उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से कांवड़ यात्रा के दौरान एक बड़ा मामला सामने आया है। शुक्रवार रात मुजफ्फरनगर शिव चौक पर पुलिस और कांवड़ियों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिसने देखते ही देखते मुजफ्फरनगर कांवड़ विवाद का रूप ले लिया। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने कांवड़ियों को एक संभावित जानलेवा हादसे से बचाने की कोशिश की।READ ALSO:-गाजियाबाद में इंसानियत हुई शर्मसार: 7 साल की मासूम से गैंगरेप के बाद निर्मम हत्या, निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में लहूलुहान मिला शव
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हरिद्वार से गंगाजल लेकर गाजियाबाद की ओर जा रहे 50 से अधिक कांवड़ियों के एक जत्थे ने बीच सड़क पर जमकर हंगामा किया। आरोप है कि कांवड़ियों ने पुलिसकर्मियों और कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों के साथ न केवल अभद्रता की, बल्कि धक्का-मुक्की भी की। इस घटना में कुछ लोगों के घायल होने की भी खबर है। आइए इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं कि आखिर गलती किसकी थी और विवाद ने इतना तूल कैसे पकड़ लिया।
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मुजफ्फरनगर कांवड़ विवाद की शुरुआत: हाईटेंशन लाइन और सुरक्षा
\r\n\r\nयह पूरा घटनाक्रम मुजफ्फरनगर के कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्रसिद्ध शिव चौक और नॉवल्टी चौराहे के पास शुक्रवार रात करीब 10 बजे का है। जानकारी के अनुसार, गाजियाबाद का एक जत्था हरिद्वार से जल लेकर लौट रहा था। इस जत्थे के साथ एक विशालकाय 'डबल रूफ' (दो मंजिला) डीजे कांवड़ भी शामिल थी।
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शिव चौक पर कांवड़ रखकर परिक्रमा करने की प्राचीन मान्यता है। जब यह जत्था नॉवल्टी चौराहे के पास पहुंचा, तो कुछ कांवड़िए अति-उत्साह में डीजे कांवड़ की दूसरी छत पर जाकर खड़े हो गए। इसी मार्ग के ठीक ऊपर से 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन गुजर रही थी।
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वहां सुरक्षा व्यवस्था में तैनात कोतवाली प्रभारी (इंस्पेक्टर) बृजेश शर्मा ने जब यह देखा, तो उन्हें किसी बड़े हादसे की आशंका हुई। कांवड़ियों का 11 हजार वोल्ट की लाइन के करीब होना बेहद खतरनाक था। इसी के चलते उन्होंने डीजे कांवड़ की छत पर खड़े युवकों को सुरक्षित नीचे उतरने के लिए कहा।
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वर्दी उतरवाने की धमकी और पुलिस से बदसलूकी
\r\n\r\nपुलिस का यह सुरक्षात्मक निर्देश कांवड़ियों को नागवार गुजरा। कांवड़ियों ने नीचे उतरने के बजाय पुलिस से ही बहस शुरू कर दी। इसी दौरान जत्थे में शामिल एक युवक, जिसका नाम मोहित चौधरी बताया जा रहा है, और गाजियाबाद निवासी विजेंद्र भगत ने जमकर हंगामा करना शुरू कर दिया।
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विवाद इतना बढ़ गया कि कांवड़ियों ने कोतवाली प्रभारी के साथ सरेआम अभद्रता की। एक कांवड़िए ने आपा खोते हुए इंस्पेक्टर बृजेश शर्मा को खुलेआम धमकी दे डाली। उसने गुस्से में कहा, "अगर तुम्हें ज्यादा वर्दी का गुरूर चढ़ा है, तो बता दो, अभी 5 मिनट के अंदर उतरवा दूंगा।" यह धमकी सीधे तौर पर पुलिस के मनोबल और राज्य की कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली थी।
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मीडियाकर्मियों पर हमला और शिव चौक पर धरना
\r\n\r\nजिस समय यह घटना हो रही थी, वहां मौजूद कुछ स्थानीय पत्रकार और मीडियाकर्मी इस पूरे घटनाक्रम की कवरेज कर रहे थे। कांवड़ियों के गुस्से का शिकार मीडियाकर्मी भी हुए। उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई, जिसमें कुछ लोगों को चोटें भी आई हैं। एक मीडियाकर्मी ने इस मामले में दो नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी है, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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इस हंगामे के बीच कांवड़ियों ने शिव चौक तक अपनी कांवड़ पहुंचाई और पहले शिव चौक की परिक्रमा पूरी की। इसके बाद वे वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गए। जत्थे का नेतृत्व कर रहा युवक मोहित चौधरी इस बात पर अड़ गया कि जब तक कोतवाली प्रभारी उनसे माफी नहीं मांगते, वे वहां से नहीं हटेंगे।
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सीओ सिटी का हस्तक्षेप और पुलिस का संयम
\r\n\r\nस्थिति को बिगड़ता देख सीओ सिटी (CO City) सिद्धार्थ के. मिश्रा भारी पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। एक तरफ कांवड़ियों का उग्र रूप था, तो दूसरी तरफ पुलिस का संयम। सावन का पवित्र महीना और कांवड़ यात्रा की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने लाठीचार्ज या बल प्रयोग करने के बजाय बातचीत का रास्ता चुना।
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हैरानी की बात यह रही कि सीओ की मौजूदगी में भी कोतवाली प्रभारी के साथ अभद्रता जारी रही। पुलिसकर्मी लगातार हाथ जोड़कर कांवड़ियों से शांति बनाए रखने और आगे बढ़ने का अनुरोध करते रहे। काफी देर तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और सीओ सिटी के लगातार समझाने के बाद आखिरकार कांवड़िए शांत हुए और अपना जत्था लेकर आगे के लिए रवाना हो गए।
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पुलिस की आगे की कार्रवाई
\r\n\r\nभले ही मौके पर कांवड़िए चले गए हों, लेकिन पुलिस ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। घटना के दौरान मौजूद लोगों ने इस पूरे हंगामे का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है। मुजफ्फरनगर पुलिस अब इन्हीं वायरल वीडियो और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हंगामा करने वाले और पत्रकारों से मारपीट करने वाले तत्वों की पहचान करने में जुट गई है।
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अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। आस्था की आड़ में कानून-व्यवस्था भंग करने, पुलिस कार्य में बाधा डालने और ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों से बदसलूकी करने वालों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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मुजफ्फरनगर में घटी यह घटना एक गंभीर चेतावनी है। यह मुजफ्फरनगर कांवड़ विवाद स्पष्ट रूप से दिखाता है कि कैसे कभी-कभी उग्र भीड़ सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर अपनी ही जान जोखिम में डालती है। पुलिस ने हादसे से बचाने की कोशिश की, जिसके बदले में उन्हें धमकियां मिलीं। आस्था के नाम पर कानून हाथ में लेना और मीडियाकर्मियों पर हमला करना पूरी तरह से निंदनीय है। पुलिस ने जिस सूझबूझ और संयम से मामले को संभाला, वह काबिले तारीफ है। अब जरूरत इस बात की है कि वीडियो फुटेज के आधार पर दोषियों पर उचित कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई भी कानून के रखवालों की वर्दी का इस तरह अपमान न कर सके।
Sabse pehle comment karne wale banein.