भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्थायी वित्त पोषण सुनिश्चित करने के लिए संसद ने एक बड़ा कदम उठाया है। सोमवार, 8 दिसंबर को, संसद ने ध्वनिमत से ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा उपकर विधेयक 2025’ (National Health Security Cess Bill 2025) पास कर दिया। यह विधेयक पान मसाला, सिगरेट और तंबाकू जैसे हानिकारक ('डीमेरिट') उत्पादों के निर्माण पर एक विशेष सेस (उपकर) लगाने का अधिकार देता है।READ ALSO:-Ayushman Card: क्या साल भर मिलेगा 'अनलिमिटेड' फ्री इलाज? 5 लाख की लिमिट का सच जान लीजिए, वरना ऐन वक्त पर होगी परेशानी
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

हानिकारक उत्पाद होंगे महंगे, सरकार की दोहरी मंशा

\r\n\r\n
इस विधेयक के लागू होते ही पान मसाला, सिगरेट और तंबाकू जैसे उत्पादों का निर्माण करने वाली इकाइयों को अतिरिक्त टैक्स देना होगा, जिससे स्वाभाविक रूप से इन उत्पादों की कीमतें बढ़ेंगी। सरकार का इस कदम के पीछे एक दोहरी मंशा है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    स्वास्थ्य प्रोत्साहन: हानिकारक वस्तुओं को महंगा करके उनके उपभोग को हतोत्साहित करना।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    राजस्व सृजन: इनसे प्राप्त राजस्व का उपयोग देश की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए करना।
    \r\n
  4. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

वित्त मंत्री ने साफ की मंशा: सुरक्षा की जरूरतें प्राथमिकता

\r\n\r\n
राज्यसभा में बहस के दौरान विपक्ष द्वारा यह सवाल उठाया गया था कि पान मसाला जैसे उत्पादों से जुटाए गए टैक्स को राष्ट्रीय सुरक्षा पर क्यों खर्च किया जाए। इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार की मंशा स्पष्ट की।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
वित्त मंत्री ने बताया कि सेस लगाने की शक्ति संविधान के अनुच्छेद 270 से मिलती है, जो संसद को किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए टैक्स लगाने की अनुमति देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कदम दो मोर्चों को एक साथ मजबूत करेगा:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    सार्वजनिक स्वास्थ्य: स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक फंड खर्च होगा।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    रक्षा आधुनिकीकरण: हाई-टेक डिफेंस सिस्टम और महंगी तकनीकों (जैसे साइबर ऑपरेशन, स्पेस टेक्नोलॉजी और प्रिसिजन वेपन्स) को खरीदने के लिए स्थायी फंडिंग मिलेगी।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
उन्होंने कारगिल युद्ध का उदाहरण दिया, जहां रक्षा उपकरणों की कमी ने देश को भारी नुकसान पहुंचाया था, और कहा कि सरकार नहीं चाहती कि देश दोबारा ऐसी स्थिति में पहुंचे। 
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

राज्यों को भी मिलेगा स्वास्थ्य फंड में हिस्सा

\r\n\r\n
सेस के खर्च को लेकर राज्यों द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में, वित्त मंत्री ने आश्वासन दिया कि स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं के लिए राज्यों को भी इस फंड का हिस्सा दिया जाएगा। यह सुनिश्चित किया गया है कि यह फंड केवल केंद्र के पास सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्यों के अस्पतालों और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने में भी इसका इस्तेमाल होगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

क्यों जरूरी था यह नया सेस?

\r\n\r\n
सरकार का तर्क है कि नई दुनिया में युद्ध की प्रकृति बदल गई है, और आधुनिक रक्षा जरूरतों के लिए स्थायी और बड़ी फंडिंग आवश्यक है। डीमेरिट गुड्स (हानिकारक वस्तुएं) पर सेस लगाना इसका सबसे संतुलित तरीका माना गया है, क्योंकि इससे आम जनता पर सीधे तौर पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ता। यह कदम भारत को एक आधुनिक और सुरक्षित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक रणनीतिक पहल है। 
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
संसद द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा उपकर विधेयक 2025 का पास किया जाना एक महत्वपूर्ण विधायी कदम है। पान मसाला और तंबाकू जैसे हानिकारक उत्पादों पर विशेष सेस लगाकर, सरकार एक तरफ सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और दूसरी तरफ देश की रक्षा जरूरतों के लिए स्थायी फंडिंग सुनिश्चित करने की दोहरी चुनौती से निपटने की तैयारी कर रही है। यह फंड भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें