लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पूजा, हवन और दीपक जलाने के लिए तैयार किए जाने वाले अखाद्य वसा उत्पादों की बिक्री और पैकेजिंग को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब ऐसे उत्पादों को ‘पूजा घी’ के नाम से नहीं बेचा जा सकेगा। इनके पैकेट पर ‘घी’ शब्द लिखने पर भी रोक लगाई गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति बताने के लिए पैकेट पर काले रंग का क्रॉस निशान लगाना और हिंदी तथा अंग्रेजी में चेतावनी लिखना अनिवार्य होगा।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने इस संबंध में प्रदेश की सभी संबंधित इकाइयों को निर्देश जारी किए हैं। विभाग का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य खाद्य घी और पूजा के लिए तैयार किए जाने वाले अखाद्य उत्पादों के बीच भ्रम को रोकना है।

पैकेट पर काला क्रॉस और चेतावनी जरूरी

निर्देशों के अनुसार, पूजा, हवन और दीपक के लिए बनाए जाने वाले अखाद्य वसा उत्पादों के खुदरा पैकेट पर निर्धारित प्रारूप में काले रंग का क्रॉस निशान लगाना होगा। इसके साथ हिंदी और अंग्रेजी में ‘खाने के लिए नहीं’ या ‘मानव उपभोग हेतु अनुपयुक्त’ जैसी स्पष्ट चेतावनी अंकित करना जरूरी होगा।

इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक पैकेट देखकर समझ सकें कि संबंधित उत्पाद खाने के लिए नहीं है। विभाग ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लेबलिंग एवं डिस्प्ले) विनियम, 2020 के अनुरूप पैकेजिंग करने के निर्देश दिए हैं।

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वनस्पति और रिफाइंड तेल से तैयार किए जाते हैं उत्पाद

विभाग के अनुसार, कुछ इकाइयां वनस्पति, रिफाइंड तेल, सुगंध और दूसरे रसायनों का इस्तेमाल करके पूजा में उपयोग होने वाले वसा उत्पाद तैयार करती हैं। इनका रंग, गंध और पैकिंग कई बार बाजार में मिलने वाले खाद्य घी जैसी होती है। ऐसे में ग्राहक भ्रमित होकर इनका इस्तेमाल खाने में कर सकते हैं।

इसी आशंका को देखते हुए उत्पादों की पहचान स्पष्ट करने पर जोर दिया गया है। विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि खाद्य घी और पूजा के लिए बनाए जाने वाले अखाद्य उत्पादों को एक ही ब्रांड नाम से नहीं बेचा जा सकेगा। इससे दोनों तरह के उत्पादों के बीच अंतर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

खाद्य निर्माण इकाइयों को भी किया सतर्क

खाद्य सुरक्षा विभाग ने घी, तेल और अन्य खाद्य सामग्री बनाने वाली इकाइयों को भी सतर्क किया है। निर्देशों के अनुसार, यदि खाद्य पदार्थ बनाने या पैक करने वाले परिसर में पैराफिन, मिनरल ऑयल या पूजा सामग्री में इस्तेमाल होने वाले दूसरे रसायन पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

विभाग की चिंता है कि एक ही परिसर में खाद्य और अखाद्य उत्पादों का निर्माण या पैकेजिंग होने से गलत लेबलिंग, मिलावट अथवा उत्पादों के आपस में मिल जाने का खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए संबंधित इकाइयों को निर्धारित नियमों का पालन करने और खाद्य उत्पादों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

नियम तोड़ने पर स्टॉक जब्त, लाइसेंस भी हो सकता है निलंबित

खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण के दौरान निर्देशों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित उत्पादों का स्टॉक जब्त किया जा सकता है। इसके अलावा संबंधित प्रतिष्ठान का लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित करने की कार्रवाई भी संभव है।

डॉ. रोशन जैकब के अनुसार, त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए जांच और निगरानी की जाएगी। जहां भी नियमों का उल्लंघन या गड़बड़ी सामने आएगी, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

विभाग ने सभी संबंधित इकाइयों को निर्देशों का तत्काल पालन करने को कहा है। ऐसे में पूजा सामग्री तैयार करने और बेचने वाली इकाइयों को पैकेजिंग, लेबलिंग और ब्रांडिंग के नियमों पर विशेष ध्यान देना होगा।

उपभोक्ता पैकेट पर क्या देखें?

पूजा या दीपक जलाने के लिए वसा उत्पाद खरीदते समय ग्राहक पैकेट पर लगा काला क्रॉस निशान और चेतावनी जरूर देखें। ‘खाने के लिए नहीं’ या ‘मानव उपभोग हेतु अनुपयुक्त’ लिखा होने पर उस उत्पाद का इस्तेमाल खाद्य पदार्थ के रूप में नहीं करना चाहिए। खाद्य घी खरीदते समय उत्पाद का नाम, लेबल और अन्य जरूरी जानकारी पढ़ना भी जरूरी है।

यह कदम खाद्य और अखाद्य उत्पादों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखने तथा उपभोक्ताओं को भ्रम से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

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