मेरठ (विशेष संवाददाता)। सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही चारों तरफ सिर्फ एक ही रंग नजर आता है, और वह है शिवभक्तों का केसरिया रंग। वातावरण में 'बम-बम भोले' और 'हर-हर महादेव' के जयकारे गूंजने लगते हैं। हरिद्वार, ऋषिकेश और गोमुख से पवित्र गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ते कांवड़ियों (Kanwariyas) के जत्थे जब सड़कों से गुजरते हैं, तो पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है।READ ALSO:-चीनी के दाम में जोरदार बढ़ोतरी, एक महीने में 17% तक उछले रेट; जानें क्यों महंगी हो रही मिठास
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश और विशेष रूप से मेरठ (Meerut) कांवड़ यात्रा का एक प्रमुख केंद्र है। दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और एनसीआर (NCR) की ओर जाने वाले लाखों शिवभक्त मेरठ के गढ़ रोड और हाईवे से होकर गुजरते हैं। ऐसे में इन थके-हारे शिवभक्तों की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म माना जाता है। इसी महान उद्देश्य और सेवा भाव को आगे बढ़ाते हुए, मोहन बाबा समिति ने इस वर्ष भी एक भव्य 'कांवड़ सेवा शिविर' (Kanwar Seva Shivir) का आयोजन किया है।
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राधा गोविंद कॉलेज गेट पर सजा सेवा का दरबार

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हर साल की तरह इस बार भी समिति ने मेरठ के अति व्यस्त और प्रमुख मार्ग गढ़ रोड (Garh Road) पर स्थित राधा गोविंद कॉलेज गेट (Radha Govind College Gate) के पास अपना कांवड़ सेवा शिविर लगाया है। यह स्थान कांवड़ियों के मुख्य मार्ग पर पड़ता है, जिससे पदयात्रा कर रहे शिवभक्तों को आसानी से इस शिविर का लाभ मिल सके।
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समिति का उद्देश्य केवल कांवड़ियों को भोजन कराना ही नहीं है, बल्कि सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा करके आ रहे इन भोले के भक्तों को एक ऐसा सुकून भरा माहौल देना है, जहां वे अपनी शारीरिक थकान मिटा सकें और फिर से नई ऊर्जा के साथ अपनी आगे की यात्रा शुरू कर सकें।
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शिविर में श्रद्धालुओं के लिए किए गए हैं खास इंतजाम

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मोहन बाबा समिति ने शिवभक्तों की हर छोटी-बड़ी जरूरत को ध्यान में रखते हुए शिविर में व्यापक इंतजाम किए हैं। शिविर की प्रमुख व्यवस्थाएं इस प्रकार हैं:
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    विश्राम और ठहरने की उत्तम व्यवस्था: मीलों पैदल चलने के कारण कांवड़ियों के पैरों में छाले पड़ जाते हैं और शरीर बुरी तरह थक जाता है। शिविर में वाटरप्रूफ टेंट, गद्दे, पंखे और कूलर की समुचित व्यवस्था की गई है, ताकि श्रद्धालु आराम से सो सकें और उनकी थकान दूर हो सके।
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    शुद्ध शाकाहारी भोजन और फलाहार (Bhandara): सावन के व्रत और शुद्धता का पूरा ध्यान रखते हुए शिविर में 24 घंटे लंगर/भंडारा चलाया जा रहा है। यहां शिवभक्तों के लिए शुद्ध देसी घी का भोजन, चाय, दूध और व्रत रखने वाले कांवड़ियों के लिए विशेष फलाहार की व्यवस्था की गई है।
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    शुद्ध पेयजल (Pure Drinking Water): उमस भरी गर्मी और पैदल यात्रा में डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए ठंडे और शुद्ध पीने के पानी (RO Water) की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
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    प्राथमिक चिकित्सा (First Aid): पैरों में छाले, बुखार या मांसपेशियों में खिंचाव की स्थिति से निपटने के लिए शिविर में बुनियादी मेडिकल किट और दवाइयां भी उपलब्ध रखी गई हैं।
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सुरक्षा सर्वोपरि: CCTV कैमरे से रखी जा रही है पैनी नजर

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आज के समय में भीड़भाड़ वाले आयोजनों में सुरक्षा एक बहुत बड़ा मुद्दा होती है। कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों की संख्या में भीड़ उमड़ती है, जिसे नियंत्रित करना प्रशासन के साथ-साथ आयोजकों की भी जिम्मेदारी होती है।
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मोहन बाबा समिति ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरे शिविर परिसर को कैमरा निगरानी (CCTV Cameras) से लैस किया है।
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    सुरक्षा का चक्र: शिविर के प्रवेश द्वार, विश्राम स्थल और भोजन क्षेत्र में हाई-डेफिनिशन CCTV कैमरे लगाए गए हैं।
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    अवांछित तत्वों पर नजर: इससे न केवल श्रद्धालुओं का सामान सुरक्षित रहेगा, बल्कि किसी भी असामाजिक तत्व या संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत नजर रखी जा सकेगी। पुलिस प्रशासन को भी इस आधुनिक व्यवस्था से काफी मदद मिल रही है।
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आयोजकों और सेवादारों का निस्वार्थ समर्पण

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किसी भी बड़े आयोजन को सफल बनाने के पीछे सेवादारों की एक मजबूत टीम होती है। मोहन बाबा समिति के सदस्य दिन-रात एक करके इस शिविर की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित कर रहे हैं। वे बिना थके, पूरी श्रद्धा के साथ शिवभक्तों के स्वागत में पलकें बिछाए बैठे हैं।
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इस भव्य शिविर के आयोजन और सफल संचालन में जिन प्रमुख सदस्यों की सक्रिय और अहम भूमिका है, उनमें शामिल हैं:
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    मास्टर चंचल त्यागी (कुआखेड़ा वाले) - जो अपने कुशल मार्गदर्शन में पूरी टीम को एकजुट कर रहे हैं।
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    श्रीयांस उर्फ विशु त्यागी - युवा ऊर्जा के साथ व्यवस्थाओं की कमान संभाले हुए।
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    गजेंद्र जी
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    भगत जी
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  9. \r\n
    मोनू जी
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  11. \r\n
    मदन शर्मा जी
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  13. \r\n
    मोहित त्यागी
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इन सभी पदाधिकारियों और दर्जनों अन्य अज्ञात सेवादारों की मेहनत का ही परिणाम है कि शिविर में आने वाला हर शिवभक्त उनके आतिथ्य और सेवा से गदगद होकर जा रहा है। ये सभी कार्यकर्ता अपने घर-परिवार और काम-काज को छोड़कर 'नर सेवा ही नारायण सेवा' के सूत्र को चरितार्थ कर रहे हैं।
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कांवड़ सेवा का आध्यात्मिक महत्व

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सनातन धर्म में सावन के महीने में भगवान शिव का जलाभिषेक करना अत्यंत पुण्य का कार्य माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख है कि जो भक्त गंगाजल लेकर मीलों पैदल चलते हैं, उन पर महादेव की विशेष कृपा होती है। लेकिन, इससे भी बड़ा पुण्य उन लोगों को मिलता है जो इन थके हुए शिवभक्तों की सेवा करते हैं, उन्हें जल पिलाते हैं और भोजन कराते हैं।
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मेरठ की धरती इस बात की गवाह है कि यहां हर जाति, हर वर्ग के लोग एक साथ मिलकर कांवड़ियों की सेवा में जुट जाते हैं। मोहन बाबा समिति का यह प्रयास मेरठ की इसी गंगा-जमुनी तहजीब और गहरी धार्मिक आस्था का प्रतीक है।
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गढ़ रोड, मेरठ पर स्थित मोहन बाबा समिति का यह कांवड़ सेवा शिविर सिर्फ एक टेंट या भंडारा नहीं है; यह श्रद्धा, समर्पण और मानवता का एक जीता-जागता उदाहरण है। जब तक शिवरात्रि के पावन अवसर पर महादेव का जलाभिषेक संपन्न नहीं हो जाता, तब तक यह शिविर इसी प्रकार 24 घंटे शिवभक्तों की सेवा में तत्पर रहेगा। मास्टर चंचल त्यागी और उनकी पूरी टीम के इस पुनीत कार्य की क्षेत्र में चहुंओर प्रशंसा हो रही है। पूरा मेरठ शहर इस समय शिव की भक्ति और सेवा के रस में डूबा हुआ है।
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