मुंबई। साहित्य और स्वास्थ्य क्षेत्र का एक अनूठा संगम मुंबई में देखने को मिला। मशहूर लेखक चेतन भगत ने मुंबई में Dr Rajneesh Kant Book ‘Chiropractor & Physiotherapist’ का भव्य विमोचन किया। टीएस पब्लिकेशन (TS Publication) द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक आम लोगों के लिए कायरोप्रैक्टिक चिकित्सा (Chiropractic Treatment) को सरल, सुलभ और समझने योग्य बनाने की एक महत्वपूर्ण पहल है। विमोचन समारोह में उस समय लोगों की खास दिलचस्पी देखने को मिली, जब डॉ. राजनीश कांत ने मंच पर ही चेतन भगत की कलाई पर एडजस्टमेंट तकनीक का लाइव प्रदर्शन किया। इस उपचार के बाद चेतन भगत ने राहत महसूस करने की बात कही और इस विशेष तकनीक की जमकर सराहना की।

पसंदीदा लेखक के साथ मंच साझा करना एक सपना डॉ. राजनीश कांत के लिए यह विमोचन एक पेशेवर उपलब्धि से कहीं बढ़कर था। उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि वह बचपन से ही चेतन भगत के उपन्यास पढ़ते आए हैं और उनकी कहानियों पर बनी फिल्में देखते रहे हैं। अपने पसंदीदा लेखक के हाथों अपनी पुस्तक का विमोचन करवाना उनके लिए एक भावुक और गर्व का पल रहा। डॉ. कांत ने '3 इडियट्स' फिल्म के संदेश का जिक्र करते हुए कहा कि वे खुशी से वही कर रहे हैं जो उनका दिल चाहता है, और अपने जुनून को आगे बढ़ाने से उन्हें अपार संतुष्टि मिलती है।

'दर्द-मुक्त भारत' का संकल्प और RKM तकनीक डॉ. कांत का मुख्य उद्देश्य कायरोप्रैक्टिक चिकित्सा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और शरीर की कार्यप्रणाली के बारे में लोगों को शिक्षित करना है। उनका सबसे बड़ा संकल्प 'दर्द-मुक्त भारत' बनाना है। डॉ. कांत का मानना है कि लोगों को दर्द को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा मानकर स्वीकार करने की जरूरत नहीं है, बल्कि सही जानकारी और उपचार के विकल्पों से इसे दूर किया जा सकता है। उनकी यह पुस्तक 10 अध्यायों में विभाजित है, जिसमें रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य, खिलाड़ियों की देखभाल, वरिष्ठ नागरिकों के लिए सावधानियां, चिकित्सा से जुड़ी भ्रांतियां और क्लिनिक प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। पुस्तक में उनके द्वारा अनुभव के आधार पर विकसित ‘Rajneesh Kant Method (RKM)’ का भी उल्लेख किया गया है, जिसके विस्तार से भविष्य की पुस्तकों में आने की उम्मीद है।

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चिकित्सा की ऐतिहासिक जड़ें और विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी इस पुस्तक में कायरोप्रैक्टिक चिकित्सा के आधुनिक इतिहास के साथ-साथ पारंपरिक आख्यानों का भी जिक्र है। डॉ. कांत ने भारत में हाथों से उपचार (मैनुअल हीलिंग) की जड़ों को भगवान श्रीकृष्ण और कुब्जा की पौराणिक कथा से जोड़ते हुए शारीरिक मुद्रा में सुधार की बात कही है। साथ ही, 1895 में डैनियल डेविड पामर (Daniel David Palmer) द्वारा अमेरिका में शुरू की गई आधुनिक कायरोप्रैक्टिक चिकित्सा के प्रलेखित इतिहास को भी पुस्तक में स्थान दिया गया है। विमोचन समारोह को खास बनाने के लिए ट्रांसजेंडर आध्यात्मिक गुरु एवं जगद्गुरु महामंडलेश्वर हिमांगी सखी जी उपस्थित रहीं। इसके अलावा प्रसिद्ध फिजियोथेरेपिस्ट प्रोफेसर डॉ. अली ईरानी ने भी डॉ. राजनीश कांत को अपना आशीर्वाद दिया और उनके प्रयासों की सराहना की।

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