गर आप सोशल मीडिया पर रील्स बनाने, वीडियो शेयर करने या बेधड़क कुछ भी पोस्ट करने के शौकीन हैं, तो सावधान हो जाइए। केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया के बढ़ते दुरुपयोग और उस पर परोसे जा रहे अश्लील कंटेंट (Obscene Content) को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना ली है। सरकार ने मंगलवार को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को एक कड़ा 'अल्टीमेटम' जारी किया है।READ ALSO:-सिगरेट पीने वालों को तगड़ा झटका: 18 रुपये की सिगरेट अब मिलेगी 72 रुपये में! संसद से पास हुआ विधेयक, तंबाकू पर 300% तक बढ़ा टैक्स
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मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी (Meity) की तरफ से जारी एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म से अश्लील, भद्दे और गैर-कानूनी कंटेंट को तुरंत हटाएं। सबसे बड़ी चेतावनी यह है कि अगर नियमों का पालन नहीं हुआ, तो अब सिर्फ नोटिस नहीं भेजा जाएगा, बल्कि कंपनियों और यूजर्स दोनों पर आपराधिक मुकदमा (Criminal Case) चलाया जाएगा।
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1. सरकार का 'रेड सिग्नल': क्या है नई एडवाइजरी में?
\r\n\r\nपीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह एडवाइजरी सोमवार को जारी की गई थी, लेकिन मंगलवार को इसे सार्वजनिक पटल पर रखा गया। आईटी मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया कंपनियां 'IT एक्ट' और उसके नियमों (IT Rules, 2021) का पालन करने में ढिलाई बरत रही हैं।
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एडवाइजरी के मुख्य बिंदु:
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- \r\n तुरंत कार्रवाई: कंपनियों को अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मॉडरेशन टीम को सक्रिय करना होगा ताकि अश्लील कंटेंट अपलोड होते ही हट जाए।\r\n \r\n
- \r\n लीगल इम्युनिटी (Legal Immunity) खत्म: अगर कंपनियां ऐसे कंटेंट को रोकने में फेल होती हैं, तो IT एक्ट की धारा 79 के तहत उन्हें मिलने वाली कानूनी सुरक्षा (Safe Harbor Protection) छीन ली जाएगी। इसका मतलब है कि यूजर द्वारा डाली गई किसी भी पोस्ट के लिए कंपनी का मालिक और अधिकारी सीधे जिम्मेदार होंगे।\r\n \r\n
- \r\n यूजर की जिम्मेदारी: यह चेतावनी सिर्फ मार्क जुकरबर्ग या एलन मस्क के लिए नहीं है। अगर कोई भारतीय यूजर ऐसा कंटेंट पोस्ट या शेयर करता है, तो उस पर भारतीय दंड संहिता (BNS) और IT एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज होगा।\r\n \r\n
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2. किस तरह के कंटेंट पर लगी है रोक?
\r\n\r\nसरकार ने अपनी लिस्ट में उन सभी तरह के कंटेंट को शामिल किया है, जो भारतीय संस्कृति, कानून और बच्चों की सुरक्षा के खिलाफ हैं। अगर आप नीचे दी गई कैटेगरी में से कुछ भी पोस्ट करते हैं, तो आप मुसीबत में पड़ सकते हैं:
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- \r\n अश्लील या भद्दा कंटेंट (Obscene Material): कोई भी ऐसा वीडियो या फोटो जो सार्वजनिक शालीनता को भंग करता हो।\r\n \r\n
- \r\n पोर्नोग्राफिक सामग्री: स्पष्ट यौन कृत्यों को दर्शाने वाला कंटेंट।\r\n \r\n
- \r\n CSAM (Child Sexual Abuse Material): बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कोई भी कंटेंट। इसे शेयर करना, स्टोर करना या देखना एक गैर-जमानती अपराध है।\r\n \r\n
- \r\n हानिकारक कंटेंट: ऐसा कंटेंट जो बच्चों के मानसिक विकास के लिए खतरनाक हो।\r\n \r\n
- \r\n गैर-कानूनी गतिविधियां: डीपफेक (Deepfakes) या किसी की निजता का हनन करने वाले वीडियो।\r\n \r\n
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3. 'सेफ हार्बर' हटने का क्या मतलब है?
\r\n\r\nसोशल मीडिया कंपनियों के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा डर है। वर्तमान में, IT एक्ट की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को 'बिचौलिया' (Intermediary) माना जाता है। यानी, अगर कोई यूजर कुछ गलत पोस्ट करता है, तो प्लेटफॉर्म पर केस नहीं होता था।
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लेकिन नई एडवाइजरी में सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर उन्होंने अश्लीलता नहीं रोकी, तो यह सुरक्षा कवच हटा लिया जाएगा। इसके बाद पुलिस सीधे प्लेटफॉर्म के अधिकारियों को गिरफ्तार कर सकेगी।
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4. मद्रास हाईकोर्ट की सलाह: 'बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखो'
\r\n\r\nसरकार की यह सख्ती ऐसे समय में आई है जब न्यायपालिका भी सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों को लेकर चिंतित है। 26 दिसंबर को मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बेहद महत्वपूर्ण सुझाव दिया।
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क्या कहा हाईकोर्ट ने? कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि भारत में भी ऑस्ट्रेलिया मॉडल लागू करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
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- \r\n गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में एक ऐतिहासिक कानून पास किया है, जिसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित (Ban) कर दिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, "नाबालिगों को ऑनलाइन पोर्नोग्राफिक कंटेंट बहुत आसानी से मिल रहा है। यह एक गंभीर चिंता का विषय है। केंद्र को सोचना चाहिए कि क्या 16 साल से कम उम्र वालों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाई जा सकती है?"\r\n \r\n
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याचिकाकर्ता एस. विजयकुमार के वकील केपीएस पलानीवेल राजन ने कोर्ट में तर्क दिया कि बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन बारूद की तरह साबित हो रहे हैं, जहां वे बिना किसी रोक-टोक के एडल्ट कंटेंट तक पहुंच रहे हैं।
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5. क्यों पड़ी इस सख्ती की जरूरत?
\r\n\r\nपिछले कुछ महीनों में सोशल मीडिया पर 'सॉफ्ट पोर्न' और अभद्र भाषा की बाढ़ आ गई है।
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- \r\n रील्स और शॉर्ट्स: इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब शॉर्ट्स पर व्यूज पाने के लिए लोग अश्लीलता की सारी हदें पार कर रहे हैं। डबल मीनिंग जोक्स और एक्सपोजिंग वीडियोज की भरमार है।\r\n \r\n
- \r\n डीपफेक का खतरा: रश्मिका मंदाना और अन्य अभिनेत्रियों के डीपफेक वीडियो वायरल होने के बाद सरकार ने माना कि प्लेटफॉर्म्स की सुस्ती ही असली समस्या है।\r\n \r\n
- \r\n बच्चों की सुरक्षा: एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि साइबर क्राइम और बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।\r\n \r\n
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6. अब यूजर्स को क्या करना चाहिए? (सावधानी के उपाय)
\r\n\r\nसरकार की यह चेतावनी सिर्फ कागजी नहीं है, इसे लागू करने के लिए साइबर सेल अब ज्यादा सक्रिय होगी। एक जागरूक नागरिक के तौर पर आपको इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
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- \r\n पुराना कंटेंट डिलीट करें: अगर आपकी टाइमलाइन पर कोई ऐसा पुराना पोस्ट, वीडियो या फोटो है जो अश्लील या विवादित हो सकता है, तो उसे तुरंत हटा दें।\r\n \r\n
- \r\n शेयर करने से बचें: व्हाट्सएप ग्रुप या मैसेंजर पर आने वाले गंदे वीडियो को फॉरवर्ड न करें। ग्रुप एडमिन की जिम्मेदारी अब और बढ़ गई है।\r\n \r\n
- \r\n रिपोर्ट करें: अगर आपको कोई ऐसा कंटेंट दिखता है, तो तुरंत प्लेटफॉर्म के 'Report' ऑप्शन का इस्तेमाल करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।\r\n \r\n
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इंटरनेट अब 'फ्री फॉर ऑल' नहीं रहा। सरकार का यह कदम डिजिटल दुनिया को सुरक्षित बनाने की दिशा में है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सोशल मीडिया दिग्गज (Tech Giants) इसे कितनी गंभीरता से लेते हैं। फिलहाल, संदेश साफ है- सफाई रखिए, वरना कार्रवाई के लिए तैयार रहिए।
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(नोट: यह रिपोर्ट सरकारी एडवाइजरी और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय सदैव IT कानूनों का पालन करें।)
Sabse pehle comment karne wale banein.