यूपी के बदायूं के उझानी में बरेली-मथुरा हाईवे पर बड़ा सड़क हादसा। रेस लगा रहे दो ट्रैक्टरों ने ई-रिक्शा को रौंदा। भात मांगने जा रही दूल्हे की मां और बहन समेत 6 महिलाओं की दर्दनाक मौत। पढ़ें द
Published at : 17 Jun 2026, 12:07 PM
Updated at : 11 Sep 2026, 09:25 PM
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Tragic Road Accident In Budaun UP 6 Women Killed In Tractor Crash
जिस घर से कुछ ही दिनों बाद गाजे-बाजे के साथ छोटे बेटे की बारात निकलनी थी, वहां अचानक एक साथ उठीं 6 अर्थियां। 'भात' मांगने जा रहे परिवार की मंगल-खुशियों को हाईवे पर दौड़ रहे मौत के ट्रैक्टरों ने पल भर में कुचल दिया। हादसे में 3 लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जानिए इस दहला देने वाले एक्सीडेंट की पूरी इनसाइड स्टोरी।
थाना उझानी क्षेत्रान्तर्गत ट्रैक्टर व ई रिक्शा में हुई भीषण टक्कर में 06 महिलाओं की मृत्यु हो जाने एवं 03 व्यक्तियों के घायल हो जाने की घटना के संबंध में जिलाधिकारी बदायूँ श्री अवनीश राय द्वारा दी गई बाइट। https://t.co/IaEYjl3SRspic.twitter.com/07wPqQkQV5
यह हादसा इतना भयानक था कि मौके पर ही चीख-पुकार मच गई। इस दर्दनाक दुर्घटना में दूल्हे की मां, उसकी सगी बहन, दो भाभियां और पड़ोस की एक महिला समेत कुल 6 महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई। 3 लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जो जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। घटना के बाद पूरे मुरावन नगला गांव में सन्नाटा पसरा है और शादी वाले घर में कोहराम मचा हुआ है।
खुशियों के घर में कैसे पसरा मातम? (घटना की पृष्ठभूमि)
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बदायूं जिले के मुरावन नगला गांव में रहने वाले किसान डालचंद्र के परिवार में इन दिनों खुशियों का माहौल था। डालचंद्र के 6 बच्चे हैं, जिनमें से 5 की शादी पहले ही हो चुकी है। घर में सबसे छोटे बेटे कुंवर पाल की 29 जून को शादी होने वाली थी। शादी की तैयारियां अपने अंतिम चरण में थीं और घर में रिश्तेदारों का आना-जाना शुरू हो चुका था।
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हिंदू शादियों में 'भात' मांगने की एक बहुत पुरानी और महत्वपूर्ण परंपरा होती है, जिसमें लड़के या लड़की की मां अपने मायके जाकर अपने भाइयों से शादी में शामिल होने और शगुन (भात) देने का न्योता देती है। इसी परंपरा को निभाने के लिए बुधवार दोपहर डालचंद्र की पत्नी राजकुमारी (50 वर्ष) अपने मायके यानी गठौना गांव जाने के लिए निकली थीं।
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उनके साथ घर और पड़ोस की अन्य महिलाएं भी थीं। परिवार ने गांव के ही रहने वाले सन्नी का ई-रिक्शा बुक किया था। सन्नी के ई-रिक्शे में चालक सहित कुल 9 लोग (8 महिलाएं और 1 चालक) सवार हुए। घर से निकलते वक्त महिलाएं बेहद खुश थीं। दूल्हे के चचेरे भाई नन्हे के मुताबिक, महिलाएं अपने साथ ढोलक-मजीरा लेकर निकली थीं और पूरे रास्ते मंगल गीत गाते हुए जाने की योजना थी। लेकिन किसी को क्या पता था कि यह उनका आखिरी सफर होने वाला है।
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हाईवे पर मौत की रेस: कैसे हुआ यह खौफनाक एक्सीडेंट?
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यह भीषण दुर्घटना बरेली-मथुरा (बरेली-आगरा) हाईवे पर हुई। वर्तमान में इस हाईवे के चौड़ीकरण और निर्माण का काम चल रहा है, जिसके कारण सड़क की केवल एक ही लेन चालू है। इसी सिंगल लेन पर सारा ट्रैफिक चल रहा था।
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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कासगंज की तरफ से दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियां उझानी की मंडी समिति में मक्का बेचकर लौट रही थीं। मंडी से वापस जाते समय दोनों ट्रैक्टर चालकों के बीच हाईवे पर ही आगे निकलने की होड़ मच गई। दोनों चालक अपने भारी-भरकम वाहनों को हाईवे पर अंधाधुंध और लापरवाही से दौड़ाने लगे और रेस लगाने लगे।
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उसी समय सन्नी का ई-रिक्शा भी उसी लेन में अपनी सामान्य गति से आगे जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि रेस लगा रहे पहले ट्रैक्टर से ई-रिक्शा किसी तरह बाल-बाल बच गया, लेकिन पीछे से आ रहे दूसरे तेज रफ्तार ट्रैक्टर के चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया। दूसरे ट्रैक्टर ने ई-रिक्शा को जोरदार टक्कर मारी और उसे पूरी तरह से रौंदते हुए आगे निकल गया।
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टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ई-रिक्शा के परखच्चे उड़ गए। रिक्शे में सवार सभी महिलाएं झटके से बाहर गिर गईं और ट्रैक्टर के भारी पहियों के नीचे आ गईं। मंजर इतना खौफनाक था कि करीब 10 फीट के दायरे में खून से लथपथ महिलाओं के शव सड़क पर बिखर गए। चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार और दर्दनाक कराहें सुनाई दे रही थीं।
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आवाज़ सुनकर हाईवे से गुजर रहे अन्य वाहन चालक और आसपास के ग्रामीण तुरंत दौड़कर मौके पर पहुंचे। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी और एंबुलेंस बुलाई।
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हादसे का शिकार हुए लोगों की पहचान
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इस रूह कंपा देने वाले हादसे में 5 महिलाओं ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था, जबकि एक महिला की मौत मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान हुई। जान गंवाने वाली सभी महिलाएं एक ही परिवार और गांव की थीं।
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मृतकों का विवरण इस प्रकार है:
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राजकुमारी (उम्र 50 वर्ष): होने वाले दूल्हे की मां।
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नारायणी (उम्र 30 वर्ष): दूल्हे की सगी बहन।
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रेवती (उम्र 80 वर्ष): राजकुमारी की जेठानी (दूल्हे की ताई)।
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गंगाश्री (उम्र 30 वर्ष): दूल्हे की भाभी।
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सरला (उम्र 32 वर्ष): दूल्हे की दूसरी भाभी।
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प्रेमावती (उम्र 32 वर्ष): गांव की ही रहने वाली पड़ोसी महिला।
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इस हादसे में ई-रिक्शा चालक सन्नी और परिवार के दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। इनमें से 2 की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
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प्रशासन की कार्रवाई और मंत्रियों का बयान
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हादसे के बाद दोनों ट्रैक्टर चालक अपने वाहन भगाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन गुस्साए लोगों और मुस्तैद पुलिस ने दोनों चालकों को कुछ ही दूरी पर ट्रैक्टरों के साथ दबोच लिया।
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हादसे की गंभीरता को देखते हुए बदायूं के जिलाधिकारी (DM) अवनीश राय और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए। जिलाधिकारी ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया और घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिए। डीएम अवनीश राय ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि, "हादसे में 6 लोगों की मौत हुई है और 3 घायल मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं। आरोपी चालकों को पकड़ लिया गया है और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।"
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इस दर्दनाक घटना की गूंज लखनऊ तक पहुंची। जिले के प्रभारी मंत्री अरुण सक्सेना ने भी घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने स्थानीय अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना और मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। मंत्री अरुण सक्सेना ने कहा, "यह बहुत ही दुखद घटना है। हमारी पूरी सहानुभूति शोक संतप्त परिवार के साथ है। राज्य सरकार की ओर से घायलों का अच्छे से अच्छा इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है और मृतकों के परिजनों को हर संभव सरकारी आर्थिक मदद दिलाने की पूरी कोशिश की जाएगी।"
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सड़क सुरक्षा पर उठते गंभीर सवाल
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बदायूं का यह हादसा कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के हाईवे पर भारी कृषि वाहनों (जैसे ट्रैक्टर-ट्रॉली) की बेलगाम रफ्तार और यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक और खौफनाक उदाहरण है। अक्सर देखा गया है कि ट्रैक्टर चालक हाईवे पर स्टंट करने या रेस लगाने से बाज नहीं आते हैं। निर्माणधीन सड़कों पर जहां वैसे ही जगह कम होती है, वहां ऐसी लापरवाही सीधे तौर पर हत्या के समान है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में ई-रिक्शा अब परिवहन का मुख्य साधन बन चुके हैं, लेकिन भारी वाहनों के सामने इनकी कोई सुरक्षा नहीं होती। इस घटना ने एक बार फिर हाईवे पर गश्त, ओवर-स्पीडिंग पर लगाम और निर्माणधीन क्षेत्रों में ट्रैफिक प्रबंधन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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आज मुरावन नगला गांव में जहां शहनाई गूंजनी थी, वहां अब चीखें और रुदन गूंज रहा है। रेस लगाने की एक छोटी सी बेवकूफी ने एक परिवार की तीन पीढ़ियों की महिलाओं को लील लिया। इस घटना से सबक लेते हुए प्रशासन को अब हाईवे पर बेलगाम दौड़ते वाहनों के खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
Sabse pehle comment karne wale banein.