नई दिल्ली (पॉलिटिकल एंड नेशनल अफेयर्स डेस्क): राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पिछले एक महीने से चल रहा 'नीट (NEET) संग्राम' अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) और देश भर के लाखों छात्रों के भारी दबाव के आगे झुकते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।READ ALSO:-छात्रों के आगे झुकी सरकार: CJP की सभी मांगें मंजूर, छात्रों का आंदोलन समाप्त
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 छात्रों के आगे झुकी सरकार: CJP की सभी मांगें मंजूर, छात्रों का आंदोलन समाप्त

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जैसे ही यह खबर बाहर आई, सत्ता के गलियारों में सन्नाटा पसर गया, लेकिन विपक्ष के खेमे में जश्न और उत्साह की लहर दौड़ गई। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने इस अवसर को हाथ से जाने नहीं दिया। उन्होंने तुरंत एक सख्त और सधा हुआ बयान जारी करते हुए न केवल छात्रों की पीठ थपथपाई, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के खिलाफ एक नया राजनीतिक मोर्चा भी खोल दिया।
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आइए विस्तार से डिकोड करते हैं राहुल गांधी के उस बयान को, जिसने साबित कर दिया है कि विपक्ष अब किसी भी मुद्दे पर बैकफुट पर खेलने को तैयार नहीं है।
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"शाबाश छात्रों! मुझे आप पर गर्व है": राहुल गांधी का युवाओं को संदेश

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राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को सिस्टम की नाकामी की हार और सड़क पर संघर्ष कर रहे युवाओं की जीत बताया। अपने आधिकारिक बयान में राहुल ने देश भर के छात्रों की जमकर तारीफ की, जिन्होंने पुलिस की लाठियां, आंसू गैस और मुकदमों की परवाह किए बिना अपना आंदोलन जारी रखा।
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राहुल ने कहा:

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"धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारे एजुकेशन सिस्टम (Education System) को फिर से संवारने और शिक्षा माफियाओं के खात्मे की दिशा में उठाया गया पहला और बहुत बड़ा कदम है। शाबाश देश भर के छात्रों, मुझे आप सभी पर गर्व है। सड़कों पर आकर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डटकर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई।"
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राहुल गांधी का यह बयान स्पष्ट करता है कि कांग्रेस पार्टी इस छात्र आंदोलन (Student Movement) को केवल एक परीक्षा के विवाद तक सीमित नहीं देख रही है, बल्कि इसे 'संविधान और लोकतंत्र बचाने' की उस बड़ी लड़ाई का हिस्सा मान रही है, जिसका नैरेटिव उन्होंने हालिया लोकसभा चुनावों में सेट किया था।पिक्चर अभी बाकी है: राहुल गांधी ने रखीं 2 नई और कड़ी मांगें
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शिक्षा मंत्री का इस्तीफा भले ही हो गया हो, लेकिन राहुल गांधी ने सरकार को चैन की सांस नहीं लेने दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय की लड़ाई अभी अधूरी है। राहुल ने सरकार के सामने दो नई और बेहद आक्रामक मांगें (Demands) रख दी हैं:
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    प्रधानमंत्री मांगें माफी (PM Must Apologize): राहुल गांधी ने कहा कि नीट पेपर लीक कोई छोटी घटना नहीं थी, बल्कि यह 24 लाख छात्रों और उनके परिवारों के सपनों की हत्या थी। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए और भारत के भविष्य (छात्रों) का सम्मान करते हुए सार्वजनिक रूप से देश से माफी मांगनी चाहिए।
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    दोषियों और पुलिस पर हो सख्त कार्रवाई: राहुल ने याद दिलाया कि जंतर-मंतर और बिहार में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया गया, आंसू गैस छोड़ी गई और पैलेट गन (Pellet Gun) का इस्तेमाल किया गया। राहुल की दूसरी मांग है कि जिन भी पुलिसकर्मियों या अधिकारियों ने छात्रों पर हिंसा की है, उनके खिलाफ तुरंत आपराधिक मुकदमे दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।
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"इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है— डरो मत!"

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राहुल गांधी ने इस छात्र आंदोलन की सफलता को एक 'टेम्पलेट' (Template) के रूप में पेश किया है। उन्होंने समाज के अन्य वर्गों से भी इसी तरह निडर होकर सरकार के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया है।
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उन्होंने अपने बयान में तीखे तेवर दिखाते हुए कहा:

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"ये जीत समाज के दूसरे वर्गों— किसानों, मजदूरों, दलितों, गरीबों और हर उस शख्स के लिए एक संदेश है, जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है। अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है। इस अहंकारी सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है। डरो मत!"
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'डरो मत' (Daro Mat) का यह नारा राहुल गांधी का सिग्नेचर कैंपेन रहा है, और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे ने इस नारे में एक नई जान फूंक दी है। यह संदेश सीधा है— अगर 18-20 साल के छात्र एक कैबिनेट मंत्री का इस्तीफा ले सकते हैं, तो पूरा देश एकजुट होकर इस सरकार को भी बदल सकता है।
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फ्लैशबैक: जब राहुल गांधी ने किया था PM आवास का घेराव

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राहुल गांधी का यह बयान सिर्फ हवा-हवाई नहीं है; इसके पीछे उनका अपना ग्राउंड स्ट्रगल (Ground Struggle) भी छिपा है। गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले, जब नीट विवाद अपने चरम पर था और सरकार सुनने को तैयार नहीं थी, तब राहुल गांधी ने एक बड़ा 'सरप्राइज पॉलिटिकल मूव' चला था।
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    लोक कल्याण मार्ग पर अचानक प्रदर्शन: किसी भी खुफिया एजेंसी या दिल्ली पुलिस को भनक लगे बिना, राहुल गांधी कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ सीधे प्रधानमंत्री आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) के बाहर पहुंच गए थे।
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    सत्तापक्ष रह गया था हैरान: कांग्रेस के इस अचानक किए गए प्रदर्शन से सरकार और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से हिल गई थीं। राहुल ने वहां बैठकर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी।
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    सुरक्षाकर्मियों द्वारा हटाया जाना: बाद में भारी पुलिस बल और सुरक्षाकर्मियों (SPG/Delhi Police) ने बलपूर्वक राहुल गांधी को वहां से हटाया था, जिसको लेकर पूरे देश में भारी राजनीतिक बवाल मचा था।
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आज जब धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया है, तो कांग्रेस कार्यकर्ता इसे राहुल गांधी के उसी 'सड़क संघर्ष' और जंतर-मंतर पर डटे CJP छात्रों की संयुक्त जीत के रूप में सेलिब्रेट कर रहे हैं।
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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मोदी सरकार (Modi Government 3.0) के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका है। राहुल गांधी ने जिस आक्रामकता के साथ इस मुद्दे को लपका है, वह दर्शाता है कि विपक्ष अब लोकसभा के भीतर और बाहर, दोनों जगह सरकार को कोई 'वॉकओवर' (Walkover) देने के मूड में नहीं है। 'नीट' विवाद ने विपक्ष को एक संजीवनी दे दी है। अब देखना यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राहुल गांधी की 'माफी' वाली मांग पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और नया शिक्षा मंत्री इस बिखरे हुए एजुकेशन सिस्टम को कैसे समेटता है।
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