मेरठ (उत्तर प्रदेश)। देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर (NCR) इलाके में कार चोरी की घटनाएं अक्सर आम लोगों की नींद उड़ा देती हैं। जीवन भर की गाढ़ी कमाई से खरीदी गई कार जब घर के बाहर से चंद मिनटों में गायब हो जाती है, तो पीड़ित परिवार गहरे सदमे में चला जाता है। लेकिन ये चोरी की गाड़ियां आखिर जाती कहां हैं? उत्तर प्रदेश की मेरठ एसटीएफ (Special Task Force) ने इस रहस्य से पर्दा उठाते हुए एक बेहद शातिर और हाईटेक अंतरराज्यीय (Interstate) वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है।READ ALSO:-बिजनौर में खुशियां बनीं मातम: चांदपुर नुमाइश मेले में 'मौत के झूले' से गिरकर फैज़ की दर्दनाक मौत, बिना परमिशन चल रहा था झूला!
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मेरठ एसटीएफ की टीम ने भावनपुर थाना क्षेत्र में एक सफल ऑपरेशन को अंजाम देते हुए 4 ऐसे शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो दिल्ली-एनसीआर से लग्जरी कारें चुराते थे, उनके फर्जी कागजात (RC) तैयार करते थे और फिर उन्हें जम्मू-कश्मीर जैसे दूर-दराज के राज्यों में ऊंचे दामों पर बेच देते थे। इस गिरोह के तार श्रीनगर से लेकर मेरठ के आरटीओ (RTO) ऑफिस तक जुड़े हुए थे। आइए, इस पूरी खुफिया कार्रवाई और गिरोह के 'मोडस ऑपरेंडी' (काम करने के तरीके) को विस्तार से समझते हैं।
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कैसे रची गई गिरफ्तारी की रूपरेखा?

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दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ समय से वाहन चोरी की घटनाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा था। इन घटनाओं पर लगाम लगाने और इसके पीछे काम कर रहे संगठित सिंडिकेट को खत्म करने के लिए एसटीएफ मुख्यालय से कड़े निर्देश जारी किए गए थे।
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मेरठ एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) बृजेश कुमार सिंह ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए एक विशेष टीम का गठन किया। मुखबिरों का जाल बिछाया गया और सर्विलांस टीम को अलर्ट मोड पर रखा गया। पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली कि यह अंतरराज्यीय गिरोह मेरठ के रास्ते किसी चोरी की गाड़ी को ठिकाने लगाने की फिराक में है।
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वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस के हत्थे चढ़े आरोपी: इस सटीक सूचना के आधार पर एसटीएफ की मेरठ इकाई ने भावनपुर थाना क्षेत्र में परीक्षितगढ़ रोड पर घेराबंदी कर दी। रिंग रोड के पास एक सघन चेकिंग अभियान शुरू किया गया। कुछ ही देर में पुलिस को एक संदिग्ध 'विटारा' (Vitara) कार आती हुई दिखाई दी। एसटीएफ टीम ने तुरंत कार को रुकने का इशारा किया। कार में चार व्यक्ति सवार थे।
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जब पुलिस ने उनसे पूछताछ शुरू की, तो चारों की बातों में भारी विरोधाभास नजर आया। उनके घबराए हुए चेहरों और गोलमोल जवाबों ने पुलिस का शक और गहरा कर दिया। इसके बाद जब एसटीएफ ने सख्ती दिखाई और कड़ाई से पूछताछ की, तो चारों आरोपियों ने टूटकर अपना जुर्म कबूल कर लिया। उन्होंने माना कि वे एक संगठित गिरोह का हिस्सा हैं और चोरी की गाड़ियां ठिकाने लगाने का ही काम करते हैं।
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मेरठ RTO के पास चल रहा था फर्जीवाड़े का 'कंट्रोल रूम'

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इस पूरे नेटवर्क की सबसे अहम और खतरनाक कड़ी 'कागजातों का फर्जीवाड़ा' था। गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों में से एक 'इफ्तकार' ने पूछताछ में जो खुलासे किए, उसने पुलिस महकमे को भी हैरान कर दिया।
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    दलाली और फर्जी आरसी: इफ्तकार ने बताया कि मेरठ आरटीओ (RTO) ऑफिस के पास उसकी एक दुकान है। वह वहां दिन के उजाले में दलाली का काम करता था, लेकिन उसका असली धंधा चोरी की गाड़ियों को 'सफेद' (Legal) करना था।
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    मोटी रकम की वसूली: अपने गिरोह के अन्य साथियों (दानिश, संचित तिवारी और साजिद नजीर भट्ट) के कहने पर इफ्तकार चोरी की गई गाड़ियों की हूबहू असली दिखने वाली फर्जी आरसी (Registration Certificate) और अन्य दस्तावेज तैयार करता था। एसटीएफ के मुताबिक, इफ्तकार एक गाड़ी के फर्जी कागजात तैयार करने के एवज में डेढ़ से दो लाख रुपये तक की मोटी रकम वसूलता था।
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फाइनेंस डिफॉल्टर गाड़ियों का भी होता था खेल: गिरोह केवल चोरी की गाड़ियों पर ही निर्भर नहीं था। गिरफ्तार आरोपी दानिश और संचित तिवारी का काम एनसीआर से ऐसी गाड़ियों को औने-पौने दामों में खरीदना भी था, जो 'फाइनेंस डिफॉल्टर' होती थीं (जिनकी किश्तें नहीं चुकाई गई हों)। इन गाड़ियों को बैंक या फाइनेंस कंपनी सीज करे, उससे पहले ही ये आरोपी इन्हें खरीद लेते थे, इफ्तकार से उनके जाली दस्तावेज बनवाते थे और फिर इन्हें दूर के राज्यों में बेचकर भारी मुनाफा कमाते थे।
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चोरी का जम्मू-कश्मीर (श्रीनगर) कनेक्शन

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चोरी की गई इन गाड़ियों को एनसीआर या उत्तर प्रदेश में बेचना जोखिम भरा था, इसलिए इस गिरोह ने अपना सुरक्षित बाजार जम्मू-कश्मीर (विशेषकर श्रीनगर) को बना रखा था।
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    फरवरी 2026 का 'क्रेटा' मामला: पूछताछ में एक बड़ा खुलासा यह हुआ कि इस गिरोह ने इसी साल फरवरी 2026 में दिल्ली से एक सफेद रंग की 'क्रेटा' (Creta) कार चुराई थी। इफ्तकार द्वारा उस कार के फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और फिर उसे श्रीनगर ले जाकर साढ़े चार लाख (4.5 Lakh) रुपये में बेच दिया गया।
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    विटारा की थी अगली बारी: चेकिंग के दौरान जिस 'विटारा' कार में ये आरोपी पकड़े गए, उस पर भी बैंक का लोन बकाया था (फाइनेंस डिफॉल्टर)। आरोपी इसकी भी फर्जी आरसी बनवाकर इसे जल्द ही श्रीनगर भेजने की पूरी तैयारी कर चुके थे।
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श्रीनगर का रहने वाला आरोपी 'साजिद नजीर भट्ट' इस गिरोह का कश्मीर कनेक्शन था। उसी की जिम्मेदारी होती थी कि वह वहां के स्थानीय खरीदारों को फंसाकर ये गाड़ियां बेचे। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के तार श्रीनगर की वादियों से लेकर मेरठ के तंग मोहल्लों तक बेहद मजबूती से जुड़े हुए थे।
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कौन हैं ये शातिर आरोपी? (गिरफ्तार और फरार)

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एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:
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    इफ्तकार: निवासी लोहियानगर (मेरठ) - फर्जी दस्तावेजों का मास्टरमाइंड।
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    दानिश अली: निवासी नूरनगर (मेरठ) - चोरी और डिफॉल्टर गाड़ियां खरीदने वाला।
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    संचित तिवारी: निवासी शताब्दी नगर (मेरठ) - दानिश का साथी और गाड़ियों का सप्लायर।
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    साजिद नजीर भट्ट: निवासी श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) - कश्मीर में गाड़ियों को बेचने वाला मुख्य एजेंट।
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फरार साथियों की सरगर्मी से तलाश: इन चार प्रमुख सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच अभी रुकी नहीं है। पूछताछ में इस सिंडिकेट के दो अन्य प्रमुख सदस्यों—असलम और तरीकत उर्फ चाचा—के नाम भी सामने आए हैं। एसटीएफ की कई टीमें इन दोनों फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं।
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आगे की जांच और एसटीएफ की कार्रवाई

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पकड़े गए आरोपियों के पास से पुलिस ने बरामद विटारा कार के अलावा कई फर्जी दस्तावेज और मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। एसटीएफ की साइबर टीम इन मोबाइल फोन्स के डेटा, व्हाट्सएप चैट्स और कॉल डिटेल्स को खंगाल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह ने अब तक कितनी गाड़ियों को अपना शिकार बनाया है और आरटीओ कार्यालय के भीतर क्या कोई 'विभीषण' इनकी मदद तो नहीं कर रहा था।
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मेरठ एसटीएफ की इस बड़ी और सफल कार्रवाई से कार चोरी और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले रैकेट पर तगड़ा शिकंजा कसा है। इस खुलासे से न केवल एनसीआर के वाहन मालिकों को थोड़ी राहत मिलेगी, बल्कि सेकंड-हैंड (पुरानी) गाड़ियां खरीदने वाले लोगों के लिए भी यह एक सबक है कि वे किसी भी वाहन को खरीदने से पहले उसके कागजातों की संबंधित आरटीओ कार्यालय से पूरी तरह जांच अवश्य करा लें।
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