नई दिल्ली, 19 मई 2026: देश में आवारा कुत्तों के आतंक और उनके काटने (Dog Bites) से बढ़ती मौतों के गंभीर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपना आखिरी और बेहद कड़ा फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बेहद खतरनाक, हिंसक या रेबीज से संक्रमित हो चुके आवारा कुत्तों को कानून के तहत इंजेक्शन लगाकर (Euthanasia) मारा जा सकता है। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि नागरिकों की जान की हिफाजत सर्वोपरि है और संविधान के तहत गरिमा के साथ जीने के अधिकार (Article 21) में आवारा कुत्तों के भय और खतरे से मुक्त होकर रहने का अधिकार भी शामिल है।READ ALSO:-सर्राफा बाजार में भूचाल: सोना ₹1168 की छलांग के साथ ₹1.59 लाख पर पहुंचा; चांदी भी ₹2181 उछलकर ₹2.70 लाख किलो हुई, इस साल ₹40 हजार की भारी तेजी
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जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने इस मामले पर आखिरी सुनवाई करते हुए सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश के खिलाफ दाखिल सभी पुनर्विचार याचिकाओं और अपीलों को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने साफ किया कि आवारा कुत्तों के पुनर्वास, टीकाकरण और नसबंदी को लेकर नवंबर 2025 में जारी किए गए सख्त निर्देश ही पूरी तरह लागू रहेंगे। यदि कोई भी प्रशासनिक अधिकारी या नगर निगम इन निर्देशों का पालन करने में कोताही बरतता है, तो उसके खिलाफ सीधे अदालत की अवमानना (Contempt of Court) का मुकदमा चलाया जाएगा।
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नवंबर 2025 के आदेश पर ही टिकेगा पूरा एक्शन प्लान

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सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि नवंबर 2025 में कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों और नेशनल हाईवे जैसे संवेदनशील पब्लिक प्लेस से आवारा कुत्तों को पूरी तरह हटाने के निर्देश दिए थे। अदालत ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि आवारा कुत्तों को जिस जगह से पकड़ा जाए, नसबंदी और टीकाकरण के बाद उन्हें दोबारा उसी सार्वजनिक स्थान पर न छोड़ा जाए, बल्कि उन्हें उचित शेल्टर होम्स (Shelter Homes) में रखा जाए। इसके साथ ही, सड़कों पर आवारा कुत्तों को खुलेआम खाना खिलाने (Feeding) पर लगाया गया प्रतिबंध भी जारी रहेगा। डॉग लवर्स और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) ने इसी व्यवस्था को रद्द कराने के लिए याचिकाएं लगाई थीं, जिन्हें अब कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के आदेश की 8 अहम बातें

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अदालत ने देश भर के राज्यों और स्थानीय निकायों को इस समस्या से प्रभावी रूप से निपटने के लिए निम्नलिखित 8 सूत्रीय गाइडलाइंस जारी की हैं:
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    पशु कल्याण बोर्ड के नियम मजबूत हों: सभी राज्य सरकारें पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) के नियमों को जमीनी स्तर पर मजबूत करें और उन्हें कड़ाई से लागू कराएं।
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    हर जिले में ABC सेंटर: देश के प्रत्येक जिले में पूरी तरह से कार्यशील और सुसज्जित एक 'एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर' (ABC Center) स्थापित किया जाना अनिवार्य होगा।
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    जनसंख्या के हिसाब से संख्या वृद्धि: जिन क्षेत्रों या शहरों में आवारा कुत्तों की आबादी अत्यधिक है, वहां स्थानीय प्रशासन जरूरत के अनुसार अतिरिक्त ABC सेंटरों की संख्या बढ़ाए।
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    अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी नियम: जनता की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों पर भी ये नियम तय समय सीमा के भीतर लागू किए जाएं।
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    एंटी-रेबीज दवाओं का स्टॉक: देश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सरकारी अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन और लाइफ-सेविंग दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
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    नेशनल हाईवे पर NHAI की जिम्मेदारी: नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को आदेश दिया गया है कि वे हाईवे पर घूमने वाले आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए पुराने ट्रांसपोर्ट वाहनों का इस्तेमाल कर उन्हें वहां से हटाएं और इसकी नियमित मॉनिटरिंग करें।
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    संक्रमित कुत्तों को दया मृत्यु (Euthanasia): जनता के जीवन को सुरक्षित रखने के लिए बेहद आक्रामक, खतरनाक और रेबीज से ग्रसित हो चुके कुत्तों को कानून के दायरे में रहकर 'दया मृत्यु' देने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
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    अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा: इस आदेश को जमीनी स्तर पर लागू करने वाले नगर निगम कर्मियों और सरकारी अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा दी जाएगी। नियमों के तहत काम करने वाले अफसरों के खिलाफ सामान्य परिस्थितियों में FIR या सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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कोर्ट ने जताई चिंता: 3 राज्यों में डॉग बाइट की भयावह घटनाएं गिनाईं

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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आई डॉग बाइट की डरावनी रिपोर्टों का हवाला दिया, जो यह साबित करती हैं कि यह समस्या अब जानलेवा हो चुकी है:
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    राजस्थान (श्री गंगानगर): यहां महज एक महीने के भीतर कुत्तों के काटने की रिकॉर्ड 1084 घटनाएं सामने आईं, जिनमें कई मासूम बच्चों के चेहरों पर गहरे और गंभीर घाव हो गए।
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    तमिलनाडु: राज्य में साल के शुरुआती चार महीनों के भीतर ही कुत्तों के काटने के लगभग 2 लाख मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
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    गुजरात (सूरत): सूरत के दौरे पर आए एक जर्मन सैलानी को भी आवारा कुत्ते ने अपना शिकार बना लिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि प्रभावित हुई।
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ऐतिहासिक टाइमलाइन: पिछली 8 सुनवाइयों में कब क्या हुआ?

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इस ऐतिहासिक फैसले तक पहुंचने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने पिछले कई महीनों में लंबी बहस और कई अहम टिप्पणियां की हैं। आइए इसे सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं:
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    29 जनवरी 2026: जस्टिस विक्रम नाथ की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा था कि वे निजी पक्षों की दलीलें पूरी कराकर जल्द से जल्द सुनवाई खत्म करना चाहते हैं और राज्यों को अपना पक्ष रखने के लिए आखिरी मौका दिया गया था।
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    9 जनवरी 2026: बॉलीवुड अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के वकील ने दलील दी कि सभी कुत्ते आक्रामक नहीं होते और दिल्ली AIIMS के 'गोल्डी' नाम के कुत्ते का उदाहरण दिया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताते हुए वकील को फटकार लगाई और कहा कि कोर्ट में कुत्तों को 'महान' साबित करने की कोशिश न करें।
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    8 जनवरी 2026: जब एक डॉग लवर वकील ने कोर्ट की बात से असहमति जताई, तो जस्टिस नाथ ने टिप्पणी की, "कुत्ते इंसानों के डर को भांप लेते हैं और इसीलिए काटते हैं। अपना सिर मत हिलाइए, यह बात मैं अपने व्यक्तिगत अनुभव से कह रहा हूं।"
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    7 नवंबर 2025: कोर्ट ने ऐतिहासिक निर्देश जारी कर शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों से कुत्तों को हटाने तथा उन्हें वापस उसी जगह न छोड़ने का आदेश दिया था।
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    3 नवंबर 2025: राज्यों के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए कोर्ट ने मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रूप से तलब किया। जब बिहार के मुख्य सचिव ने चुनाव ड्यूटी का हवाला देकर छूट मांगी, तो कोर्ट ने साफ इंकार करते हुए कहा कि चुनाव में आपकी कोई विशेष भूमिका नहीं है, आपको पेश होना ही होगा।
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    27 अक्टूबर 2025: कोर्ट ने राज्य सरकारों को फटकार लगाते हुए कहा था कि आवारा कुत्तों के काटने की इन लगातार बढ़ती घटनाओं से वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को गहरा नुकसान पहुंच रहा है।
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    22 अगस्त 2025: इस सुनवाई में कोर्ट ने अपने पुराने आदेश में आंशिक बदलाव करते हुए नसबंदी के बाद उसी इलाके में छोड़ने और निर्दिष्ट 'फीडिंग जोन' बनाने की बात कही थी, जिसे बाद के हालातों को देखते हुए और सख्त कर दिया गया।
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    11–14 अगस्त 2025: यह वह दौर था जब सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार इस गंभीर जनहित के मामले को पूरी प्राथमिकता पर लेते हुए आवारा कुत्तों को सड़कों से उठाकर शेल्टर होम्स में स्थानांतरित करने का ऐतिहासिक विचार सामने रखा था।
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