भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India - ECI) ने मतदाता सूची और Voter Registration Form 6 को लेकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग ने साफ किया है कि यदि किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची (Draft Electoral Roll) से किसी कारणवश कट गया है या गायब है, तो उसे 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (Special Intensive Revision - SIR) के दौरान या उसके बाद अपना नाम फिर से जुड़वाने के लिए अनिवार्य रूप से आवेदन करना होगा। यह नियम उन पुराने मतदाताओं पर भी समान रूप से लागू होगा जिनका नाम पहले से मतदाता सूची में शामिल रह चुका है।
राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को लिखा पत्र देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस समय मतदाता सूची का 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) अभियान चल रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता अंतिम मतदाता सूची में शामिल होने से न छूटे।
जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶इसी अभियान के बीच चुनाव आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (Chief Electoral Officers) को पत्र लिखकर फॉर्म-6 (Form 6) जमा करने से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
फॉर्म-6 को लेकर क्या था मतदाताओं का डर? चुनाव आयोग ने अपने पत्र में बताया कि उसे जमीनी स्तर से ऐसी जानकारी मिल रही थी कि कई ऐसे पुराने मतदाता, जिनका नाम मौजूदा ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं है, वे फॉर्म-6 भरने में हिचकिचा रहे हैं।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›इस हिचकिचाहट का मुख्य कारण यह है कि फॉर्म-6 में एक घोषणा-पत्र (Declaration) शामिल होता है, जिसमें आवेदक को यह बताना होता है कि उसका नाम "पहली बार" मतदाता सूची में शामिल किया जा रहा है। पुराने मतदाताओं को यह डर सता रहा था कि पहले से नामांकित होने के बावजूद यदि वे यह फॉर्म भरते हैं, तो इसे 'गलत घोषणा' (False Declaration) माना जाएगा। उन्हें लग रहा था कि ऐसा करने से वे 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' (Representation of the People Act, 1950) की धारा 31 के तहत कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
आयोग ने किया साफ: नहीं होगी कोई कानूनी कार्रवाई इस भ्रम को पूरी तरह से दूर करते हुए चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि फॉर्म-6 में दी जाने वाली घोषणा 1 अगस्त 2022 से लागू है।
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आयोग ने कहा कि यदि किसी पुराने मतदाता का नाम वर्तमान ड्राफ्ट सूची में नहीं है, तो वह बेझिझक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए अपना नाम अंतिम सूची में शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 जमा कर सकता है। ऐसी स्थिति में फॉर्म 6 जमा करने का उद्देश्य केवल मतदाता सूची में नाम दोबारा शामिल कराना है।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल इस कारण से कि मतदाता पहले से ही नामांकित था, इस फॉर्म को 'गलत घोषणा' नहीं माना जाएगा।
ईआरओ को दिए गए सख्त निर्देश आयोग ने 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' की धारा 31 के तहत स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि कोई भी 'निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी' (Electoral Registration Officer - ERO) किसी भी मतदाता के खिलाफ केवल इस आधार पर कोई कार्रवाई नहीं करेगा कि वह पहले से नामांकित था और उसने फिर से फॉर्म 6 जमा किया है।
हालांकि, इसके लिए यह शर्त अनिवार्य है कि वह मतदाता देश के किसी अन्य संसदीय या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में पहले से पंजीकृत न हो और उसके द्वारा दी गई अन्य सभी जानकारियां कानून के अनुसार पूरी तरह से सही हों।
चुनाव आयोग ने सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे इस स्पष्टीकरण को स्थानीय भाषाओं में अनुवादित कराकर प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से जनता तक पहुंचाएं, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर न रहे।
Sabse pehle comment karne wale banein.