भारत में डिजिटल क्रांति ने हमारे लेन-देन के तरीके को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। आज सब्जी वाले से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक, हर जगह स्मार्टफोन से एक क्लिक पर पेमेंट हो जाता है। लेकिन इस सुविधा के साथ-साथ साइबर ठगी और फ्रॉड के मामलों में भी खतरनाक रूप से इजाफा हुआ है। इसी बढ़ते खतरे पर लगाम कसने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के भुगतान तंत्र (Payment Ecosystem) में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। 1 अप्रैल 2026 से देश में 'RBI नए डिजिटल पेमेंट नियम 2026' लागू होने जा रहे हैं। इन नए नियमों के बाद केवल एक साधारण SMS OTP (One-Time Password) के सहारे ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करना संभव नहीं होगा।READ ALSO:-दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों को बड़ा झटका: NHAI ने बढ़ाई टोल दरें, 1 अप्रैल से जेब पर पड़ेगा भारी बोझ!
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RBI की इस नई गाइडलाइंस का सीधा असर देश के करोड़ों बैंक खाताधारकों, UPI इस्तेमाल करने वालों और क्रेडिट/डेबिट कार्ड यूजर्स पर पड़ेगा। इस फैसले के पीछे केंद्रीय बैंक का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों की गाढ़ी कमाई को साइबर अपराधियों से बचाना और भुगतान प्रणाली को 'सुविधाजनक' के साथ-साथ 'अभेद्य' बनाना है। इस विस्तृत लेख में हम आपको RBI नए डिजिटल पेमेंट नियम 2026 की हर बारीकी, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA), बायोमेट्रिक्स के उपयोग और ग्राहकों पर इसके प्रभाव के बारे में विस्तार से बताएंगे।
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ऑनलाइन पेमेंट में OTP का दौर खत्म: आखिर क्यों?
\r\n\r\nपिछले एक दशक से भारत में किसी भी ऑनलाइन लेनदेन को सुरक्षित करने के लिए SMS आधारित OTP को सबसे बड़ा हथियार माना जाता रहा है। आप कार्ड डिटेल डालते हैं, बैंक आपके मोबाइल पर 6 अंकों का कोड भेजता है, और पेमेंट पूरा हो जाता है। लेकिन जैसे-जैसे तकनीक उन्नत हुई, साइबर अपराधियों ने इस OTP सिस्टम की खामियां ढूंढ लीं।
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OTP सिस्टम के फेल होने के मुख्य कारण:
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- \r\n सिम स्वैपिंग (SIM Swapping): जालसाज फर्जी दस्तावेजों के जरिए आपके नंबर की डुप्लीकेट सिम निकलवा लेते हैं। ऐसे में बैंक द्वारा भेजा गया OTP आपके फोन पर न आकर सीधे ठग के फोन पर पहुंच जाता है।\r\n \r\n
- \r\n फिशिंग और मैलवेयर (Phishing & Malware): कई बार आपके फोन में अनजाने में ऐसे खतरनाक ऐप या लिंक डाउनलोड हो जाते हैं, जो आपके फोन के इनबॉक्स (SMS) को छुपकर पढ़ते हैं और OTP सीधे हैकर्स तक फॉरवर्ड कर देते हैं।\r\n \r\n
- \r\n नेटवर्क की समस्या: अक्सर ऐसा होता है कि आप पेमेंट कर रहे होते हैं और नेटवर्क इश्यू के कारण OTP समय पर नहीं आता, जिससे ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है। यह ग्राहकों के लिए बहुत निराशाजनक होता है।\r\n \r\n
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इन्हीं कमजोरियों को देखते हुए, आरबीआई ने महसूस किया कि केवल OTP पर निर्भर रहना अब सुरक्षित नहीं है। इसलिए, RBI नए डिजिटल पेमेंट नियम 2026 के तहत अब भुगतान सुरक्षा को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
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क्या हैं 'RBI नए डिजिटल पेमेंट नियम 2026'?
\r\n\r\nआरबीआई द्वारा जारी 'Authentication Mechanisms for Digital Payment Transactions Directions, 2025' के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से भारत में होने वाले सभी घरेलू डिजिटल पेमेंट्स के लिए मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) या कम से कम टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य कर दिया गया है।
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इस नए नियम की सबसे बड़ी शर्त यह है कि ऑथेंटिकेशन (पहचान सत्यापन) के लिए उपयोग किए जाने वाले दो कारकों (Factors) में से कम से कम एक कारक 'डायनेमिक' (Dynamic) होना चाहिए।
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ऑथेंटिकेशन के तीन मुख्य स्तंभ (The 3 Factors of Authentication)
\r\n\r\nसुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की डिजिटल पहचान प्रमाणित करने के तीन मुख्य तरीके होते हैं। RBI ने बैंकों को निर्देश दिया है कि उन्हें हर ट्रांजैक्शन के लिए इनमें से किन्हीं दो अलग-अलग कारकों का इस्तेमाल करना होगा:
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- \r\n कुछ जो आपको पता हो (Knowledge Factor): जैसे आपका पासवर्ड, UPI पिन, या कोई सीक्रेट पासफ्रेज।\r\n \r\n
- \r\n कुछ जो आपके पास हो (Possession Factor): जैसे आपका रजिस्टर्ड स्मार्टफोन, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, या हार्डवेयर टोकन।\r\n \r\n
- \r\n कुछ जो आप खुद हों (Inherence Factor): जैसे आपका फिंगरप्रिंट (अंगूठे का निशान), फेस आईडी (चेहरे की पहचान), या आईरिस स्कैन।\r\n \r\n
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पहले हम केवल पिन (Knowledge) और OTP (Possession) का इस्तेमाल करते थे। लेकिन अब RBI नए डिजिटल पेमेंट नियम 2026 के तहत बायोमेट्रिक्स (Inherence) और इन-ऐप अप्रूवल को ज्यादा तरजीह दी जाएगी।
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'डायनेमिक' (Dynamic) फैक्टर का क्या मतलब है?
\r\n\r\nडायनेमिक का मतलब है जो हर बार बदल जाए। आपका बैंक अकाउंट पासवर्ड या UPI पिन 'स्टेटिक' (स्थिर) होता है, वह रोज नहीं बदलता। अगर किसी ने उसे चुरा लिया, तो वह बार-बार उसका इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन डायनेमिक फैक्टर हर एक ट्रांजैक्शन के लिए बिल्कुल नया और विशिष्ट (Unique) होता है। जैसे कि आपके फोन पर आने वाला लाइव फिंगरप्रिंट स्कैन या एक ऐसा टोकन जो केवल उसी विशेष पेमेंट के लिए कुछ सेकंड तक ही काम करेगा।
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OTP के अलावा अब क्या होंगे नए और सुरक्षित विकल्प?
\r\n\r\nRBI नए डिजिटल पेमेंट नियम 2026 के लागू होने के बाद, बैंकों, पेमेंट गेटवे और फिनटेक कंपनियों (जैसे Paytm, PhonePe, Google Pay) को ग्राहकों को OTP के अलावा अधिक सुरक्षित और आधुनिक विकल्प देने होंगे। आइए जानते हैं कि भविष्य में आपके पेमेंट करने का तरीका कैसा दिखने वाला है:
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1. बायोमेट्रिक्स (Biometric Authentication)
\r\n\r\nयह सबसे सुरक्षित और तेज तरीका है। जब आप कोई बड़ा ऑनलाइन पेमेंट करेंगे, तो स्क्रीन पर OTP डालने के बजाय आपका बैंकिंग ऐप आपसे फिंगरप्रिंट स्कैन करने या फोन के कैमरे के जरिए फेस रिकग्निशन (Face ID) करने को कहेगा। चूंकि आपकी उंगलियों के निशान और चेहरे की बनावट को कोई हैकर चुरा नहीं सकता, इसलिए सिम स्वैपिंग या पासवर्ड चोरी होने के बावजूद आपका पैसा सुरक्षित रहेगा।
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2. इन-ऐप नोटिफिकेशन (In-App Push Approval)
\r\n\r\nयह सुविधा पहले से ही कुछ विदेशी बैंकों और हाई-एंड क्रेडिट कार्ड्स में इस्तेमाल हो रही है। इसमें जब आप किसी वेबसाइट पर अपने कार्ड से पेमेंट करते हैं, तो आपके मोबाइल पर SMS नहीं आता, बल्कि आपके बैंक के आधिकारिक मोबाइल ऐप पर एक पॉप-अप या नोटिफिकेशन आता है। आपको उस ऐप को अपने फिंगरप्रिंट या पिन से खोलकर 'Approve' (स्वीकृत) या 'Deny' (अस्वीकृत) पर क्लिक करना होता है। यह हैकर्स के लिए भेदना लगभग असंभव है क्योंकि यह सीधे बैंक के सुरक्षित सर्वर से जुड़ा होता है।
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3. डिवाइस बाइंडिंग (Device Binding)
\r\n\r\nयह एक ऐसी तकनीक है जिसमें बैंक आपके खाते को आपके स्मार्टफोन के विशिष्ट हार्डवेयर (IMEI नंबर और डिवाइस ID) से बांध (Bind) देता है। इसका मतलब है कि अगर कोई हैकर आपका पासवर्ड और OTP चुरा भी ले, तो भी वह अपने फोन या कंप्यूटर से आपका खाता एक्सेस नहीं कर पाएगा, क्योंकि सिस्टम पहचान लेगा कि यह वह 'रजिस्टर्ड डिवाइस' नहीं है जिससे पेमेंट होना चाहिए।
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4. हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर टोकन (Tokens)
\r\n\r\nखासकर कॉर्पोरेट ग्राहकों या बड़े बिजनेस ट्रांजैक्शन के लिए, बैंक एक छोटा सा उपकरण (Hardware Token) दे सकते हैं जो हर 30 सेकंड में एक नया कोड जनरेट करता है। यह इंटरनेट से जुड़ा नहीं होता, इसलिए इसे हैक नहीं किया जा सकता।
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रिस्क-बेस्ड ऑथेंटिकेशन (Risk-Based Authentication): एआई (AI) करेगा आपकी निगरानी
\r\n\r\nRBI नए डिजिटल पेमेंट नियम 2026 का एक और सबसे क्रांतिकारी और उन्नत पहलू है 'रिस्क-बेस्ड ऑथेंटिकेशन' (RBA)। आरबीआई ने बैंकों से कहा है कि वे हर ट्रांजैक्शन को एक ही चश्मे से न देखें। इसके बजाय, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का उपयोग करके ग्राहकों के खर्च करने के पैटर्न का विश्लेषण करें।
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यह कैसे काम करेगा?
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- \r\n लोकेशन ट्रैकिंग (Location Tracking): मान लीजिए आप हमेशा दिल्ली से पेमेंट करते हैं, लेकिन अचानक रात के 2 बजे रूस या चीन के किसी सर्वर से आपके कार्ड से 50,000 रुपये का ट्रांजैक्शन इनिशिएट होता है। बैंक का AI सिस्टम तुरंत इसे 'हाई-रिस्क' (संदिग्ध) मान लेगा।\r\n \r\n
- \r\n अतिरिक्त सुरक्षा जांच (Step-up Authentication): ऐसी संदिग्ध स्थिति में, बैंक का सिस्टम साधारण पिन या OTP से संतुष्ट नहीं होगा। वह उस पेमेंट को रोकने के लिए तुरंत 'अतिरिक्त सुरक्षा जांच' (जैसे लाइव वीडियो वेरिफिकेशन या फेस आईडी) की मांग करेगा।\r\n \r\n
- \r\n सहूलियत (Convenience): वहीं दूसरी ओर, अगर आप अपने ही घर के वाई-फाई से, अपने उसी पुराने फोन से, रोजमर्रा का किराने का सामान (Low-risk transaction) खरीद रहे हैं, तो बैंक आपसे बार-बार फिंगरप्रिंट या जटिल पासवर्ड नहीं मांगेगा, ताकि आपका समय बचे।\r\n \r\n
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यह नियम सुरक्षा और सुविधा के बीच एक बेहतरीन संतुलन (Balance) बनाता है।
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ग्राहकों के लिए सबसे बड़ी राहत: धोखाधड़ी होने पर बैंक की होगी जिम्मेदारी
\r\n\r\nडिजिटल फ्रॉड के मामलों में सबसे बड़ी परेशानी यह होती है कि जब ग्राहक का पैसा कट जाता है, तो बैंक अक्सर यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि "आपने अपना OTP शेयर किया होगा, इसमें हमारी कोई गलती नहीं है।"
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लेकिन, RBI नए डिजिटल पेमेंट नियम 2026 ने ग्राहकों को एक बहुत बड़ा सुरक्षा कवच (Liability Shift) प्रदान किया है। नए नियमों के अनुसार, यदि कोई बैंक या भुगतान प्रदाता कंपनी 1 अप्रैल 2026 तक इन नए 'मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन' और 'डायनेमिक सुरक्षा मानकों' को पूरी तरह से लागू करने में विफल रहती है, और इस वजह से किसी ग्राहक के खाते से फर्जीवाड़ा (Fraud) हो जाता है, तो उस नुकसान की 100% वित्तीय जिम्मेदारी (Liability) संबंधित बैंक या संस्था की होगी। इसका मतलब है कि बैंकों को अब अपनी साइबर सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए भारी निवेश करना ही होगा, अन्यथा उन्हें ग्राहकों को अपनी जेब से मुआवजा देना पड़ेगा। यह नियम बैंकों को जवाबदेह बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
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क्या हर छोटे पेमेंट के लिए देनी होगी इतनी बड़ी परीक्षा? (नियमों में छूट)
\r\n\r\nजब से RBI नए डिजिटल पेमेंट नियम 2026 की खबर सामने आई है, कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि "क्या मुझे चाय की दुकान पर 10 रुपये का पेमेंट करने के लिए भी फिंगरप्रिंट और इन-ऐप अप्रूवल देना होगा?"
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आरबीआई ने आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट किया है कि छोटे और रोजमर्रा के भुगतानों के लिए प्रक्रिया को धीमा या जटिल नहीं किया जाएगा।
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निम्नलिखित मामलों में नियमों में छूट (Exceptions) दी गई है:
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- \r\n छोटे मूल्य के ऑफलाइन पेमेंट: 500 रुपये तक के छोटे ऑफलाइन डिजिटल पेमेंट्स (जैसे UPI Lite या NCMC कार्ड) के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य नहीं होगा। यह बिना पिन के सिर्फ 'टैप एंड पे' (Tap & Pay) के जरिए हो सकेगा।\r\n \r\n
- \r\n रिकरिंग पेमेंट (Recurring Mandates): जैसे आपके Netflix, Amazon Prime का सब्सक्रिप्शन, या आपकी SIP और इंश्योरेंस की EMI. अगर आपने एक बार ई-मैंडेट (e-Mandate) सेट कर दिया है और उसकी लिमिट (जैसे 15,000 रुपये तक) तय है, तो हर महीने कटने वाले पैसे के लिए बार-बार ऑथेंटिकेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, अगर 6 महीने तक कोई लेनदेन नहीं होता है, तो बैंक को दोबारा आपका KYC वेरिफिकेशन करना पड़ सकता है।\r\n \r\n
- \r\n कम जोखिम वाले मर्चेंट: कुछ जाने-माने और सुरक्षित मर्चेंट्स पर छोटे पेमेंट्स के लिए बैंक अपने रिस्क-इंजन के आधार पर रियायत दे सकते हैं।\r\n \r\n
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नए नियम लागू होने की महत्वपूर्ण तारीखें (Timelines)
\r\n\r\nआरबीआई ने बैंकिंग और फिनटेक उद्योग को अपनी प्रणालियों को अपग्रेड (Upgrade) करने के लिए पर्याप्त समय दिया है। नए सुरक्षा मानकों को चरणों में लागू किया जाएगा:
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- \r\n 1 अप्रैल 2026: इस तारीख से भारत के अंदर होने वाले सभी 'घरेलू' डिजिटल पेमेंट्स (Domestic Digital Transactions) - जैसे UPI, नेट बैंकिंग, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, और मोबाइल वॉलेट के लिए नया MFA (मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) ढांचा पूरी तरह से लागू हो जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n 1 अक्टूबर 2026: अंतरराष्ट्रीय और क्रॉस-बॉर्डर लेनदेन (Cross-Border Transactions) के लिए नियम और भी सख्त होंगे। विशेष रूप से कार्ड-नॉट-प्रेजेंट (CNP) यानी बिना कार्ड स्वैप किए विदेशी वेबसाइटों पर होने वाले भुगतानों के लिए कार्ड जारीकर्ताओं को 1 अक्टूबर 2026 तक अतिरिक्त वैलिडेशन मैकेनिज्म तैयार करना होगा।\r\n \r\n
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आम जनता (उपभोक्ताओं) पर क्या होगा इसका सीधा असर?
\r\n\r\nRBI नए डिजिटल पेमेंट नियम 2026 का आम आदमी के दैनिक जीवन पर सकारात्मक और नकारात्मक (सुविधा के नजरिए से) दोनों तरह का असर पड़ेगा।
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फायदे (Pros):
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- \r\n पैसा रहेगा 100% सुरक्षित: सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपके बैंक खाते में सेंध लगाना अब हैकर्स के लिए नामुमकिन सा हो जाएगा। आपकी मेहनत की कमाई महफूज रहेगी।\r\n \r\n
- \r\n OTP के झंझट से मुक्ति: नेटवर्क न होने पर OTP न आने की जो समस्या होती है, वह इन-ऐप नोटिफिकेशन या फिंगरप्रिंट स्कैन के जरिए खत्म हो जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n बैंकों की जवाबदेही: फ्रॉड होने पर बैंक आसानी से अपना पल्ला नहीं झाड़ पाएंगे।\r\n \r\n
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चुनौतियां (Cons):
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- \r\n आदत बदलने की जरूरत: शुरुआत में लोगों को थोड़ा अजीब लग सकता है। अब पेमेंट आंख बंद करके नहीं होगा, बल्कि इसके लिए फोन का कैमरा या फिंगरप्रिंट सेंसर काम में लेना होगा।\r\n \r\n
- \r\n बुजुर्गों के लिए थोड़ी परेशानी: वे बुजुर्ग जो स्मार्टफोन के आधुनिक फीचर्स (जैसे बायोमेट्रिक या इन-ऐप अप्रूवल) के इतने अभ्यस्त नहीं हैं, उन्हें शुरुआत में इन नए नियमों के साथ तालमेल बिठाने में थोड़ी तकनीकी सहायता की जरूरत पड़ सकती है।\r\n \r\n
- \r\n प्रक्रिया में लगने वाला समय: कुछ विशेष हाई-रिस्क पेमेंट्स के दौरान ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया कुछ सेकंड लंबी हो सकती है।\r\n \r\n
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ग्राहकों को अभी से क्या तैयारी करनी चाहिए?
\r\n\r\nयद्यपि यह नियम 2026 में लागू होगा, लेकिन ग्राहकों को अभी से कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना शुरू कर देना चाहिए:
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- \r\n अपने स्मार्टफोन के 'बायोमेट्रिक' (फिंगरप्रिंट/फेस लॉक) फीचर को हमेशा एक्टिवेट और अपडेट रखें।\r\n \r\n
- \r\n अपने बैंक के आधिकारिक मोबाइल ऐप को ही इस्तेमाल करें और उसे समय-समय पर अपडेट करते रहें।\r\n \r\n
- \r\n किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना डिवाइस (फोन) शेयर न करें, क्योंकि भविष्य में आपका डिवाइस ही आपकी डिजिटल चाबी (Key) बनने वाला है।\r\n \r\n
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बदलते वक्त और तकनीक के साथ अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं। ₹14 लाख करोड़ से अधिक के मासिक डिजिटल लेनदेन वाले देश में, पुरानी पड़ चुकी SMS-OTP व्यवस्था के सहारे पूरी अर्थव्यवस्था को जोखिम में नहीं डाला जा सकता। RBI नए डिजिटल पेमेंट नियम 2026 भारतीय बैंकिंग इतिहास में सुरक्षा के नजरिए से उठाया गया एक बहुत ही दूरदर्शी और क्रांतिकारी कदम है। 1 अप्रैल 2026 से जब यह 'मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन' (MFA) और 'रिस्क-बेस्ड ऑथेंटिकेशन' का नया ढांचा लागू होगा, तो यह न केवल ठगों के मंसूबों पर पानी फेरेगा, बल्कि भारतीय डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम (UPI, कार्ड्स, वॉलेट्स) को वैश्विक स्तर पर सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद प्रणाली के रूप में स्थापित करेगा। भले ही आम ग्राहकों को पेमेंट करते समय कुछ सेकंड ज्यादा लगें, लेकिन जब बात जीवन भर की गाढ़ी कमाई की हो, तो सुरक्षा से बढ़कर कोई सुविधा नहीं हो सकती।
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सारांश (Summary): भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बढ़ते साइबर अपराधों और सिम-स्वैपिंग फ्रॉड को रोकने के लिए 'डिजिटल पेमेंट ऑथेंटिकेशन' के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। 1 अप्रैल 2026 से केवल SMS OTP के जरिए ऑनलाइन पेमेंट नहीं हो सकेगा। इसके बजाय मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) अनिवार्य होगा, जिसमें बायोमेट्रिक्स (फिंगरप्रिंट/फेस आईडी) और इन-ऐप अप्रूवल जैसे डायनेमिक कारकों का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, रिस्क-बेस्ड ऑथेंटिकेशन के तहत बैंक संदिग्ध लेनदेनों की निगरानी करेंगे। यदि बैंक इन सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करते और ग्राहक के साथ फ्रॉड होता है, तो पूरी जिम्मेदारी बैंक की होगी। 500 रुपये तक के छोटे ऑफलाइन भुगतानों को इस नियम से छूट मिलेगी, जबकि अंतरराष्ट्रीय लेनदेनों पर 1 अक्टूबर 2026 से कड़े नियम लागू होंगे।
Sabse pehle comment karne wale banein.