Fog Safe Device in Indian Railways: उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने दस्तक दे दी है, लेकिन इस बार भारतीय रेलवे ने मौसम की इस चुनौती से निपटने के लिए तकनीक का सहारा लिया है। उत्तर रेलवे और पूर्वोत्तर रेलवे की लगभग 1700 से अधिक ट्रेनें अब Fog Safe Device (FSD) से लैस हो चुकी हैं। इस आधुनिक तकनीक के कारण अब घने कोहरे में भी ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक नहीं लग रहा है। जहाँ पहले कोहरे के कारण विजिबिलिटी कम होने पर ट्रेनें 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती थीं, वहीं अब इस डिवाइस की मदद से लोको पायलट ट्रेनों को 75 किलोमीटर प्रति घंटे की सुरक्षित रफ्तार से दौड़ा रहे हैं।READ ALSO:-कार्तिक-अनन्या की 'तू मेरी मैं तेरा...' का जादू: ट्रेलर में दिखा रोमांस का नया अवतार, इवेंट में अनन्या ने कार्तिक को कहा 'झूठा'!
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डेटोनेटर (पटाखों) के युग का हुआ अंत एक समय था जब घने कोहरे में सिग्नल की जानकारी देने के लिए रेलवे कर्मचारियों को पटरियों पर डेटोनेटर (पटाखे) लगाने पड़ते थे। जब ट्रेन का पहिया इन पटाखों पर चढ़ता था, तो होने वाले धमाके से लोको पायलट को समझ आता था कि आगे सिग्नल या स्टेशन आने वाला है।
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अब Fog Safe Device ने इस जोखिम भरी और पुरानी प्रक्रिया को खत्म कर दिया है। इससे न केवल पटाखों से होने वाले प्रदूषण में कमी आई है, बल्कि रेल कर्मचारियों को भी कड़कड़ाती ठंड में पटरियों पर जाने से राहत मिली है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे ट्रेनों की लेटलतीफी पर काफी हद तक अंकुश लगा है।
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740 और 980 ट्रेनें हुई तकनीक से लैस उत्तर रेलवे के सीनियर डीसीएम कुलदीप तिवारी के अनुसार, लखनऊ मंडल में संचालित होने वाली सभी 740 ट्रेनों में यह डिवाइस लगाई गई है। वहीं, पूर्वोत्तर रेलवे (NER) के सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि उनके क्षेत्र की 980 ट्रेनों को एंटी फॉग डिवाइस से सुरक्षित किया गया है।
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मंडलवार वितरण: * लखनऊ मंडल (NER): 315 डिवाइस
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- \r\n इज्जतनगर मंडल: 250 डिवाइस\r\n \r\n
- \r\n वाराणसी मंडल: 415 डिवाइस\r\n \r\n
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इसके अतिरिक्त, रेलवे ने सिग्नल पोस्टों पर 'ल्यूमिनस स्ट्रिप' (प्रकाश उत्सर्जित करने वाली पट्टियां) लगाई हैं, जो कम रोशनी में भी चमकती हैं और लोको पायलट को सही दिशा का अंदाजा देने में मदद करती हैं।
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क्या है फॉग सेफ डिवाइस (FSD) और यह कैसे काम करती है? Fog Safe Device एक पोर्टेबल उपकरण है जो जीपीएस (GPS) तकनीक पर आधारित है। इसे लोको पायलट अपने केबिन में रखते हैं।
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- \r\n जीपीएस मैपिंग: इस डिवाइस में रेलवे ट्रैक के सभी सिग्नल, स्टेशन, लेवल क्रॉसिंग गेट और महत्वपूर्ण स्थलों की मैपिंग पहले से मौजूद होती है।\r\n \r\n
- \r\n ऑडियो-विजुअल अलर्ट: जैसे ही ट्रेन किसी सिग्नल के पास पहुँचती है, यह डिवाइस लोको पायलट को सिग्नल की दूरी और उसकी स्थिति के बारे में बोलकर (Audio) और स्क्रीन पर (Visual) अलर्ट दे देती है।\r\n \r\n
- \r\n सटीक जानकारी: यह डिवाइस लोको पायलट को बताती है कि अगला सिग्नल कितनी दूरी पर है। इससे पायलट को घने कोहरे में भी ट्रैक की स्थिति का सही अंदाजा रहता है और वह आत्मविश्वास के साथ ट्रेन की गति को बनाए रख सकता है।\r\n \r\n
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यात्रियों को क्या होगा फायदा? कोहरे के मौसम में ट्रेनों का घंटों देरी से चलना यात्रियों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत होती है। Fog Safe Device के इस्तेमाल से ट्रेनों की औसत गति में 25 किमी प्रति घंटे का सुधार हुआ है। इसका सीधा मतलब है कि अब ट्रेनें अपने निर्धारित समय से बहुत ज्यादा देरी से नहीं चलेंगी।
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साथ ही, लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों की विशेष काउंसलिंग की गई है ताकि वे ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग और एएफडी (AFD) के तालमेल को बेहतर समझ सकें। इस तकनीक से मानवीय भूल (Human Error) की गुंजाइश कम हो गई है और रेल यात्रा पहले से अधिक सुरक्षित हो गई है।
\r\n\r\nनिष्कर्ष (Conclusion) भारतीय रेलवे की यह Fog Safe Device तकनीक रेल यात्रा के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। कोहरे के कारण होने वाले हादसों को रोकने और समय की बचत करने में यह डिवाइस 'गेम चेंजर' साबित हो रही है। उत्तर और पूर्वोत्तर रेलवे के इस सफल प्रयोग से उम्मीद है कि आने वाले समय में देश के अन्य कोहरा प्रभावित क्षेत्रों में भी ट्रेनों का संचालन पूरी तरह बाधारहित हो जाएगा।
\r\n\r\nसारांश: उत्तर और पूर्वोत्तर रेलवे की 1700+ ट्रेनों में फॉग सेफ डिवाइस (FSD) लगाई गई है। जीपीएस आधारित यह तकनीक लोको पायलटों को सिग्नल की सटीक जानकारी देती है, जिससे कोहरे में भी ट्रेनें 75 किमी/घंटा की रफ्तार से सुरक्षित दौड़ पा रही हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.