उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) जनपद में पुलिस ने एक 'ब्लाइंड मर्डर' (अंधे कत्ल) की गुत्थी को बेहद ही पेशेवर तरीके से सुलझा लिया है। Najibabad Murder Case में पुलिस ने खुलासा किया है कि 25 अक्टूबर को हाईवे किनारे मिला शव किसी सड़क हादसे का शिकार नहीं था, बल्कि यह पूरी तरह से एक सुनियोजित हत्या थी। पैसों के लालच में तीन शातिर आरोपियों ने एक नेपाली युवक को मौत के घाट उतार दिया था। खबरीलाल के बिजनौर रिपोर्टर शकील अहमद की सूचना के अनुसार, पुलिस ने हत्या और लूट की इस वारदात को अंजाम देने वाले तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके पास से लूटी गई रकम का एक बड़ा हिस्सा भी बरामद कर लिया है।

25 अक्टूबर की रात को मिला था घायल युवक पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 25 अक्टूबर 2026 को हुई थी। तड़के करीब साढ़े तीन बजे नजीबाबाद थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सरवनपुर के पास काशीपुर-हरिद्वार हाईवे पर एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़ा हुआ मिला था। गश्त कर रही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घायल को तत्काल जिला अस्पताल बिजनौर पहुंचाया। हालांकि, वहां मौजूद चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया था। शुरुआत में यह मामला एक साधारण सड़क दुर्घटना (Road Accident) का प्रतीत हो रहा था। बाद में पुलिस जांच में मृतक की आधिकारिक पहचान पड़ोसी देश नेपाल के निवासी अशंक बहादुर शाही के रूप में हुई।

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बेटे की तहरीर ने बदल दी जांच की दिशा इस मामले में नया और बड़ा मोड़ तब आया जब मृतक अशंक बहादुर शाही के बेटे अमित शाही ने नजीबाबाद पुलिस को एक लिखित तहरीर दी। अमित शाही ने पुलिस को बताया कि घटना के वक्त उनके पिता के पास करीब एक लाख 55 हजार रुपये की भारी-भरकम नगदी और कुछ अन्य कीमती सामान मौजूद था। लेकिन जब शव बरामद हुआ, तो पिता का वह बैग और सारे रुपये गायब मिले। इस अहम खुलासे के बाद पुलिस ने इसे महज हादसा मानने के बजाय लूट और हत्या के एंगल से अपनी गहन तफ्तीश शुरू कर दी।

शराब पार्टी के दौरान रची गई लूट और हत्या की खौफनाक साजिश पुलिस की सर्विलांस टीम और मुखबिर तंत्र की मदद से जांच आगे बढ़ी, जिसमें तीन संदिग्धों के नाम उभरकर सामने आए—शेर बहादुर, कमल सिंह और करण बहादुर शाही। पुलिस ने घेराबंदी करते हुए 3 नवंबर को इन तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की सख्त पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उन्होंने बताया कि उनकी मुलाकात मृतक अशंक बहादुर से कोटद्वार (उत्तराखंड) में हुई थी। वहां चारों ने एक साथ बैठकर शराब पी। इसी दौरान आरोपियों को इस बात की भनक लग गई कि अशंक के पास 1.55 लाख रुपये जैसी मोटी रकम मौजूद है। इसके बाद तीनों ने रुपयों को लूटने की साजिश रची। वे अशंक को अपने साथ ले गए और लूटपाट के बाद किसी अज्ञात तेज रफ्तार वाहन के सामने उसे जोरदार धक्का दे दिया, जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई।

बचने के लिए मनाली भागे, पुलिस ने की रिकवरी आरोपियों ने बताया कि जैसे ही उन्हें अशंक की मौत होने का पक्का अंदेशा हुआ, वे उसका रुपयों से भरा बैग लेकर तुरंत मौके से फरार हो गए। पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए तीनों सीधे हिमाचल प्रदेश के मनाली (Manali) जा छिपे। बिजनौर के पुलिस अधीक्षक (SP) कृष्ण कुमार विश्नोई ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपियों ने लूटी गई एक लाख 55 हजार रुपये की रकम में से 50 हजार रुपये आपस में बांटकर अपने-अपने घर भेज दिए थे। इसके अलावा 30 हजार रुपये उन्होंने मनाली में अपनी फरारी के दौरान खर्च कर दिए। पुलिस टीम ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों की सटीक निशानदेही पर शेष बची 75 हजार रुपये की नगदी सफलतापूर्वक बरामद कर ली है। फिलहाल, नजीबाबाद थाना पुलिस तीनों हत्यारोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में अग्रिम वैधानिक कार्रवाई कर रही है, जिसके बाद उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेजा जाएगा।

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