The Great Trial Book Launch के साथ साहित्य और न्याय की दुनिया में एक नया अध्याय जुड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाली जानी-मानी वकील और लेखिका मेधा पुष्करणा ने अपनी चर्चित कोर्टरूम सीरीज़ 'द ग्रेट ट्रायल' (The Great Trial) की तीसरी कड़ी पाठकों के सामने पेश कर दी है। उनकी इस नई किताब का शीर्षक ‘इट इज़ नॉट ओवर यट... एनिमल वर्ल्ड वर्सेज़ मैनकाइंड’ (It Is Not Over Yet... Animal World Versus Mankind) है। लॉ एंड जस्टिस पब्लिशिंग कंपनी द्वारा प्रकाशित यह उपन्यास केवल एक फिक्शन नहीं है, बल्कि यह रहस्य, पौराणिक कल्पना और अदालत के बारीक कानूनी दांव-पेच का एक बेहद दिलचस्प और रोमांचक मेल है।

​रहस्य और कानूनी दांव-पेच की रोमांचक कहानी

मेधा पुष्करणा की यह नई किताब पाठकों को एक ऐसी काल्पनिक लेकिन विचारणीय दुनिया में ले जाती है, जहां पशु जगत और मानव जगत के बीच शांति स्थापित हो चुकी है। लेकिन कहानी में असल रोमांच और हलचल तब मचती है, जब पवित्र वन में रहने वाले काउंसिल के सबसे बुद्धिमान सदस्य 'मिस्टर एलिफेंट' रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत पाए जाते हैं।

​इस हाई-प्रोफाइल मौत के बाद जंगल और इंसानी दुनिया के बीच बना नाजुक संतुलन बिगड़ने लगता है। जांच की आंच एक ऐसे किरदार पर आती है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। जांच की दिशा युवा और होनहार वकील 'मेड्स' (Mads) के गुरु 'अंकल जस्ट' (Uncle Just) की ओर मुड़ जाती है। अपने ही गुरु पर लगे आरोपों के बीच युवा वकील मेड्स सच की तलाश में निकलता है। इसके बाद किताब के पन्नों पर सच, सबूत और जवाबदेही की एक ऐसी रोमांचक पड़ताल शुरू होती है, जो पाठकों को अंत तक बांधे रखती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

​170 से अधिक कानूनी सिद्धांतों (Legal Maxims) का समावेश

मेधा पुष्करणा की यह किताब सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि कानून के विद्यार्थियों और आम पाठकों के ज्ञान में भी भारी इजाफा करती है। एक अनुभवी वकील होने के नाते मेधा ने इस फिक्शन में वास्तविकता का शानदार पुट डाला है। इस तीसरी किताब की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कानूनी सिद्धांतों और लीगल मैक्सिम्स (Legal Maxims) से जुड़ी 170 से अधिक महत्वपूर्ण प्रविष्टियों को कहानी के ताने-बाने में पिरोया गया है। यह प्रयोग कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए इसे एक संदर्भ पुस्तक (Reference Book) के रूप में भी उपयोगी बनाता है।

​सुप्रीम कोर्ट से कैम्ब्रिज तक का शानदार सफर

मेधा पुष्करणा की उपलब्धियां केवल फिक्शन लेखन तक ही सीमित नहीं हैं। उनका पेशेवर और अकादमिक सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने प्रतिष्ठित कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (Cambridge University) से क्रिमिनोलॉजी (अपराधशास्त्र) में एमफिल (MPhil) की डिग्री हासिल की है। वर्तमान में वह देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में संवैधानिक मामलों और आपराधिक अपीलों से जुड़े जटिल केस लड़ती हैं।

​वकालत और लेखन के अलावा मेधा शिक्षण के क्षेत्र में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। वह गलगोटिया यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ (Galgotias University School of Law) में विजिटिंग फैकल्टी की अहम भूमिका निभा रही हैं। यहां वह कानून के विद्यार्थियों को अपने वास्तविक अनुभव के आधार पर कोर्टरूम और चैंबर प्रैक्टिस की व्यावहारिक बारीकियां सिखाती हैं।

​'वॉर ऑन अर्थ' से शुरू हुआ था यह सफर

मेधा पुष्करणा की इस अनूठी सीरीज़ की शुरुआत वर्ष 2023 में ‘वॉर ऑन अर्थ’ (War on Earth) नामक किताब के साथ हुई थी। अपने पहले ही भाग से इस सीरीज़ ने कानून को नैतिकता, दर्शन और मानवता के बुनियादी सवालों से जोड़कर साहित्य जगत में अपनी एक अलग पहचान बना ली थी।

​वकालत की भागदौड़, शिक्षण की जिम्मेदारी और रचनात्मक लेखन के बीच बेहतरीन संतुलन बनाते हुए मेधा ने इस तीसरी किताब के जरिए पाठकों के सामने न्याय की एक नई और उलझी हुई पहेली रखी है। जो पाठक इस कानूनी रहस्य को सुलझाना चाहते हैं, उनके लिए यह किताब प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेज़न (Amazon), किंडल (Kindle) और फ्लिपकार्ट (Flipkart) पर आसानी से उपलब्ध है।

​अपने शीर्षक के अनुरूप, यह किताब अंत में समाज और पाठकों के मन में एक गहरा सवाल छोड़ जाती है— क्या न्याय की यह कहानी सचमुच खत्म हो गई है?

विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें