उत्तर प्रदेश में सर्दी और कोहरे के दस्तक देने के साथ ही सड़कों पर होने वाले हादसों का खतरा बढ़ गया है। इन सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए, केंद्र सरकार के सड़क एवं परिवहन मंत्रालय (MoRTH) के निर्देश पर, अब यूपी के प्रमुख शहरों में एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू हो गया है। इस योजना के तहत, हाईवे पर सबसे ज्यादा दुर्घटना संभावित हिस्सों को चिन्हित कर हादसा क्रिटिकल कॉरिडोर यूपी (Critical Corridor) के रूप में विकसित किया जा रहा है।READ ALSO:-पश्चिमी यूपी में 'न्याय' की जंग तेज: हाई कोर्ट बेंच के लिए वकीलों का बड़ा ऐलान, 26 नवंबर को सांसदों के घर पर धरना, 17 दिसंबर को 'संपूर्ण बंद'
\r\n\r\n\r\n\r\n
इस पहल का उद्देश्य उन 'डेंजर जोन्स' को लक्षित करना है जो तेज रफ्तार और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी के कारण हादसों का सबब बनते हैं, खासकर कोहरे और कम विजिबिलिटी वाले मौसम में।
\r\n\r\n\r\n\r\n
क्या है 10 किलोमीटर का 'क्रिटिकल कॉरिडोर' प्लान?
\r\n\r\nवाराणसी के अपर पुलिस उपायुक्त यातायात अंशुमान मिश्र ने बताया कि सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के निर्देश पर क्रिटिकल कॉरिडोर बनाने का काम देश भर में चल रहा है, जिसके पहले चरण में यूपी के कई बड़े शहरों को शामिल किया गया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n पहचान: इस योजना के तहत, हाईवे के वे हिस्से जहां हादसों की संख्या पिछले 2 से 3 साल के आंकड़ों के अध्ययन के आधार पर ज्यादा पाई गई है, उन्हें चिन्हित किया जा रहा है।\r\n \r\n
- \r\n विकास: चिन्हित किए गए 10-10 किलोमीटर के स्ट्रेच को 'क्रिटिकल कॉरिडोर' में बदला जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी हाईवे के बीच में तीन थाना क्षेत्र पड़ते हैं, तो प्रत्येक थाना क्षेत्र के 10 किलोमीटर के सर्वाधिक खतरनाक हिस्से को इस कॉरिडोर में शामिल किया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n पहला चरण: वाराणसी में, राजा तालाब, रोहनिया, रामनगर और लंका थानों के बीच 10 किलोमीटर के खतरनाक स्ट्रेच को चिन्हित कर काम शुरू किया गया है।\r\n \r\n
- \r\n विस्तार: यह मॉडल सिर्फ वाराणसी तक सीमित नहीं है, बल्कि लखनऊ, आगरा, झांसी, मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद समेत अन्य बड़े शहरों में भी लागू किया जा रहा है।\r\n \r\n
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
स्टॉकहोम घोषणा और 4 'E' फॉर्मूला
\r\n\r\nयह पहल वैश्विक 'स्टॉकहोम घोषणा' (Stockholm Declaration) के अनुरूप है, जिस पर भारत सरकार भी हस्ताक्षरकर्ता है। इस घोषणा का मुख्य लक्ष्य वर्ष 2030 तक सड़क हादसों में होने वाली मृत्यु और गंभीर चोटों की संख्या को 50% तक कम करना है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, परिवहन मंत्रालय ने 4 'E' (Education, Engineering, Enforcement, और Emergency Care) के समग्र दृष्टिकोण को अपनाया है। हादसा क्रिटिकल कॉरिडोर यूपी योजना 'इंजीनियरिंग' और 'प्रवर्तन' (Enforcement) के घटकों पर सीधे काम कर रही है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
CC फ़ोर्स करेगी निगरानी: तीन-सूत्रीय कार्ययोजना
\r\n\r\nहादसों को रोकने के लिए, क्रिटिकल कॉरिडोर में एक विशेष CC (क्रिटिकल कॉरिडोर) फ़ोर्स तैनात की जाएगी। यह फ़ोर्स तीन मुख्य बिंदुओं पर काम करेगी:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n सघन प्रवर्तन:\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n हर 10 किलोमीटर के अंतराल पर एक CC फ़ोर्स तैनात होगी, जिसमें एक कांस्टेबल संबंधित थाने से अटैच होगा।\r\n \r\n
- \r\n हाईवे किनारे के ढाबों और होटलों को अपनी पार्किंग की व्यवस्था खुद करनी होगी। सड़क पर किसी भी तरह के वाहन को खड़ा करने की अनुमति नहीं होगी।\r\n \r\n
- \r\n हाईवे पर चलने वाले सभी ट्रैक्टर-ट्रॉली पर रिफ्लेक्टर (Reflector) लगाना अनिवार्य होगा।\r\n \r\n
\r\n - \r\n
- \r\n इंजीनियरिंग सुधार:\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n क्रिटिकल कॉरिडोर में गति सीमा निर्धारित की जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n सचेतक (Alert Signages) और अन्य तरीकों से हादसे वाले रास्तों को हाईलाइट किया जाएगा ताकि चालक सावधान रहें।\r\n \r\n
\r\n - \r\n
- \r\n डेटा आधारित कार्रवाई:\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n CC फ़ोर्स प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज करेगी और दुर्घटना के कारणों का विश्लेषण कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करने के लिए जिम्मेदार होगी।\r\n \r\n
\r\n - \r\n
\r\n\r\n
उत्तर प्रदेश सरकार की यह हादसा क्रिटिकल कॉरिडोर यूपी पहल, सड़क सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण और डेटा-संचालित कदम है। 10-10 किलोमीटर के इन क्रिटिकल स्ट्रेच को चिन्हित कर CC फ़ोर्स की तैनाती और सख्त नियम लागू करने से, हाईवे पर होने वाले हादसों, खासकर शीत लहर और कोहरे के दौरान, में भारी कमी आने की उम्मीद है। यह न केवल यातायात को सुरक्षित बनाएगा, बल्कि 'स्टॉकहोम घोषणा' के तहत भारत के 2030 के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी सहायक होगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.