इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यौन अपराधों से संबंधित एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि शादी का झूठा वादा करके किसी महिला के साथ यौन संबंध बनाना दुष्कर्म (Rape) के अपराध की श्रेणी में आता है। न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने मामले में दायर चार्जशीट को बरकरार रखते हुए, आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया है। यह फैसला उन पुरुषों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो यौन संबंध बनाने के एकमात्र उद्देश्य से विवाह का झूठा आश्वासन देते हैं।READ ALSO:-ऑनलाइन गेमिंग कानून पर SC सख्त, केंद्र से मांगा 'विस्तृत जवाब', बोले- 'धंधा 1 महीने से बंद है', अगली सुनवाई 26 नवंबर को
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गोरखपुर का मामला और पीड़िता के गंभीर आरोप
\r\n\r\nयह मामला उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के सहजनवां थाना क्षेत्र का है।
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- \r\n FIR और आरोपी: पीड़िता ने 17 जनवरी 2024 को आरोपी रवि पाल, उसके भाई अंकित पाल, पिता महेंद्र पाल और मां मुन्नी देवी के खिलाफ बलात्कार और आपराधिक साजिश की प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी।\r\n \r\n
- \r\n आरोप: पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी रवि पाल ने उससे शादी का झूठा वादा किया था। इसी झूठे वादे के आधार पर उसने 21 नवंबर 2023 को अपने घर पर, 23 नवंबर को एक होटल में, और फिर दिसंबर में दिल्ली ले जाकर बार-बार रेप किया।\r\n \r\n
- \r\n धोखाधड़ी: 3 जनवरी 2024 को आरोपी ने पीड़िता को दिल्ली में अकेला छोड़ दिया, जिसके बाद पीड़िता को एहसास हुआ कि शादी का उसका वादा झूठा था।\r\n \r\n
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हाईकोर्ट में आरोपी की दलीलें और याचिका खारिज
\r\n\r\nआरोपी रवि पाल ने इस मामले में धारा 482 सीआरपीसी के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चार्जशीट और मुकदमे की पूरी कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।
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- \r\n आरोपी के वकील की दलील: आरोपी के वकील ने दलील दी कि यौन संबंध सहमति (Consensual) से बनाए गए थे, और उनके पक्ष में कोई चिकित्सकीय पुष्टि (Medical Confirmation) नहीं है। उन्होंने एफआईआर में देरी होने और आरोपी को फंसाने के लिए झूठा मामला रचने का आरोप लगाया।\r\n \r\n
- \r\n पीड़िता के वकील की दलील: पीड़िता के वकील प्रिंस कुमार श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि आरोपी ने जानबूझकर शादी का झूठा वादा किया था। झूठे वादे पर मिली सहमति को कानूनी रूप से वैध सहमति (Valid Consent) नहीं कहा जा सकता है, इसलिए आरोपी पर दुष्कर्म का मुकदमा चलना चाहिए।\r\n \r\n
कोर्ट का निर्णायक अवलोकन
\r\n\r\nAllahabad High Court ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कानून की स्थिति को स्पष्ट किया।
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- \r\n कोर्ट का अवलोकन: न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने कहा कि एफआईआर और पीड़िता के बयानों से साफ जाहिर है कि आरोपी ने शादी का झूठा वादा करके ही पीड़िता की सहमति हासिल की थी।\r\n \r\n
- \r\n कानूनी परिभाषा: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि "अगर विवाह का वादा शुरू से ही झूठा था और उसका एकमात्र उद्देश्य पीड़िता की सहमति हासिल करना था, तो ऐसा यौन संबंध भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत बलात्कार की श्रेणी में आता है।"\r\n \r\n
- \r\n फैसला: कोर्ट ने माना कि यह मामला सहमति से बने यौन संबंधों वाला नहीं है, बल्कि झूठे वादे के आधार पर सहमति ली गई थी। इस आधार पर कोर्ट ने आरोपी रवि पाल की याचिका खारिज कर दी।\r\n \r\n
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महिलाओं की सुरक्षा को बल
\r\n\r\nAllahabad High Court का यह फैसला उन महिलाओं को कानूनी बल प्रदान करता है, जो शादी का झूठा वादा करने वाले पुरुषों के बहकावे में आकर शारीरिक संबंध बनाती हैं। यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल (Precedent) कायम करेगा और समाज में ऐसे धोखेबाजों को रोकने में मदद करेगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.