नई दिल्ली (बिज़नेस डेस्क): आजकल हर किसी के हाथ में स्मार्टफोन है और उस स्मार्टफोन पर दिन भर में दर्जनों नोटिफिकेशन आते रहते हैं। इन्हीं में से एक मैसेज ऐसा होता है, जो कई बार चेहरे पर मुस्कान ला देता है तो कई बार मुसीबत को न्योता देता है। वह मैसेज है— "Congratulations! You are eligible for a Pre-Approved Personal Loan of ₹5 Lakhs." (बधाई हो! आप 5 लाख रुपये के प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन के पात्र हैं)।READ ALSO:-Vaishno Devi Yatra Update: नए साल से पहले श्राइन बोर्ड का बड़ा फैसला, अब 'दर्शन' के लिए मिलेगी डेडलाइन; 24 घंटे में लौटना होगा वापस
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सुनने में यह कितना आकर्षक लगता है न? न बैंक जाने का झंझट, न मोटे-मोटे दस्तावेजों (Documents) की फाइल बनाने की सिरदर्दी और न ही हफ्तों का इंतजार। बस एक क्लिक, थोड़ी सी जानकारी और मिनटों में पैसा आपके बैंक अकाउंट में। जब किसी को पैसों की सख्त जरूरत (Medical Emergency या शादी-ब्याह) हो, तो यह ऑफर किसी वरदान से कम नहीं लगता।
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लेकिन, अर्थशास्त्र का एक पुराना नियम है— "There is no such thing as a free lunch" (मुफ्त में कुछ नहीं मिलता)। इस आसान दिखने वाले विकल्प के पीछे कई बार गहरे वित्तीय जोखिम छिपे होते हैं। कम EMI का लालच, प्रोसेसिंग फीस की मार और फोरक्लोजर के कड़े नियम भविष्य में आपकी जेब पर भारी पड़ सकते हैं। वित्तीय विशेषज्ञों ने ऐसे किसी भी ऑफर को स्वीकार करने से पहले 5 महत्वपूर्ण बातों को गांठ बांध लेने की सलाह दी है।
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1. ब्याज दर का 'मायाजाल': फिक्स है या फ्लोटिंग?

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अक्सर लोग मैसेज में लिखी कम ब्याज दर (Interest Rate) देखकर तुरंत 'Apply Now' पर क्लिक कर देते हैं। लेकिन यहीं सबसे बड़ी चूक होती है।
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    शुरुआती दर vs वास्तविक दर: विज्ञापन में जो दर दिखाई जाती है, वह अक्सर सबसे कम वाली (Starting from...) होती है। आपकी वास्तविक ब्याज दर आपकी आय, नौकरी की स्थिरता, सिबिल स्कोर (CIBIL Score) और पुराने लोन रिकॉर्ड पर निर्भर करती है।
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    फिक्स या फ्लोटिंग: यह जानना बेहद जरूरी है कि ब्याज दर 'फिक्स्ड' (Fixed) है या 'फ्लोटिंग' (Floating)। फ्लोटिंग रेट शुरुआत में कम लग सकता है, लेकिन अगर आरबीआई ने रेपो रेट बढ़ाया, तो आपकी EMI अचानक बढ़ सकती है।
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    सलाह: लोन एग्रीमेंट साइन करने से पहले लिखित में कन्फर्म करें कि आपसे सालाना (Annual) कितना ब्याज लिया जा रहा है, न कि मासिक (Monthly)। कई बार 1.5% मासिक ब्याज सुनने में कम लगता है, लेकिन सालाना यह 18% से ज्यादा होता है।
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2. खाते में कितना पैसा आएगा? (कटौती का खेल)

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मान लीजिए आपका 5 लाख रुपये का लोन पास हुआ है। आप खुश हैं कि 5 लाख रुपये आएंगे, लेकिन जब मैसेज आता है तो पता चलता है कि खाते में केवल 4.80 लाख रुपये ही आए हैं।
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    प्रोसेसिंग फीस: बैंक और वित्तीय संस्थान लोन देने के बदले प्रोसेसिंग फीस (Processing Fee) वसूलते हैं, जो लोन राशि का 1% से 3% तक हो सकता है।
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    इंश्योरेंस और GST: कई बार लेंडर जबरदस्ती लोन प्रोटेक्शन इंश्योरेंस जोड़ देते हैं, जिसका प्रीमियम आपकी लोन राशि से काट लिया जाता है। साथ ही प्रोसेसिंग फीस पर 18% GST भी लगता है।
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    सलाह: 'हां' करने से पहले स्पष्ट पूछें कि "नेट डिस्बर्समेंट अमाउंट" (Net Disbursement Amount) यानी कट-कुटाकर हाथ में कितना पैसा आएगा?
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3. लोन बंद करना हुआ तो? (प्रीपेमेंट और फोरक्लोजर चार्ज)

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पर्सनल लोन अक्सर 3 से 5 साल के लिए होते हैं। लेकिन हो सकता है कि आपके पास 1 साल बाद कहीं से पैसा आ जाए और आप लोन बंद करना चाहें। यहाँ बैंक अपना असली खेल खेलते हैं।
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    लॉक-इन पीरियड: कई बैंक शर्त रखते हैं कि आप 6 महीने या 1 साल तक लोन बंद नहीं कर सकते।
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    पेनल्टी: अगर आप समय से पहले लोन बंद करते हैं, तो बैंक आपसे बची हुई राशि का 2% से 5% तक 'फोरक्लोजर चार्ज' (Foreclosure Charges) वसूल सकते हैं।
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    सलाह: लोन लेते समय हमेशा "जीरो प्रीपेमेंट चार्ज" (Zero Prepayment Charges) वाले ऑफर की तलाश करें या कम से कम चार्ज वाले विकल्प को चुनें।
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4. कम EMI का गणित: टेन्योर और कुल ब्याज

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"मात्र 2000 रुपये की EMI पर 1 लाख का लोन"—ऐसे विज्ञापन आपको लुभाने के लिए ही बनाए जाते हैं।
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    लंबा टेन्योर = ज्यादा नुकसान: कम EMI का मतलब है लंबा टेन्योर (Long Tenure)। आप जितने लंबे समय तक पैसा अपने पास रखेंगे, बैंक आपसे उतना ही ज्यादा ब्याज वसूलेगा।
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    उदाहरण: अगर आप 5 लाख का लोन 15% ब्याज पर 3 साल के लिए लेते हैं, तो आप कुल 1.25 लाख ब्याज देंगे। वही लोन अगर आप कम EMI के चक्कर में 5 साल के लिए लेते हैं, तो आप 2.15 लाख ब्याज भरेंगे।
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    सलाह: अपनी जेब की क्षमतानुसार अधिकतम EMI और न्यूनतम टेन्योर (Tenure) चुनें ताकि ब्याज कम से कम देना पड़े।
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5. लेंडर का व्यवहार और पेनल्टी (हिडन मॉन्स्टर)

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डिजिटल लेंडिंग के दौर में यह सबसे महत्वपूर्ण पॉइंट है। कई बार अनजाने में या तकनीकी खराबी से EMI बाउंस हो सकती है।
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    भारी पेनल्टी: कुछ लेंडर एक दिन की देरी पर भी भारी लेट फीस (Late Fees) और चेक बाउंस चार्ज लगाते हैं।
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    क्रेडिट स्कोर पर वार: एक मिस हुई EMI आपके क्रेडिट स्कोर को 50-100 पॉइंट नीचे गिरा सकती है।
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    रिकवरी एजेंट: कुछ इंस्टेंट लोन ऐप्स का रिकवरी का तरीका बेहद अपमानजनक होता है।
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    सलाह: हमेशा आरबीआई (RBI) द्वारा रजिस्टर्ड बैंक या NBFC से ही लोन लें। किसी भी अनजान ऐप (App) से लोन लेने से बचें और लोन एग्रीमेंट में 'लेट पेमेंट चार्जेस' को ध्यान से पढ़ें।
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जरूरत हो तभी लें, लालच में नहीं

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प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन आपातकालीन स्थितियों के लिए एक बेहतरीन सुविधा है, इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन यह 'डबल एज्ड स्वॉर्ड' (दोधारी तलवार) जैसा है। अगर आप जागरूक हैं, तो यह आपकी मदद करेगा, लेकिन अगर आपने बिना पढ़े 'I Agree' पर क्लिक कर दिया, तो यह आपको कर्ज के ऐसे दलदल में धकेल सकता है जहाँ से निकलना मुश्किल होगा।
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इसलिए, अगली बार जब मोबाइल की घंटी बजे और लोन का ऑफर आए, तो रुकें, सोचें, शर्तें पढ़ें और इन 5 पैमानों पर परखने के बाद ही फैसला लें।
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