उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने सड़क पर नमाज पढ़ने और सार्वजनिक मार्गों को जाम करने वालों को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। सीएम ने दो टूक कहा कि 'सड़कें आवा
Published at : 18 May 2026, 01:44 PM IST
Updated : 09:25 PM IST
· 11 Sep 2026
Yogi Adityanath Gives Strict Warning Against Offering Namaz on Public Roads
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लखनऊ (UP Political & Crime News): उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) अपनी सख्त कानून-व्यवस्था और कड़े फैसलों के लिए पूरे देश में जाने जाते हैं। चाहे वह अतिक्रमण हटाना हो, लाउडस्पीकर की आवाज कम करना हो या फिर माफियाओं पर नकेल कसना हो, योगी सरकार ने हमेशा स्पष्ट संदेश दिया है कि 'कानून से ऊपर कोई नहीं है'। इसी कड़ी में अब मुख्यमंत्री ने सड़क पर धार्मिक गतिविधियों और विशेष रूप से 'सड़क पर नमाज' (Namaz on Road) पढ़ने की प्रथा पर करारा प्रहार किया है।READ ALSO:-रोहतास में सोने की चमक पड़ी फीकी: PM मोदी की अपील से बाजार में सन्नाटा, शोरूम छोड़ बेबस स्वर्ण कारोबारी ने चाय-पकौड़ी बेचकर खोला मोर्चा
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हाल ही में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए सीएम योगी ने साफ और दो टूक शब्दों में कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों और सड़कों का उपयोग केवल उसी काम के लिए होना चाहिए, जिसके लिए वे बनी हैं। उनके इस बयान ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में अब पुरानी परिपाटियां नहीं चलेंगी, जहां धर्म के नाम पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जाती थीं।
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नमाज पढ़नी है, आप शिफ्ट में पढ़िए... \r\n \r\nप्यार से मानेंगे ठीक है, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे... pic.twitter.com/zDoz6YiqTZ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लहजा इस बार बेहद सख्त था। सड़क जाम करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा, "सड़कें चलने के लिए हैं, तमाशे के लिए नहीं।" यह वाक्य उन तमाम लोगों के लिए एक सीधा संदेश है जो अपनी धार्मिक या राजनीतिक शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए मुख्य मार्गों को जाम कर देते हैं।
सीएम ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में सड़क जाम करने वालों के खिलाफ अब बेहद सख्त और दंडात्मक कार्रवाई होगी। सड़क किसी एक व्यक्ति, समुदाय या समूह की जागीर नहीं है। यह करदाताओं (Taxpayers) के पैसे से बनी सार्वजनिक संपत्ति है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य लोगों के आवागमन (Commuting) को सुगम बनाना है। जब भी सड़कों पर टेंट लगाकर या दरी बिछाकर कोई धार्मिक आयोजन या नमाज पढ़ी जाती है, तो इसका सीधा असर हजारों आम नागरिकों की जिंदगी पर पड़ता है। सीएम का यह बयान जनता की उसी परेशानी को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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नमाज का नया फॉर्मूला: 'शिफ्ट में पढ़िए नमाज'
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अपने संबोधन में सीएम योगी ने समस्या गिनाने के साथ-साथ उसका एक बहुत ही व्यावहारिक समाधान भी पेश किया। उन्होंने सड़क पर नमाज पढ़ने की जिद करने वालों को चेतावनी भरे अंदाज में एक विकल्प दिया।
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सीएम योगी ने कहा, "अगर नमाज पढ़नी है, तो शिफ्ट में पढ़िए।"शिफ्ट के फॉर्मूले का अर्थ क्या है? अक्सर देखा जाता है कि शुक्रवार की जुमे की नमाज या ईद/बकरीद जैसे बड़े त्योहारों पर मस्जिदों और ईदगाहों में जगह कम पड़ जाती है। इसके बाद लोग मस्जिद के बाहर मुख्य सड़क पर ही सफें (कतारें) बिछाकर नमाज पढ़ने लगते हैं, जिससे पूरा ट्रैफिक ठप हो जाता है। सीएम योगी का सुझाव है कि अगर जगह कम है, तो नमाजियों को अलग-अलग समय पर (पहली शिफ्ट, दूसरी शिफ्ट) नमाज अदा करनी चाहिए। मस्जिद के अंदर एक समूह नमाज पढ़ ले, उसके बाद दूसरा समूह पढ़ ले। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पिछले कुछ समय से सफलतापूर्वक लागू भी की जा चुकी है, जहां मुस्लिम धर्मगुरुओं ने खुद आगे आकर शिफ्ट में नमाज पढ़ाने की व्यवस्था की है।
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यूपी के अंदर पिछली सरकारों का प्रोडक्शन कट्टा और बम था... \r\n \r\nहमने इसे बंद करवाया, अब यहां पर ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है... pic.twitter.com/gZBDU4yonF
'प्यार से मानेंगे तो ठीक, नहीं तो दूसरा तरीका अपनाएंगे'
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इस कार्यक्रम में सीएम योगी का जो वाक्य सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, वह था प्रशासन की 'लौह नीति' (Iron-fist policy) का ऐलान। उन्होंने मुस्कुराते हुए लेकिन बेहद सख्त लहजे में कहा, "पहले हम समझाएंगे... प्यार से मानेंगे ठीक है, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे।"
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यह 'दूसरा तरीका' पुलिस और प्रशासन की उस कानूनी कार्रवाई की तरफ इशारा है, जिसके तहत एफआईआर (FIR) दर्ज करना, भारी जुर्माना लगाना और जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारियां करना शामिल है। मुख्यमंत्री ने मंच से यह ऐलान कर दिया है कि अब सड़कों पर नमाज नहीं होती है और न ही आगे ऐसा कुछ बर्दाश्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है और किसी को भी यह अधिकार नहीं दिया जा सकता कि वह अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए सड़क रोककर दूसरों की आजादी का हनन करे।
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सड़क जाम का असर: अर्थव्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं पर मार
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सीएम योगी ने अपने भाषण में सिर्फ नियमों की बात नहीं की, बल्कि इसके पीछे के मानवीय और आर्थिक पहलुओं को भी उजागर किया। आखिर सड़क पर होने वाले ऐसे आयोजनों से दिक्कत क्या है?
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आपातकालीन सेवाएं (Emergency Services): जब कोई मुख्य सड़क जाम होती है, तो सबसे ज्यादा खतरा उन एंबुलेंस को होता है जिनमें गंभीर मरीज अस्पताल जा रहे होते हैं। फायर ब्रिगेड की गाड़ियां समय पर घटनास्थल तक नहीं पहुंच पातीं। सीएम ने स्पष्ट किया कि किसी की इबादत के चलते किसी मरीज की जान को जोखिम में नहीं डाला जा सकता।
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आम जनता की परेशानी: स्कूल जाने वाले बच्चे, ऑफिस जाने वाले कर्मचारी और दिहाड़ी मजदूर सड़क जाम होने से घंटों ट्रैफिक में फंसे रहते हैं।
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आर्थिक नुकसान: यूपी तेजी से एक औद्योगिक हब (Industrial Hub) बन रहा है। मालवाहक वाहनों (Commercial Vehicles) का रोकना अर्थव्यवस्था को सीधा नुकसान पहुंचाता है।
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सरकार का साफ मानना है कि धार्मिक स्वतंत्रता (Religious Freedom) का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन वह किसी भी कीमत पर आम जनता की सुविधा और राज्य की सुचारू यातायात व्यवस्था के साथ कोई समझौता नहीं करेगी।
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प्रशासन को दिए कड़े निर्देश: पहले संवाद, फिर सीधा एक्शन
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मुख्यमंत्री ने केवल चेतावनी ही नहीं दी, बल्कि यूपी पुलिस (UP Police) और प्रशासन (Administration) के आला अधिकारियों को भी काम करने का स्पष्ट तरीका बता दिया है।
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पहला कदम - संवाद (Dialogue): अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी धर्मगुरुओं, मौलवियों और स्थानीय नेताओं के साथ पहले शांति समिति की बैठकें करें। उन्हें नए नियमों से अवगत कराएं और शिफ्ट में नमाज पढ़ने के लिए प्रेरित करें।
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दूसरा कदम - चेतावनी (Warning): अगर कोई समूह सड़कों पर उतरने की कोशिश करता है, तो प्रशासन उन्हें पहले चेतावनी देकर वहां से हटाए।
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तीसरा कदम - कानूनी कार्रवाई (Strict Action): यदि संवाद और चेतावनी का कोई असर नहीं होता है, तो पुलिस बिना किसी भेदभाव के सीधे मुकदमा दर्ज करे और सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे। सरकार ने प्रशासन को खुली छूट दी है कि आम जनता के आवागमन को बाधित करने वाली किसी भी अराजकता को बिल्कुल भी बर्दाश्त न किया जाए।
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सुशासन और 'कानून का राज' की दिशा में बढ़ता कदम
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान इस तथ्य को फिर से पुष्ट करता है कि उत्तर प्रदेश में सुशासन (Good Governance) और 'कानून का राज' (Rule of Law) स्थापित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। लाउडस्पीकरों को धार्मिक स्थलों से उतरवाने के सफल और शांतिपूर्ण अभियान के बाद, अब सड़कों को धार्मिक आयोजनों से मुक्त कराने का यह अभियान यूपी मॉडल का एक नया उदाहरण बन रहा है।
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यह आदेश किसी एक धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि उस मानसिकता के खिलाफ है जो सार्वजनिक संपदा को अपनी निजी संपत्ति समझती है। योगी सरकार का स्पष्ट संदेश यही है कि आप अपने धर्म का पालन अपनी चारदीवारी या धार्मिक स्थलों के भीतर पूरी श्रद्धा और स्वतंत्रता के साथ करें, लेकिन जब बात सड़क की हो, तो वहां सिर्फ एक ही धर्म लागू होगा—और वह है 'यातायात का नियम और जन सुविधा'।
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