भी विषय में पास होने के लिए थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों को मिलाकर न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया गया है।

  • मेजर और माइनर विषयों के लिए बाह्य (External) परीक्षा 75 अंकों की और आंतरिक (Internal) मूल्यांकन 25 अंकों का होगा।

  • छात्र को 75 अंकों वाली बाह्य परीक्षा में पास होने के लिए कम से कम 25 अंक हासिल करने होंगे।

  • आंतरिक और बाह्य मूल्यांकन के नंबरों को मिलाकर कुल योग 33 अंक होना चाहिए। यदि कोई विद्यार्थी यह निर्धारित न्यूनतम अंक प्राप्त नहीं कर पाता है, तो उसे उस संबंधित विषय में अनुत्तीर्ण (फेल) घोषित कर दिया जाएगा।

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