नई दिल्ली/जिनेवा: दुनिया अभी पिछली महामारियों के खौफनाक मंजर को पूरी तरह से भूल भी नहीं पाई थी कि एक बार फिर एक बेहद जानलेवा और संक्रामक महामारी का साया पूरी मानव जाति पर मंडराने लगा है। यह नाम है— इबोला (Ebola)। अफ्रीकी महाद्वीप से उठी इस बीमारी की लहर ने वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों, सरकारों और चिकित्सा विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है।READ ALSO:-"जब परिवार छोड़ दे साथ, तब हम थामेंगे हाथ": राजकोट में 500 करोड़ की लागत से बन रहा दुनिया का सबसे बड़ा मुफ्त वृद्धाश्रम
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डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा जैसे देशों में इबोला वायरस डिजीज (EVD) के मामलों में अचानक आई अप्रत्याशित तेजी ने पूरी दुनिया को दहशत में डाल दिया है। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को तत्काल प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी' (Public Health Emergency of International Concern - PHEIC) का ऐलान करना पड़ा है। यह डब्ल्यूएचओ द्वारा उठाया जाने वाला सबसे बड़ा और सख्त कदम है, जो अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों के कड़े प्रावधानों के तहत लिया जाता है।
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अफ्रीका में तबाही: 'सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' लागू

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अफ्रीकी देशों की सड़कों से लेकर अस्पतालों तक इबोला का सबसे खतरनाक और वीभत्स रूप देखने को मिल रहा है। इस समय विशेष रूप से डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और इसके पड़ोसी देश युगांडा में इस जानलेवा बीमारी के हर दिन नए संदिग्ध मरीज सामने आ रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही है और मौतों का आंकड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
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हालात की अत्यधिक संवेदनशीलता और महाद्वीपीय खतरे को देखते हुए ‘अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ (Africa CDC) ने भी एक आपातकालीन बैठक बुलाई और इसे पूरे महाद्वीप की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा मानते हुए आधिकारिक तौर पर 'सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित कर दिया है। स्थानीय प्रशासन वायरस के प्रसार को रोकने के लिए आइसोलेशन वार्ड बना रहा है, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
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क्यों इतना खौफनाक है मौजूदा 'बुंडिबुग्यो स्ट्रेन' (Bundibugyo Strain)?

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वायरसों की दुनिया में म्यूटेशन (बदलाव) एक आम बात है, लेकिन इबोला का मौजूदा रूप बेहद खतरनाक है। मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्तमान में जो स्ट्रेन तबाही मचा रहा है उसे 'बुंडिबुग्यो स्ट्रेन' कहा जाता है।
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इस स्ट्रेन की सबसे डरावनी बात यह है कि चिकित्सा विज्ञान के पास अभी तक इसके लिए कोई भी स्वीकृत वैक्सीन या सटीक दवा (Specific Antiviral Drug) उपलब्ध नहीं है। बिना किसी ठोस इलाज के, डॉक्टर केवल मरीजों के लक्षणों को कम करने (Supportive Care) का प्रयास कर रहे हैं। यही कारण है कि इस प्रकोप को और भी अधिक घातक माना जा रहा है।
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डब्ल्यूएचओ की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, इबोला वायरस शरीर के इम्यून सिस्टम पर सीधा और बहुत तेज हमला करता है। यह वायरस शरीर के कई अंगों को एक साथ निष्क्रिय (Multi-organ failure) कर सकता है। गंभीर मामलों में मरीज के शरीर के अंदर और बाहर (आंखों, कानों और नाक से) भयंकर रक्तस्राव (Bleeding) होने लगता है। इस वर्तमान प्रकोप में संक्रमित मरीजों में मृत्युदर (Mortality Rate) 30% से 50% तक देखी जा रही है, जो कि किसी भी महामारी के लिहाज से एक बहुत बड़ा और खौफनाक आंकड़ा है।
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भारत सरकार का एक्शन: अलर्ट मोड पर स्वास्थ्य मंत्रालय

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वैश्विक स्तर पर पैदा हुए इस अभूतपूर्व स्वास्थ्य संकट और वायरस के तेजी से फैलते ग्राफ को देखते हुए भारत सरकार भी पूरी तरह से हाई-अलर्ट मोड पर आ गई है। भारत की विशाल आबादी और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को देखते हुए सरकार कोई भी जोखिम मोल नहीं लेना चाहती।
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स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार (MoHFW) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भारतीय नागरिकों के लिए एक बेहद सख्त और स्पष्ट ट्रैवल एडवाइजरी (Travel Advisory) जारी की है।
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एडवाइजरी के मुख्य बिंदु:

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    इन देशों की यात्रा से बचें: नागरिकों को स्पष्ट रूप से डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC), युगांडा और दक्षिण सूडान की 'गैर-जरूरी यात्रा' (Non-essential travel) से पूरी तरह बचने की सख्त सलाह दी गई है।
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    सुरक्षित विकल्प: सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक इन अफ्रीकी देशों में स्थिति पूरी तरह से सामान्य और नियंत्रण में नहीं आ जाती, तब तक वहां की यात्रा टालना ही नागरिकों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प है।
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    एयरपोर्ट स्क्रीनिंग: अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों की सख्त स्वास्थ्य जांच (Thermal Screening) शुरू कर दी गई है। यदि किसी यात्री में बुखार या अन्य कोई भी संदिग्ध लक्षण पाया जाता है, तो उसे तुरंत आइसोलेट करने के निर्देश दिए गए हैं।
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इबोला का इतिहास: आंकड़ों की नजर में एक 'किलर वायरस'

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इबोला कोई नई बीमारी नहीं है, लेकिन इसकी घातकता हमेशा से दुनिया के लिए एक पहेली रही है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस वायरस की पहचान आज से लगभग पांच दशक पहले हुई थी। आइए एक नजर डालते हैं इसके खौफनाक आंकड़ों पर:
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विषय
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महत्वपूर्ण आंकड़े
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पहली बार कब मिला
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वर्ष 1976 (कांगो की इबोला नदी के पास)
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मौजूदा प्रकोप के संदिग्ध मामले
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लगभग 700 से अधिक
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वर्तमान प्रकोप में मौतें
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216 से ज्यादा
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मृत्यु दर (Mortality Rate)
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30% से 50% के बीच
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अब तक कुल मौतें (इतिहास में)
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15,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं
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कैसे फैलता है इबोला और क्या हैं इसके लक्षण?

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आम जनता के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि यह वायरस हवा से (Airborne) नहीं फैलता, बल्कि यह संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों (शारीरिक स्राव, खून, पसीना, लार, उल्टी या मल-मूत्र) के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। इसके अलावा, संक्रमित जानवरों (जैसे चमगादड़ या बंदर) के संपर्क में आने से भी यह इंसानों में प्रवेश कर सकता है।
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मुख्य लक्षण जिन पर ध्यान देना जरूरी है:

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    अचानक बहुत तेज बुखार आना।
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    अत्यधिक शारीरिक कमजोरी और थकान महसूस होना।
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    मांसपेशियों और जोड़ों में भयंकर दर्द।
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    गले में खराश और सिरदर्द।
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    बीमारी बढ़ने पर उल्टी, डायरिया (दस्त) और शरीर पर चकत्ते (Rashes) पड़ना।
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    अंतिम चरण में लिवर और किडनी का काम करना बंद कर देना और आंतरिक/बाहरी रक्तस्राव शुरू होना।
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कैसे पाएं इस जानलेवा वायरस से सुरक्षा? (Prevention Guidelines)

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भारत सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम लोगों को पैनिक (घबराने) न करने की सलाह दी है, लेकिन साथ ही कुछ बेहद जरूरी सावधानियों का कड़ाई से पालन करने की अपील की है:
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    यात्रा पर पाबंदी: जब तक बहुत अधिक इमरजेंसी न हो, प्रभावित अफ्रीकी देशों (विशेषकर कांगो और युगांडा) की यात्रा का विचार तुरंत रद्द कर दें।
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    व्यक्तिगत स्वच्छता: भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। अपने हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से धोएं या अच्छी गुणवत्ता वाले सैनिटाइजर का उपयोग करें।
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    मास्क का अनिवार्य उपयोग: घर से बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करें, जो न केवल इबोला बल्कि अन्य कई संक्रामक बीमारियों से आपको सुरक्षित रखेगा।
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    लक्षण दिखने पर लापरवाही न करें: यदि आपको अचानक तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी या ऊपर बताए गए लक्षणों में से कुछ भी महसूस होता है, तो बिना देर किए तुरंत किसी योग्य डॉक्टर से संपर्क करें।
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    अफवाहों से बचें: सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक जानकारियों से बचें। केवल भारत सरकार (MoHFW) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) जैसी आधिकारिक एजेंसियों द्वारा दी गई जानकारी पर ही भरोसा करें।
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    विदेश से लौटने पर: यदि आप या आपका कोई परिचित हाल ही में अंतरराष्ट्रीय यात्रा (खासकर अफ्रीकी देशों) से लौटा है, तो कुछ दिनों के लिए खुद को क्वारंटाइन (Quarantine) करें और स्वास्थ्य अधिकारियों के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से पालन करें।
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डब्ल्यूएचओ द्वारा इबोला को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दुनिया एक गंभीर स्वास्थ्य संकट के मुहाने पर खड़ी है। भारत सरकार ने अपनी तरफ से पुख्ता इंतजाम शुरू कर दिए हैं और एडवाइजरी जारी कर दी है। अब जिम्मेदारी नागरिकों की है कि वे सतर्क रहें, सावधानियों का पालन करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचें। जागरूकता और सतर्कता ही इस जानलेवा वायरस के खिलाफ हमारा सबसे बड़ा और एकमात्र हथियार है।
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