बिजनौर के अफजलगढ़ थाना क्षेत्र के कादराबाद में गुड़ तैयार करने वाले कोल्हुओं को लेकर प्रशासनिक जांच का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कोल्हुओं तथा वहां मौजूद सामग्री की जांच की। इस दौरान गुड़ तैयार करने में कथित तौर पर होली में इस्तेमाल होने वाले रंग के प्रयोग का आरोप सामने आया।

राजस्व टीम ने मौके से गुड़ और संदिग्ध सामग्री के नमूने लिए हैं। इन नमूनों को जांच के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को सौंपा गया है। अब जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि गुड़ तैयार करने में किसी प्रतिबंधित या स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक रंग अथवा अन्य सामग्री का इस्तेमाल हुआ था या नहीं।

गन्ने के रस में चीनी मिलाने का भी आरोप

जांच के दौरान कुछ कोल्हू संचालकों पर गन्ने के रस के साथ चीनी का इस्तेमाल कर गुड़ तैयार करने का आरोप भी लगाया गया। बताया गया कि क्षेत्र में कई कोल्हू संचालित हो रहे हैं और कुछ स्थानों पर बड़ी मात्रा में चीनी की बोरियां भी रखी मिलीं।

हालांकि, चीनी का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था और इससे तैयार गुड़ की गुणवत्ता पर क्या असर पड़ा, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। प्रशासन की ओर से लिए गए नमूनों की जांच इसी मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नायब तहसीलदार का विरोध

कार्रवाई के दौरान कुछ कोल्हू संचालकों ने मौके पर मौजूद नायब तहसीलदार का विरोध भी किया। इसके बावजूद राजस्व टीम ने जांच की कार्रवाई जारी रखी और आवश्यक नमूने एकत्र किए।

प्रशासन की कार्रवाई का अगला आधार जांच रिपोर्ट होगी। अधिकारियों के मुताबिक नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि गुड़ में प्रतिबंधित रंग या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक किसी सामग्री का इस्तेमाल हुआ था या नहीं।

रिपोर्ट के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई

प्रशासन की ओर से लिए गए नमूने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को जांच के लिए सौंपे गए हैं। फिलहाल नमूनों की रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

यदि जांच में खाद्य पदार्थ में प्रतिबंधित रंग या स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक सामग्री का इस्तेमाल प्रमाणित होता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

इस मामले में प्रशासन का कहना है कि अंतिम कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर ही तय की जाएगी। इसलिए फिलहाल गुड़ में प्रतिबंधित या हानिकारक सामग्री के इस्तेमाल को लेकर सामने आए आरोपों की पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही होगी।

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