उत्तर प्रदेश में अयोध्या विधानसभा सीट को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव आमने-सामने आ गए हैं। अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी, तो योगी आदित्यनाथ ने पलटवार करते हुए उन्हें भी इसी सीट से नामांकन करने का न्योता दे दिया। दोनों के बयानों के बाद आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर इस सीट पर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।

अखिलेश ने दी चुनौती

अखिलेश यादव 8 अक्टूबर को अयोध्या में पूर्व विधायक तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय के पैतृक आवास पर आयोजित भागवत कथा में शामिल होने पहुंचे थे। इसी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दी।

सपा अध्यक्ष का दावा है कि पवन पांडेय को प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद भाजपा लगातार सर्वे करा रही है, लेकिन उसे उनके मुकाबले का उम्मीदवार नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री को अयोध्या में किए गए विकास कार्यों पर भरोसा है तो उन्हें खुद यहां से चुनाव लड़कर देखना चाहिए।

अखिलेश यादव ने अयोध्या के विकास मॉडल पर सवाल भी उठाए। उनका कहना है कि सपा की सरकार बनने पर अयोध्या का विकास सिर्फ पर्यटन केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि तीर्थस्थल की गरिमा को ध्यान में रखकर किया जाएगा। उन्होंने स्थानीय लोगों के विकास और शहर को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने की बात कही।

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योगी का पलटवार, अखिलेश ने दिया जवाब

अखिलेश की चुनौती के अगले दिन 10 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलरामपुर में एक कार्यक्रम के दौरान जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश यादव अयोध्या से चुनाव लड़ने को तैयार हैं, तो वे भी वहां से अपनी किस्मत आजमाने के लिए तैयार हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कहा, "अखिलेश जी, मैं आपको ऑफर देता हूं। आइए, आप भी श्री अयोध्या धाम में नामांकन करिए और मैं भी करता हूं। चलिए, एक बार किस्मत आजमा लेते हैं।" मुख्यमंत्री ने सपा अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें प्रदेश में हो रहे विकास कार्य दिखाई नहीं देते।

योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि अयोध्या उनके लिए आस्था का केंद्र है और वे वहां चुनाव लड़ने के लिए नहीं, बल्कि विकास कार्यों की निगरानी करने जाते हैं।

योगी के बयान पर अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा को हराने के लिए पीडीए का एक युवा उम्मीदवार ही काफी है। पीडीए से सपा का आशय पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों से है। सपा प्रमुख ने राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े मामलों में कार्रवाई को लेकर किए गए दावे पूरे न होने का आरोप भी लगाया।

उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद सीट पर भाजपा की हार का संदर्भ भी दिया। फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र में अयोध्या विधानसभा सीट शामिल है, हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग होते हैं और दोनों के परिणामों की सीधी तुलना नहीं की जा सकती।

अयोध्या क्यों बनी चर्चा का केंद्र

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और विकास परियोजनाएं भाजपा की राजनीति के प्रमुख मुद्दों में रही हैं। वहीं सपा स्थानीय विकास, आम लोगों की जरूरतों और मंदिर से जुड़े चढ़ावे के कथित विवादों को उठाकर सरकार को घेर रही है।

सपा पहले ही अयोध्या विधानसभा सीट से पवन पांडेय को अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। फिलहाल दोनों नेताओं के बयानों को चुनावी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव में से कौन वास्तव में अयोध्या से चुनाव लड़ेगा, इस पर कोई अंतिम घोषणा सामने नहीं आई है।

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