देश से मानसून की विदाई की बेला अब प्रलय का पर्याय बन गई है। जाते-जाते मानसून ऐसा रौद्र रूप दिखा रहा है कि गुजरात से लेकर महाराष्ट्र तक हाहाकार मचा है। गुजरात में सड़कें दरिया बन गई हैं और महाराष्ट्र में मौत का आंकड़ा शतक पार कर चुका है। इस आसमानी आफत का असर अब उत्तर भारत पर भी दिखने लगा है, जहाँ दशहरे से पहले मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है।READ ALSO:-Meerut: बीमा के ₹50 करोड़ के लिए बेटे ने मां-पिता-पत्नी की बेरहमी से की हत्या, 39 करोड़ के क्लेम ने खोली तीन मौतों की साजिश की परतें
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गुजरात: सड़कें बनीं समंदर, गरबा पंडाल जमींदोज
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गुजरात में मंगलवार की सुबह प्रलय लेकर आई। तेज हवाओं के साथ हुई मूसलाधार बारिश ने वलसाड और नवसारी में भारी तबाही मचाई। सबसे चौंकाने वाली तस्वीरें द्वारका से आईं, जहाँ कल्याणपुर को पोरबंदर से जोड़ने वाला पूरा का पूरा स्टेट हाईवे बाढ़ के पानी में समा गया। पानी के प्रचंड वेग में एक कार के बह जाने से इलाके में दहशत फैल गई। नवरात्रि के उत्साह पर भी बारिश ने पानी फेर दिया; वडोदरा में गरबा के लिए तैयार किए गए भव्य पंडाल ताश के पत्तों की तरह ढह गए। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सौराष्ट्र और कच्छ के लिए अगले 3 दिनों का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
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महाराष्ट्र: मराठवाड़ा में मातम, 3000 गांव जलमग्न
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महाराष्ट्र का मराठवाड़ा क्षेत्र इस वक्त सदी की सबसे भीषण बाढ़ त्रासदियों में से एक का सामना कर रहा है। यहां के 8 जिलों के 3,050 से अधिक गांव पूरी तरह बाढ़ की चपेट में हैं। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, इस मानसूनी सीजन में अब तक 104 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिसमें सबसे ज्यादा 28 मौतें नांदेड़ जिले में हुई हैं। बाढ़ ने सिर्फ जानें ही नहीं लीं, बल्कि प्रदेश की रीढ़ तोड़ दी है। लगभग 2,701 किलोमीटर सड़कें बह गई हैं और 1,504 पुल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। 1,000 से ज्यादा स्कूल और सैकड़ों सरकारी इमारतें खंडहर में तब्दील हो गई हैं। छात्रों के भविष्य पर पड़ते असर को देखते हुए महाराष्ट्र बोर्ड को 12वीं के परीक्षा फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 20 अक्टूबर तक बढ़ानी पड़ी है।
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UP में बादलों की वापसी, दिल्ली में राहत की फुहारें
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उत्तर प्रदेश, जो पिछले 8 दिनों से उमस भरी गर्मी झेल रहा था, वहां मानसून ने जोरदार वापसी की है। मंगलवार सुबह कानपुर, गोंडा, नोएडा और हाथरस समेत 10 शहरों में झमाझम बारिश ने मौसम सुहाना कर दिया, लेकिन लोगों के लिए आफत भी लेकर आई। हाथरस में सड़कें लबालब भर गईं, जिससे दफ्तर और स्कूल जाने वालों को भारी परेशानी हुई। सबसे दुखद खबर मथुरा से आई, जहाँ खेत में काम कर रही 52 वर्षीय मीरा देवी की आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत हो गई। मौसम विभाग ने राज्य के 17 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है, जिससे दशहरे के आयोजनों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
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वहीं, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी मौसम ने करवट ली है। आसमान में बादल छाए हुए हैं और हल्की बारिश की संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।
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जाते-जाते क्यों उग्र हुआ मानसून? 15 अक्टूबर की डेडलाइन पर सस्पेंस
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मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून की इस विनाशलीला के पीछे दो बड़े कारण हैं। एक तरफ गुजरात और अरब सागर के ऊपर एक गहरा निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, तो वहीं बंगाल की खाड़ी में भी एक और सिस्टम सक्रिय हो रहा है। इन दोहरी प्रणालियों के कारण नमी से भरी हवाएं लगातार जमीन की ओर आ रही हैं, जो भारी बारिश करा रही हैं।
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हालांकि, मानसून राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली से विदा हो चुका है, लेकिन इन नए सिस्टमों के कारण इसकी पूरी तरह विदाई 15 अक्टूबर तक खिंच सकती है। अनुमान है कि अगले सात दिनों तक मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और पूर्वी राजस्थान में बारिश का दौर जारी रहेगा।
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