मेरठ (Meerut News): उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath Government) का अपराधियों और अवैध कारोबारियों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) का खौफ अब धरातल पर साफ नजर आ रहा है। लंबे समय से कानून को ताक पर रखकर अपनी मनमानी करने वाले माफियाओं और अवैध दुकानदारों के खिलाफ मेरठ प्रशासन ने कमर कस ली है। मंगलवार की सुबह मेरठ शहर के कई इलाकों के लिए एक बड़ा संदेश लेकर आई, जब पुलिस, नगर निगम और खाद्य सुरक्षा विभाग का भारी अमला सड़कों पर उतरा और 'ऑपरेशन क्लीन' (Operation Clean) का शंखनाद कर दिया।READ ALSO:-यूपी में 'स्मार्ट मीटर' पर योगी सरकार का सबसे बड़ा यू-टर्न: सड़कों पर उतरी जनता तो बैकफुट पर आई सरकार, प्रीपेड व्यवस्था खत्म कर 'पोस्टपेड' लागू करने का आदेश
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इस महा-अभियान का मुख्य लक्ष्य शहर को उन अवैध मीट मंडियों और अतिक्रमण से मुक्त कराना था, जिन्होंने आम जनता का जीना मुहाल कर रखा था। लिसाड़ी गेट जैसे अति-संवेदनशील इलाके से लेकर माधवपुरम तक चले इस 'क्लीन स्वीप' ने अवैध कारोबारियों की कमर तोड़ कर रख दी है।
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आस्था और जनस्वास्थ्य से हो रहा था खुला खिलवाड़

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इस पूरे ऑपरेशन का मुख्य केंद्र मेरठ का प्रसिद्ध भूमिया माता मंदिर और भूमिया पुल (Bhumiya Pul) का इलाका रहा। पिछले कई महीनों से प्रशासन और स्थानीय पुलिस को इस इलाके से लगातार गंभीर शिकायतें मिल रही थीं।
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क्या थीं स्थानीय लोगों की शिकायतें?

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    धार्मिक भावनाएं आहत: भूमिया माता मंदिर में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन मंदिर के ठीक पास कुछ दबंगों ने अवैध रूप से मीट की मंडी सजा ली थी। खुलेआम जानवरों का कटान और सड़क पर बहते खून ने श्रद्धालुओं का रास्ता मुश्किल कर दिया था।
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    भयंकर दुर्गंध और गंदगी: नियमों को ठेंगा दिखाते हुए मीट कारोबारी जानवरों के अवशेष और गंदगी सीधे नालियों और सड़क पर फेंक रहे थे। इससे इलाके में भयंकर दुर्गंध फैली रहती थी, जिससे स्थानीय निवासियों का सांस लेना तक दूभर हो गया था।
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    बीमारियों का खतरा: खुले में लटकता मीट और उस पर भिनभिनाती मक्खियां सीधे तौर पर इलाके में महामारी और गंभीर बीमारियों को दावत दे रही थीं।
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इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने एक गुप्त रणनीति बनाई और मंगलवार को एक झटके में इस पूरी अवैध व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया।
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एक्शन में एसपी ट्रैफिक: लिसाड़ी गेट से माधवपुरम तक 'क्लीन स्वीप'

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मंगलवार को एसपी ट्रैफिक (SP Traffic) राजेश कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में एक अभूतपूर्व संयुक्त टीम का गठन किया गया। इस टीम में भारी पुलिस बल के साथ-साथ फूड सेफ्टी विभाग (Food Safety Department) के अधिकारी, नगर निगम के सैनिटेशन इंस्पेक्टर और कई थानों के प्रभारी (SHO) शामिल थे।
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जैसे ही इस भारी-भरकम फोर्स ने लिसाड़ी गेट से माधवपुरम की तरफ मार्च करना शुरू किया, अवैध मीट विक्रेताओं में भगदड़ मच गई। कई दुकानदार अपनी दुकानें खुली छोड़कर भागने लगे, लेकिन पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर रखी थी। एसपी ट्रैफिक के सख्त निर्देशों के बाद भूमिया माता मंदिर के पास स्थित इस पूरी अवैध मीट मंडी को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया और वहां रखा सारा दूषित व अवैध सामान जब्त कर लिया गया।
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फूड सेफ्टी एक्ट की उड़ रही थीं धज्जियां: 24 दुकानों पर एक्शन

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जब फूड सेफ्टी अधिकारियों ने इन दुकानों का निरीक्षण किया, तो वहां के हालात चौंकाने वाले थे। जनस्वास्थ्य के नाम पर वहां सिर्फ मौत का सामान बिक रहा था।
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    लाइसेंस नदारद: 90% से अधिक दुकानदारों के पास मीट बेचने का कोई वैध लाइसेंस या सरकारी अनुमति पत्र नहीं था।
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    साफ-सफाई शून्य: मीट काटने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे औजार जंग लगे हुए थे। मीट को ढकने के लिए न तो कोई जालीदार व्यवस्था थी और न ही फ्रिज या कोल्ड स्टोरेज का कोई इंतजाम था।
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    पानी की निकासी नहीं: दूषित पानी और खून की निकासी का कोई प्रबंध नहीं था, जिसके कारण वहां संक्रमण फैलने का खतरा चरम पर था।
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प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए मौके पर मौजूद दो दर्जन (24) से अधिक दुकानों को अवैध घोषित कर दिया और उनके खिलाफ कड़ा कानूनी शिकंजा कस दिया।
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नई न्याय संहिता (BNS) का चला डंडा: दर्ज हुई नामजद FIR

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मेरठ पुलिस ने इस बार केवल चालान काटने या चेतावनी देने की औपचारिकता नहीं निभाई, बल्कि हाल ही में देश में लागू हुए नए और सख्त आपराधिक कानूनों का इस्तेमाल किया है। दोषी पाए गए 24 दुकानदारों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं में नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है।
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किन धाराओं के तहत हुई कार्रवाई?

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    BNS धारा 290 (सार्वजनिक उपद्रव): यह धारा उन लोगों पर लगाई गई है जिन्होंने अपने अवैध कारोबार से आम जनता के लिए रास्ते रोके और सार्वजनिक स्थान पर उपद्रव व गंदगी का माहौल बनाया।
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    BNS धारा 292 (जनस्वास्थ्य को खतरे में डालना): इस धारा के तहत उन दुकानदारों को नामजद किया गया है, जो खुले में दूषित मीट बेचकर आम लोगों के स्वास्थ्य, सुविधा और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे थे।
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पुलिस ने इन सभी 24 दुकानों के बाहर FIR की कॉपी और कानूनी नोटिस चस्पा (Paste) कर दिया है।
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अतिक्रमण पर भी चला नगर निगम का 'पीला पंजा'

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'ऑपरेशन क्लीन' केवल मीट की दुकानों तक सीमित नहीं रहा। लिसाड़ी गेट और माधवपुरम के मुख्य मार्गों पर दुकानदारों ने सड़क के दोनों तरफ अवैध रूप से तख्त, ठेले और टिन शेड लगाकर भारी अतिक्रमण कर रखा था। इसके कारण हर दिन इस रूट पर भीषण ट्रैफिक जाम लगता था।
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नगर निगम के प्रवर्तन दस्ते (Enforcement Team) ने पुलिस सुरक्षा के बीच बुलडोजर और क्रेन की मदद से सड़क किनारे हुए इस सभी अवैध निर्माण को ढहा दिया। सड़क को अतिक्रमण मुक्त कर यातायात के लिए पूरी तरह से खोल दिया गया है। नगर निगम के अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि अगर किसी ने दोबारा सरकारी जमीन या सड़क पर एक इंच भी कब्जा किया, तो उसका सारा सामान जब्त कर सीधे नीलामी की प्रक्रिया में डाल दिया जाएगा।
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पुलिस का अल्टीमेटम: "सुधर जाएं, वरना सीधे जाएंगे जेल"

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इस विशाल कार्रवाई के बाद एसपी यातायात राजेश कुमार श्रीवास्तव ने मीडिया और स्थानीय लोगों को संबोधित करते हुए एक बेहद सख्त अल्टीमेटम जारी किया।
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"उत्तर प्रदेश में अब कानून व्यवस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनस्वास्थ्य और स्वच्छता हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। भूमिया पुल पर जो कार्रवाई हुई है, वह सिर्फ एक ट्रेलर है। यह अभियान आगे भी निरंतर और बिना किसी दबाव के जारी रहेगा। जो लोग सोचते हैं कि वे कानून से बड़े हैं, वे सुधर जाएं, अन्यथा अगली बार सिर्फ नोटिस नहीं मिलेगा, बल्कि उन्हें हथकड़ी लगाकर सीधे जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।" ### मेरठ वासियों से प्रशासन की अपील: 'जागरूक बनें, सूचना दें'
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इस सफल अभियान के बाद मेरठ प्रशासन ने आम जनता से भी सहयोग की एक विशेष अपील की है। शहर को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने के लिए नागरिकों की भागीदारी को अहम बताया गया है:
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    मिलावटी और खुले मीट का बहिष्कार करें: नागरिक अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और खुले में बिकने वाला, बिना जाली या फ्रिज के रखा गया दूषित मीट कतई न खरीदें।
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    प्रशासन की आंख-कान बनें: यदि आपके मोहल्ले, गली या किसी धार्मिक स्थल के आसपास अवैध रूप से मीट का कटान हो रहा है, या कोई सड़क पर अतिक्रमण कर रहा है, तो उसकी सूचना तत्काल डायल 112 या नगर निगम के कंट्रोल रूम को दें।
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    पहचान की गारंटी: प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जो भी व्यक्ति ऐसी अवैध गतिविधियों की सटीक सूचना देगा, उसकी पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाएगी और पुलिस तुरंत एक्शन लेगी।
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मेरठ की सड़कों पर लौटता शासन का इकबाल

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भूमिया माता मंदिर के पास चला यह 'ऑपरेशन क्लीन' इस बात की गवाही दे रहा है कि योगी सरकार के राज में प्रशासन अब शिकायतों को फाइलों में दबाकर नहीं रखता, बल्कि मौके पर जाकर त्वरित न्याय करता है। 24 दुकानदारों पर दर्ज हुई FIR ने पूरे जिले के अवैध कारोबारियों की नींद उड़ा दी है।
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स्थानीय जनता और श्रद्धालुओं ने प्रशासन की इस कार्रवाई का भव्य स्वागत किया है। लंबे समय बाद उन्हें गंदगी और जाम से मुक्ति मिली है। यह देखना अहम होगा कि पुलिस और नगर निगम की यह सख्ती कितने लंबे समय तक बरकरार रहती है और मेरठ शहर इस 'ऑपरेशन क्लीन' के बाद स्वच्छता और कानून व्यवस्था के मामले में खुद को कितना बेहतर साबित कर पाता है।
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