मेरठ। ईंट, गारे, सीमेंट और लोहे के बीच पसीना बहाकर शहरों और गांवों की तस्वीर बदलने वाले निर्माण श्रमिकों (Construction Workers) के जीवन को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 'उत्तर प्रदेश भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड' (UPBOCW) पंजीकृत श्रमिकों के लिए कई शानदार कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रहा है।READ ALSO:-मेरठ में दर्दनाक घटना: यूपी पुलिस भर्ती में फेल होने पर छात्रा ने किया सुसाइड; दरोगा भर्ती में सिर्फ 1 नंबर से चूकी थी वर्दी
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इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों और उनके परिवारों को मातृत्व, बच्चों की शिक्षा, गंभीर बीमारी, दुर्घटना, विवाह, और वृद्धावस्था जैसी महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में मजबूत आर्थिक संबल प्रदान करना है। मेरठ के सहायक श्रम आयुक्त राजेश मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि एक पंजीकृत निर्माण श्रमिक को जन्म से लेकर मृत्यु तक सरकार की किन-किन योजनाओं का लाभ मिलता है। आइए जानते हैं विस्तार से:
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श्रमिकों के लिए संचालित 10 प्रमुख कल्याणकारी योजनाएं और उनके लाभ:

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1. मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना इस योजना के तहत श्रमिक परिवार में बेटे के जन्म पर ₹20,000 और बेटी के जन्म पर ₹25,000 की एकमुश्त सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा, बच्चे के लालन-पालन के लिए पुरुष श्रमिक को प्रति माह ₹6,000 की अतिरिक्त आर्थिक मदद भी प्रदान की जाती है।
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2. संत रविदास शिक्षा प्रोत्साहन योजना श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए यह योजना बेहद कारगर है। इसमें कक्षा 1 से लेकर उच्च शिक्षा तक पढ़ाई करने वाले बच्चों को ₹2,000 से लेकर ₹1 लाख तक की सहायता दी जाती है। जब बच्चा कक्षा 9 पास कर लेता है, तो उसे स्कूल जाने के लिए साइकिल खरीदने पर सब्सिडी भी मिलती है।
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3. कन्या विवाह सहायता योजना श्रमिकों को अपनी बेटियों की शादी में आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े, इसके लिए विभाग द्वारा ₹65,000 से लेकर ₹85,000 तक की अनुदान राशि दी जाती है। इस योजना की खास बात यह है कि एक श्रमिक अपनी अधिकतम दो पुत्रियों के विवाह के लिए यह लाभ ले सकता है।
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4. गंभीर बीमारी सहायता योजना स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिगत हर पंजीकृत श्रमिक का आयुष्मान कार्ड बनाया जाता है, जिससे उन्हें ₹5 लाख तक का मुफ्त उपचार मिलता है। इसके अतिरिक्त, श्रमिक के 21 वर्ष तक के बेटे-बेटी के लिए अलग से निःशुल्क उपचार की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।
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5. महात्मा गांधी पेंशन योजना श्रमिक का बुढ़ापा सुरक्षित करने के लिए यह योजना लागू की गई है। यदि कोई श्रमिक पंजीकरण के बाद लगातार 10 साल तक अपना अंशदान जमा करता है, तो सेवानिवृत्ति (60 वर्ष की आयु) के बाद उसे ₹1,000 प्रतिमाह आजीवन पेंशन के रूप में दिए जाते हैं।
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6. निर्माण कामगार मृत्यु एवं दिव्यांगता सहायता योजना किसी भी अनहोनी की स्थिति में श्रमिक के परिवार को बड़ा सहारा दिया जाता है:
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    दुर्घटना में मृत्यु होने पर: ₹5 लाख
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    सामान्य मृत्यु होने पर: ₹2 लाख
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    100% (पूर्ण) दिव्यांग होने पर: ₹4 लाख
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    आंशिक (100% से कम) दिव्यांग होने पर: ₹3 लाख
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    अंत्येष्टि (अंतिम संस्कार) के लिए: स्वजनों को तत्काल ₹25,000 की सहायता।
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7. अटल आवासीय विद्यालय योजना श्रमिकों के बच्चों को विश्वस्तरीय शिक्षा देने के लिए 'अटल आवासीय विद्यालय' खोले गए हैं। यहां कक्षा 1 से 12वीं तक के बच्चों को पूरी तरह से निःशुल्क शिक्षा, भोजन, उत्कृष्ट आवास और किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं।
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8. आवासीय विद्यालय सहायता योजना यह योजना अटल विद्यालयों के अलावा अन्य आवासीय विद्यालयों के लिए है। इसमें 6 से 14 वर्ष (कक्षा 10वीं तक) के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए निःशुल्क आवासीय व्यवस्था का लाभ दिया जाता है।
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9. कौशल विकास, उन्नयन एवं प्रमाणन योजना श्रम बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए निर्माण श्रमिकों को आधुनिक तकनीकों और मशीनों का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने पर उन्हें एक सरकारी प्रमाणपत्र भी मिलता है, जिससे उन्हें बेहतर रोजगार और अधिक आय प्राप्त करने में मदद मिलती है।
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10. आपदा राहत सहायता योजना प्राकृतिक आपदा या अन्य किसी आकस्मिक संकट से प्रभावित होने वाले पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को राहत पहुंचाने के लिए ₹1,000 प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह सहायता श्रमिक को आजीवन दी जाती है।
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कैसे लें इन योजनाओं का लाभ? इन सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए श्रमिकों का श्रम विभाग में पंजीकृत होना (लेबर कार्ड धारक होना) अनिवार्य है। पंजीकृत श्रमिक अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) या श्रम विभाग के कार्यालय में संपर्क कर इन योजनाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं।
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