लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अब कॉमर्शियल (व्यवसायिक) वाहनों के मालिकों को टैक्स भरने के मामले में मिलने वाली त्रैमासिक और छमाही राहत खत्म होने वाली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी' (One Trillion Dollar Economy) के लक्ष्य को पूरा करने के लिए, उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने एक नया और सख्त प्लान लागू करने की तैयारी कर ली है। इस नए प्लान के तहत, कॉमर्शियल वाहनों का टैक्स अब एकमुश्त (वन टाइम) में ही पूरा लेने का नियम बनाया गया है।READ ALSO:-'धाकड़ छोरा' की बढ़ी मुश्किलें! फिल्म डायरेक्टर उत्तर कुमार की लोकेशन अमरोहा में ट्रेस्ड, पुलिस की दबिश; महिला वकील बोलीं- 'हो सकती है मेरी हत्या'
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परिवहन विभाग की अपर मुख्य सचिव अर्चना अग्रवाल ने इस नए नियम की पुष्टि की है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य राजस्व बढ़ाना और टैक्स चोरी पर लगाम लगाना है।
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7.5 टन तक के वाहनों पर वन टाइम टैक्स

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योगी कैबिनेट ने कुछ माह पहले ही इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है, जिसके बाद यह नई व्यवस्था पूरे प्रदेश में प्रभावी हो जाएगी:
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    किसे राहत: अब 7.5 टन (साढ़े सात टन) तक की क्षमता वाले व्यावसायिक माल वाहनों और यात्री वाहनों पर वन टाइम टैक्स वसूल करने की तैयारी है।
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    पुरानी व्यवस्था: अब तक कॉमर्शियल वाहनों को तिमाही, छमाही और सालाना आधार पर टैक्स जमा करना होता था। इस नई व्यवस्था से वाहन स्वामियों को बार-बार प्रशासनिक परेशानियों से मुक्ति मिलेगी, और सरकार को एकमुश्त राजस्व प्राप्त होगा।
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    बड़े वाहनों पर नियम: 7.5 टन से अधिक क्षमता वाले ट्रक और बसों के लिए पहले के समान ही टैक्स व्यवस्था लागू रहेगी।
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₹3,000 करोड़ के बकाया टैक्स पर शिकंजा

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परिवहन विभाग का यह कदम इसलिए भी जरूरी है क्योंकि वाहन स्वामियों पर ₹3,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का टैक्स बकाया है। इस बकाए को वसूलने में विभाग को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
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    वसूली का तरीका: अब पुराने कॉमर्शियल वाहन स्वामियों को भी फिटनेस कराने से पहले पूरा बकाया टैक्स भरना होगा। बकायादारों को नोटिस भेजने के साथ ही वसूली के लिए नायब तहसीलदार के जरिए सख्त कार्रवाई कराई जाएगी। विभाग का लक्ष्य किसी भी कीमत पर सरकारी राजस्व को बढ़ाना है।
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प्राइवेट वाहनों का कॉमर्शियल इस्तेमाल: अब नहीं चलेगा

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राजस्व के नुकसान का एक बड़ा कारण प्राइवेट श्रेणी के वाहनों का व्यावसायिक इस्तेमाल करना भी है। परिवहन विभाग अब ऐसे वाहनों पर नकेल कस रहा है:
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    पहचान और कन्वर्जन: अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) संजय सिंह के नेतृत्व में ऐसे सभी वाहनों की सूची तैयार की जा रही है जो वास्तव में कॉमर्शियल हैं, लेकिन RTO कार्यालय में निजी वाहन के रूप में दर्ज हैं। इन सभी वाहनों को व्यावसायिक वाहन में कन्वर्ट कराया जाएगा, जिससे ज्यादा टैक्स वसूल होगा।
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    आंकड़े: प्रवर्तन टीम ने अब तक 1,724 ऐसी अवैध प्राइवेट गाड़ियां पकड़ी हैं, जिनमें से 700 से ज्यादा का कन्वर्जन कराया जा चुका है। लखनऊ एयरपोर्ट के पास से संचालित होने वाली प्राइवेट बसें भी अब एकमुश्त यूपी कॉमर्शियल वाहन टैक्स देंगी।
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    ई-रिक्शा: हजारों की संख्या में पकड़े गए गैर-पंजीकृत ई-रिक्शों का भी पंजीकरण कराया जा रहा है, और ऐसे वाहनों के खिलाफ चेकिंग अभियान फिर से शुरू किया गया है। 
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किस श्रेणी में कितने वाहन?

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उत्तर प्रदेश में कुल 3.80 करोड़ से अधिक नॉन ट्रांसपोर्ट (प्राइवेट) श्रेणी के वाहन हैं, जबकि ट्रांसपोर्ट (व्यवसायिक) श्रेणी के वाहनों की संख्या 22.93 लाख है। कॉमर्शियल श्रेणी में सबसे ज्यादा 10.08 लाख गुड्स कैरियर हैं, इसके बाद थ्री-व्हीलर और ई-रिक्शा आते हैं। यह नया वन-टाइम टैक्स नियम व्यावसायिक वाहनों के एक बड़े हिस्से पर लागू होगा।
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योगी सरकार ने 'वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी' के लक्ष्य को साधने और राजस्व बढ़ाने के लिए यूपी कॉमर्शियल वाहन टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब 7.5 टन तक के कॉमर्शियल वाहनों पर एकमुश्त टैक्स लगेगा, जिससे वाहन स्वामियों को बार-बार टैक्स जमा करने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी। साथ ही, ₹3,000 करोड़ के बकाया टैक्स और प्राइवेट वाहनों का कॉमर्शियल इस्तेमाल करने वालों पर सख्त कार्रवाई का प्लान बनाया गया है।
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