उत्तर प्रदेश के विकास खण्ड नूरपुर स्थित ग्राम पंचायत मिर्जापुर ढीकली में रविवार को प्रकृति संरक्षण की एक अनूठी मिसाल पेश की गई। इस नूरपुर वृक्षारोपण कार्यक्रम के अंतर्गत गांव में बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाया गया। वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम 2026 के तहत यहां कुल 3000 से अधिक पौधे रोपे गए हैं, जो भविष्य में क्षेत्र को हरा-भरा बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।READ ALSO:-बिजनौर पुलिस का 'ऑपरेशन CY-Vajra' में बड़ा प्रहार: गेमिंग ऐप और टेलीग्राम के जरिए करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 2 शातिर गिरफ्तार
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नूरपुर वृक्षारोपण कार्यक्रम में 'एक पेड़ मां के नाम' की गूंज
\r\n\r\nइस महाभियान में प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए 'एक पेड़ मां के नाम' संकल्प को विशेष प्रमुखता दी गई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं नूरपुर ब्लॉक प्रमुख आकांक्षा चौहान ने अपने हाथों से आंवले का पौधा लगाकर इस पुनीत कार्य का औपचारिक शुभारंभ किया।
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इससे पूर्व खण्ड विकास अधिकारी (BDO) डॉ. दिनेश पाल शर्मा ने मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख का पुष्पगुच्छ भेंट कर भव्य स्वागत किया। इसके बाद, बीडीओ डॉ. शर्मा ने भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए स्वयं एक अमरूद का पौधा रोपा।
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गो-आश्रय स्थल पर बना महर्षि चरक औषधि वन
\r\n\r\nइस नूरपुर वृक्षारोपण कार्यक्रम की सबसे बड़ी और खास विशेषता 'महर्षि चरक औषधि वन' की स्थापना रही। यह विशेष और उपयोगी वन मिर्जापुर ढीकली के अस्थाई गो-आश्रय स्थल (गौशाला) की भूमि पर विकसित किया गया है।
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अधिकारियों और ग्रामवासियों के साझा प्रयास से यहां 500 से अधिक बहुमूल्य औषधीय पौधे लगाए गए हैं। इनमें मुख्य रूप से अर्जुन, जामुन और आंवला जैसी गुणकारी वनस्पतियां शामिल की गई हैं।
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औषधीय पौधों का ग्रामीण जीवन में महत्व
\r\n\r\nइन औषधीय पौधों का चुनाव काफी सोच-समझकर किया गया है। जहां आंवला विटामिन-सी का बेहतरीन स्रोत है, वहीं जामुन और अर्जुन की छाल कई गंभीर बीमारियों के इलाज में काम आती है। भविष्य में यह वन ग्रामीणों के लिए एक प्राकृतिक औषधालय के रूप में काम करेगा।
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ग्राम समाज की भूमि को मिला हरियाली का वरदान
\r\n\r\nगो-आश्रय स्थल पर औषधीय वन बनाने के अलावा पूरे गांव को हरा-भरा बनाने का भी मजबूत संकल्प लिया गया। ग्राम पंचायत मिर्जापुर ढीकली की खाली पड़ी ग्राम समाज की अतिरिक्त भूमि पर भी सघन पौधारोपण कार्य किया गया।
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आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस सार्वजनिक भूमि पर 2500 से अधिक छायादार, फलदार और इमारती लकड़ी वाले पौधे रोपे गए हैं। यह हरियाली भविष्य में गांव के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को मजबूत करने में बहुत मददगार साबित होगी।
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अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी
\r\n\r\nइस सफल और विशाल नूरपुर वृक्षारोपण कार्यक्रम में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी ने मिलकर गांव वालों को अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिए प्रेरित और जागरूक किया।
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मौके पर मौजूद सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) करूणा चौहान, एडीओ कोऑपरेटिव एकेश्वर सुन्दरियाल और ग्राम पंचायत सचिव नीरज कुमार ने भी अपने हाथों से दर्जनों पौधे लगाए। वहीं, ग्राम प्रधान पुत्र आफताब आलम ने भी पौधारोपण कर मौजूद ग्रामीणों का उत्साह दोगुना कर दिया।
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बड़ी संख्या में ग्रामवासियों ने निभाया अपना कर्तव्य
\r\n\r\nकिसी भी सरकारी या सामाजिक अभियान की वास्तविक सफलता स्थानीय नागरिकों की भागीदारी पर ही निर्भर करती है। इस नूरपुर वृक्षारोपण कार्यक्रम में मिर्जापुर ढीकली के जागरूक निवासियों ने अपनी सामूहिक जिम्मेदारी को बखूबी साबित कर दिया।
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कार्यक्रम के दौरान ग्राम रोजगार सेवक पंकज कुमार, शाने आलम, सायरा, इसरार और सलाउद्दीन सहित सैकड़ों ग्रामवासी पूरे समय मौजूद रहे। सभी ने मिलकर इन नवजात पौधों को पेड़ों में तब्दील होने तक उनकी देखभाल करने का संकल्प भी लिया है।
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कुल मिलाकर, मिर्जापुर ढीकली में आयोजित यह नूरपुर वृक्षारोपण कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय और अनुकरणीय कदम है। 'महर्षि चरक औषधि वन' की स्थापना से जहां एक ओर विलुप्त हो रही देसी औषधीय वनस्पतियों का संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से हमारी भावी पीढ़ी को प्रकृति से सीधे जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी। यह प्रयास ग्रामीण विकास और पर्यावरण संतुलन की एक नई कहानी लिख रहा है।
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डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह समाचार लेख विकास खण्ड नूरपुर द्वारा दिनांक 12.07.2026 को जारी की गई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति और प्राप्त जानकारियों पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य जन जागरूकता और सटीक सूचना प्रदान करना है। पौधों के संरक्षण और आंकड़ों से संबंधित अधिक जानकारी के लिए स्थानीय ग्राम पंचायत या ब्लॉक कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
Sabse pehle comment karne wale banein.