सोने की कीमतों में गिरावट को लेकर निवेशकों के लिए एक अहम अनुमान सामने आया है। बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) के विश्लेषण के मुताबिक, सोने की कीमतों पर दबाव आगे भी बना रह सकता है। बैंक ने सोने के लिए कई महत्वपूर्ण स्तर बताए हैं। इनमें $3,700 प्रति औंस और $3,250 प्रति औंस का स्तर शामिल है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना इन स्तरों तक गिरता है, तो भारतीय रुपये में इसकी कीमत भी काफी नीचे आ सकती है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ₹98 हजार प्रति 10 ग्राम सोने का मौजूदा भाव नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के $3,250 प्रति औंस तक गिरने की स्थिति में निकाला गया अनुमानित मूल्य है। भारत में वास्तविक कीमत डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, आयात शुल्क, जीएसटी और स्थानीय बाजार के प्रीमियम पर निर्भर करेगी।

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$3,700 तक गिर सकता है सोना

बैंक ऑफ अमेरिका के अनुमान के अनुसार, सोने की कीमत मौजूदा कमजोरी के बीच करीब $3,700 प्रति औंस तक फिसल सकती है। भारतीय मुद्रा में यह स्तर लगभग ₹1.12 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बैठता है। यह गणना अनुमानित विनिमय दर के आधार पर है, न कि भारतीय बाजार में सोने की आधिकारिक कीमत।

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बैंक का मानना है कि लंबे समय तक तेजी रहने के बाद सोने में चल रहा करेक्शन अभी समाप्त नहीं हुआ है। मजबूत अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और महंगाई की आशंका जैसे कारक सोने की कीमतों पर दबाव डाल सकते हैं।

₹98 हजार वाला स्तर क्यों है अहम?

बैंक ऑफ अमेरिका के विश्लेषण में $3,250 प्रति औंस को सोने के लिए महत्वपूर्ण निचले स्तरों में शामिल किया गया है। भारतीय रुपये में इसकी अनुमानित कीमत करीब ₹98 हजार प्रति 10 ग्राम बैठ सकती है। इसी वजह से सोने की कीमत एक लाख रुपये के नीचे पहुंचने की संभावना चर्चा में है।

लेकिन यह गिरावट का एक संभावित परिदृश्य है, कोई पक्का लक्ष्य या गारंटी नहीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना इस स्तर तक पहुंचेगा या नहीं, यह आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

सोने की कीमतों पर दबाव क्यों?

सोने की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदों का असर पड़ता है। जब अमेरिकी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो कुछ निवेशकों के लिए ब्याज नहीं देने वाला सोना कम आकर्षक हो सकता है। इसके अलावा, मध्य-पूर्व में तनाव से ऊर्जा की कीमतों और महंगाई को लेकर बनी चिंता भी बाजार की दिशा प्रभावित कर सकती है।

बैंक ऑफ अमेरिका के मुताबिक, सोने में तेजी दोबारा मजबूत होने के लिए अमेरिकी मौद्रिक नीति में नरमी, डॉलर की मजबूती में कमी और महंगाई को लेकर अनिश्चितता कम होना अहम होगा। दूसरी ओर, निवेशकों की खरीदारी बढ़ने से सोने को समर्थन भी मिल सकता है।

क्या भारत में सोना सच में ₹1 लाख से नीचे आएगा?

फिलहाल इसका निश्चित जवाब नहीं दिया जा सकता। अंतरराष्ट्रीय बाजार में $3,250 प्रति औंस का स्तर आने पर भारतीय कीमत करीब ₹98 हजार प्रति 10 ग्राम बैठने का अनुमान है, लेकिन घरेलू बाजार का वास्तविक भाव इससे अलग हो सकता है।

सोना खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों को केवल अनुमान के आधार पर फैसला लेने के बजाय अपने शहर के ताजा भाव, खरीदारी के शुल्क और निवेश की जरूरतों पर भी ध्यान देना चाहिए। बैंक का अनुमान बाजार की संभावित दिशा बताता है, भविष्य की कीमत की गारंटी नहीं देता।

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