मेरठ: यह कहानी किसी आम खबर की तरह शुरू नहीं होती। यह शुरू होती है मेरठ की एक ऐसी रात से, जहाँ एक ओर धर्म, आस्था और कला का मंचन हो रहा था, और दूसरी ओर उसी मंच की परछाई में एक स्याह हकीकत दम तोड़ रही थी। सदर बाजार का भैसाली मैदान, जहाँ रावण के पुतले को जलाने की तैयारी थी, उसी मैदान के बाहर एक गुमनाम बचपन हमेशा के लिए खामोश हो गया। एक 12 साल के बच्चे की लाश मिली, और अपने पीछे छोड़ गई कुछ ऐसे सवाल, जिनका जवाब शायद इस शहर के पास भी नहीं है।READ ALSO:-विदाई से पहले मानसून का 'तांडव'! गुजरात में हाईवे डूबा, महाराष्ट्र में 104 मौतें, दशहरे पर UP-दिल्ली में भी बरसेंगे बादल?
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
एक सर्द जमीन, एक खामोश शरीर... और हजारों सवाल
\r\n\r\n
यह सिर्फ एक लाश नहीं थी। यह पार्किंग की ठंडी, कंक्रीट की जमीन पर पड़े हमारे समाज के वादों का शव था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लोगों ने जब उसे बेसुध देखा तो उन्हें लगा कि कोई बच्चा थककर सो गया है। लेकिन उसकी नींद इतनी गहरी थी कि फिर कभी नहीं टूटी। जब पुलिस का सायरन रामलीला के शोर को चीरता हुआ वहां पहुंचा, तब जाकर पता चला कि यह नींद नहीं, मौत का सन्नाटा है। उस बच्चे के चारों तरफ भीड़ थी, लेकिन उसकी पहचान बताने वाला कोई नहीं था।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
न कोई जख्म, न कोई निशान... जहर नसों में था या सिस्टम में?
\r\n\r\n
पुलिस की पहली जांच ने इस मौत को और भी रहस्यमयी बना दिया। बच्चे के नाजुक शरीर पर एक खरोंच तक नहीं थी। कोई संघर्ष नहीं, कोई चोट नहीं। मौत का हर बाहरी संकेत गायब था। पुलिस का पहला और सबसे तार्किक शक नशे की ओवरडोज पर गया। लेकिन यहीं से सबसे बड़ा सवाल उठता है - 12 साल के एक बच्चे की नसों में वह जहर पहुंचा कैसे? वह कौन लोग थे जो इस मासूम को नशे की पुड़िया बेच रहे थे? वह कौन सा सिस्टम था जो इस बच्चे को सड़क पर लावारिस भटकने से नहीं रोक पाया? शरीर पर जख्म नहीं थे, लेकिन उसकी मौत समाज के चेहरे पर एक गहरा घाव छोड़ गई।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
कैमरे की आंखों से ओझल, भीड़ की यादों में एक धुंधला चेहरा
\r\n\r\n
आसपास के कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने इस बच्चे को अक्सर देखा था - कभी मेले में घूमते, कभी किसी दुकान के बाहर खड़े, कभी अपनी ही दुनिया में गुम। वह शहर की भीड़ का हिस्सा था, लेकिन फिर भी अकेला था। वह सबके सामने था, लेकिन फिर भी अदृश्य था। वह एक ऐसा चेहरा था जिसे सब देखते थे, पर याद कोई नहीं रखता था। उसकी मौत से पहले की तस्वीरें किसी सीसीटीवी कैमरे में नहीं, बल्कि लोगों की धुंधली यादों में कैद हैं, जो बताती हैं कि वह जिंदा था, वह यहीं था, हमारे और आपके बीच।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
पोस्टमार्टम की रिपोर्ट... पर क्या जवाब मिलेगा?
\r\n\r\n
कानूनी प्रक्रिया जारी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट बताएगी कि मौत किस ड्रग से हुई, कितनी मात्रा में हुई। पुलिस उसकी पहचान के लिए हाथ-पैर मार रही है। शायद कुछ दिनों में उसका नाम भी पता चल जाए। लेकिन क्या कोई रिपोर्ट यह बता पाएगी कि उसकी मौत का असली जिम्मेदार कौन है? वह हाथ, जिसने उसे नशे की पुड़िया दी? या वह हजारों आंखें, जिन्होंने उसे रोज देखा पर कभी बचाने की कोशिश नहीं की? या वह पूरा सिस्टम, जिसके लिए वह सिर्फ एक आंकड़ा बनकर रह जाएगा? इस रामलीला में एक किरदार की मौत मंच के नीचे, असलियत में हो चुकी है, और दर्शक पूरा शहर है।
विज्ञापन
विज्ञापन