मेरठ/कैराना: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच की स्थापना की मांग (Pashchimi UP High Court Bench Ki Maang) को लेकर वकीलों का आंदोलन अब और तेज हो गया है। अधिवक्ताओं ने अपनी मांग पूरी कराने के लिए बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन की रणनीति तैयार की है, जिसके तहत नवंबर और दिसंबर में दो प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।READ ALSO:-बिजनौर की कुलप्रकाश कौर का बॉलीवुड में जलवा! इमरान हाशमी और यामी गौतम की बनीं बेटी, 'हक' फिल्म से किया डेब्यू
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

आगामी आंदोलन की रणनीति

\r\n\r\n
यह बड़ा निर्णय कैराना स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर के बार भवन में आयोजित हाई कोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति की बैठक में लिया गया। इस बैठक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महामंत्री शामिल हुए।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
संघर्ष समिति द्वारा सर्वसम्मति से पारित प्रस्तावों के अनुसार, आंदोलन के दो महत्वपूर्ण चरण निम्नलिखित हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    26 नवंबर को सांसदों के आवास पर धरना: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों की बार एसोसिएशनें 26 नवंबर को अपने-अपने क्षेत्र के सांसदों के आवासों पर धरना देंगी। इस दिन सभी अधिवक्ता न्यायिक कार्य से पूरी तरह विरत रहेंगे। इस धरने का मुख्य उद्देश्य सांसदों से यह अनुरोध करना है कि वे संसद के आगामी सत्र में इस महत्वपूर्ण मांग को मजबूती से उठाएं।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    17 दिसंबर को संपूर्ण बंद: अपनी मांग को व्यापक जनसमर्थन देने के लिए 17 दिसंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संपूर्ण बंद (Complete Shutdown) का आह्वान किया गया है। वकीलों ने इस बंद में सभी व्यापारिक संगठनों और आम जनता से सहयोग मांगा है। इस दिन रजिस्ट्री कार्यालय भी अनिवार्य रूप से बंद रहेंगे।
    \r\n
  4. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बैठक में प्रमुख हस्तियां शामिल

\r\n\r\n
बैठक की अध्यक्षता संघर्ष समिति के चेयरमैन और मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा ने की, जबकि बार एसोसिएशन कैराना के रामकुमार वशिष्ठ ने सह-अध्यक्षता की। समिति के संयोजक और मेरठ बार एसोसिएशन के महामंत्री राजेंद्र सिंह राणा ने पूरी बैठक का संचालन किया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस महत्वपूर्ण बैठक में गौतमबुद्धनगर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमेन्द्र भाटी और महामंत्री अजीत नागर, मेरठ बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री जितेंद्र सिंह बना, तथा अधिवक्ता विनोद गौतम और वैभव पंवार सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपने विचार साझा किए और आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

क्यों हो रही है हाई कोर्ट बेंच की मांग?

\r\n\r\n
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वकील और जनता लंबे समय से इलाहाबाद हाई कोर्ट की एक पश्चिमी यूपी हाई कोर्ट बेंच की मांग कर रहे हैं। इस मांग का मुख्य कारण यह है कि पश्चिमी जिलों से इलाहाबाद (प्रयागराज) की दूरी काफी अधिक है, जिससे वकीलों, याचिकाकर्ताओं और आम जनता को कानूनी प्रक्रिया के लिए हजारों किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है। समय और धन की बर्बादी के अलावा, दूर-दराज के कारण न्याय तक पहुंचना भी कठिन हो जाता है। वकीलों का मानना है कि हाई कोर्ट बेंच की स्थापना से स्थानीय निवासियों को त्वरित और सुलभ न्याय मिल पाएगा। 
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
आंदोलन को तेज करने का यह निर्णय दर्शाता है कि पश्चिमी यूपी हाई कोर्ट बेंच की मांग अब केवल अधिवक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़ा जन आंदोलन बनने की ओर अग्रसर है। 
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर वकीलों ने आंदोलन तेज कर दिया है। कैराना में हुई हाई कोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति की बैठक में निर्णय लिया गया है कि 26 नवंबर को सभी अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहते हुए सांसदों के आवासों पर धरना देंगे, और 17 दिसंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संपूर्ण बंद का आह्वान किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें