मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक दलों का देशव्यापी विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। Election Commission Protest के तहत शुक्रवार को दिल्ली, मुंबई और पटना सहित कई प्रमुख शहरों में विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने जोरदार हल्ला बोला। चुनावी प्रक्रियाओं (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य रूप से आम आदमी पार्टी (AAP), कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), लेफ्ट और इंडिया ब्लॉक ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
दिल्ली: जंतर-मंतर छावनी में तब्दील, 700 हिरासत में राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य केंद्र रहा, जहां लेफ्ट, आम आदमी पार्टी और विभिन्न छात्र यूनियनों ने SIR के खिलाफ प्रदर्शन किया। हालात को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाके को 8 से 9 सुरक्षा जोन में बांटकर हर जोन में एक वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारी को तैनात किया है। पुलिस ने इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है, जिसके तहत किसी भी तरह के प्रदर्शन, जुलूस या एक स्थान पर भीड़ के इकट्ठा होने पर पूरी तरह प्रतिबंध है।
भारी पुलिस बल और आरएएफ (RAF) जवानों के साथ वॉटर कैनन भी तैनात किए गए हैं। प्रतिबंधों के बावजूद प्रदर्शन करने पहुंचे दिल्ली के मंत्री सौरभ भारद्वाज, आतिशी और संजय सिंह समेत करीब 700 कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। चुनाव आयोग के खिलाफ इस आक्रोश को देखते हुए सेंट्रल दिल्ली में सुरक्षा काफी कड़ी कर दी गई है। पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर भी सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है और निजामुद्दीन इलाके में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए विशेष बैरिकेडिंग की गई है।

एहतियातन 12 मेट्रो स्टेशन बंद दिल्ली में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पुलिस के निर्देश पर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने आसपास के 12 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट अगले आदेश तक के लिए बंद कर दिए हैं। इन स्टेशनों में जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस और लोक कल्याण मार्ग जैसे अति व्यस्त स्टेशन शामिल हैं।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›'सरकार हमारी आवाज दबाना चाहती है' हिरासत में लिए जाने से पहले दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया, "सरकार हमारी आवाज बंद करना चाहती है। वे चाहते हैं कि हम वोट चोरी का मुद्दा न उठाएं।" सौरभ भारद्वाज बिना कार के जंतर-मंतर पहुंचे थे और उन्होंने दावा किया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए छह दिन पहले अनुमति मांगी गई थी।
वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने भी प्रदर्शन पर लगी रोक की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, "आज गांधी जयंती है। आखिर गांधी के देश में प्रदर्शन के लिए अनुमति की क्या आवश्यकता है? देश को पुलिस स्टेट में तब्दील कर देने के बावजूद ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री अपने कथित गलत कामों को छिपा नहीं पाएंगे।"
मुंबई में CJP का हल्ला बोल, बच्चे भी हुए शामिल दिल्ली के अलावा महाराष्ट्र में भी इस प्रदर्शन की गूंज है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुंबई के शिवाजी पार्क में शाम 4 बजे से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन बुलाया। इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें छोटे बच्चे भी शामिल हुए। एक व्यक्ति ने बताया कि वह अपने बच्चों के साथ इस प्रदर्शन का हिस्सा बनने के लिए विशेष रूप से पुणे से मुंबई आया है।
CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि जिस तरह धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ 'जंतर-मंतर 1.0' के दौरान देश भर के युवा एकजुट हुए थे, उसी ऊर्जा के साथ 'CJP 2.0' को भी सफल बनाना होगा। इसके साथ ही CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने चेतावनी दी है कि यदि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो अक्टूबर के अंत तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि CJP 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के खिलाफ होने वाले विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन में शामिल नहीं होगी।
पटना में 'लोकतंत्र बचाओ मार्च' इंडिया ब्लॉक की ओर से चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर 2 से 8 अक्टूबर तक देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया गया है। इसी क्रम में पटना में सीपीआई (माले) के नेतृत्व में 'लोकतंत्र बचाओ मार्च' निकाला गया, जिसमें कांग्रेस, सीपीएम, राजद और ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) के कार्यकर्ता भारी संख्या में शामिल हुए।
चुनाव आयोग पर उठे 4 बड़े सवाल इस पूरे विवाद के केंद्र में मुख्य रूप से चार बड़े तकनीकी और प्रक्रियात्मक सवाल हैं, जिन पर विपक्ष जवाबदेही मांग रहा है:
फॉर्म-6 में बदलाव की वैधता: नए वोटरों से पिछली SIR लिस्ट में उनके खुद के या परिवार के नाम की जानकारी मांगने को लेकर सवाल उठाए गए हैं। संधू ने इसे पूरी तरह से गैरकानूनी करार देते हुए फॉर्म से हटाने की मांग की है।
वोटर डेटाबेस का नियंत्रण: यह सवाल उठाया जा रहा है कि राज्यों के वोटर डेटाबेस का पूरा नियंत्रण दिल्ली (केंद्र) में क्यों बढ़ाया जा रहा है और राज्यों की इस डेटा तक पहुंच को सीमित क्यों किया जा रहा है?
बंगाल में 16 लाख अपीलें: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों को लेकर बिना किसी स्पष्टता के करीब 16 लाख अपीलें किसने और किसकी अनुमति से दायर कीं, यह जांच का विषय बना हुआ है।
गोवा में 97 वोटरों की समस्या: गोवा में जांच के दौरान योग्य पाए गए 97 वोटरों को कथित तौर पर सॉफ्टवेयर की समस्या का हवाला देते हुए अंतिम लिस्ट में क्यों नहीं जोड़ा गया?
विपक्ष का आरोप है कि ये चारों बिंदु चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं, जिनका संतोषजनक जवाब अब तक चुनाव आयोग की तरफ से नहीं दिया गया है।
Sabse pehle comment karne wale banein.