मेरठ (शासन एवं धर्म डेस्क): श्रावण मास (सावन) की शुरुआत के साथ ही उत्तर भारत की सड़कों पर भगवा रंग और 'हर-हर महादेव' के जयकारे गूंजने लगते हैं। शिवभक्तों (कांवड़ियों) की यह विशाल और ऐतिहासिक कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) किसी महाकुंभ से कम नहीं होती। करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार, गोमुख और ऋषिकेश से पवित्र गंगाजल लेकर अपने गंतव्यों की ओर मीलों पैदल सफर करते हैं। इस साल 2026 में यह पवित्र यात्रा 30 जुलाई से प्रारंभ होकर 11 अगस्त (सावन शिवरात्रि) तक चलेगी, जिस दिन लाखों कांवड़िए भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करेंगे।READ ALSO:-मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा 2026 का 'महा-प्लान' तैयार: नगर पालिका की हाई-लेवल बैठक में चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप के कड़े निर्देश— "शिवभक्तों की राह में न आए कोई बाधा"
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इतने विशाल जनसमूह को सुरक्षित, व्यवस्थित और बिना किसी बाधा के उनके गंतव्य तक पहुंचाना प्रशासन के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता। इसी चुनौती को साधने और एक फूलप्रूफ (Foolproof) सुरक्षा चक्र तैयार करने के लिए सोमवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजधानी कहे जाने वाले मेरठ (Meerut) में एक अति-महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय अंतरराज्यीय समन्वय बैठक का आयोजन किया गया।
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मेरठ के कमिश्नरी सभागार में आयोजित इस महा-मंथन में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव (Chief Secretary) एसपी गोयल और पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण सहित 5 राज्यों— उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड और राजस्थान के वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने दोपहर 12 बजे से लेकर 3 बजे तक गहन मंथन किया। आइए, सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि इस हाई-लेवल मीटिंग में कांवड़ यात्रियों और आम जनता के लिए क्या-क्या बड़े फैसले लिए गए हैं।
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1. 5 राज्यों का समन्वय: बॉर्डर पर 'सुपर सिक्योरिटी' और ज्वाइंट रूट प्लानिंग
\r\n\r\nकांवड़ यात्रा किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रहती। कांवड़िए उत्तराखंड से जल उठाकर यूपी से होते हुए दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान तक जाते हैं। इसलिए सभी राज्यों के बीच तालमेल होना बेहद जरूरी है। बैठक में सभी पांचों राज्यों के अधिकारियों ने अपने-अपने राज्यों में कांवड़ रूट पर की गई तैयारियों का विस्तृत प्रजेंटेशन (Presentation) पेश किया।
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- \r\n बॉर्डर सीलिंग और सुरक्षा: तय किया गया कि हर राज्य के बॉर्डर (सीमाओं) पर विशेष और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान किया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n खुफिया तंत्र रहेगा एक्टिव: असामाजिक तत्वों और आतंकी खतरों से निपटने के लिए डॉग स्क्वायड (Dog Squad), बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad), इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), और एलआईयू (LIU) की टीमें 24 घंटे एक्टिव मोड में रहेंगी। संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नज़र रखी जाएगी।\r\n \r\n
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2. DGP राजीव कृष्ण का कड़ा एक्शन प्लान: आसमान से लेकर ज़मीन तक अभेद्य सुरक्षा
\r\n\r\nयूपी के डीजीपी राजीव कृष्ण ने कांवड़ रूट की सुरक्षा व्यवस्था का खाका पेश करते हुए स्पष्ट किया कि सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पूरा कांवड़ मार्ग एक सुरक्षित कॉरिडोर में तब्दील किया जाएगा।
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- \r\n हेलिकॉप्टर और ड्रोन से निगहबानी: पूरे कांवड़ रूट की आसमान से निगरानी की जाएगी। इसके लिए पुलिस विभाग के हेलिकॉप्टर्स (Helicopters) और हाई-रेज़ोल्यूशन ड्रोन कैमरों (Drones) का इस्तेमाल होगा। इसके अलावा चप्पे-चप्पे पर CCTV कैमरे लगाए जाएंगे जो सीधे कंट्रोल रूम से जुड़े होंगे।\r\n \r\n
- \r\n मीट और शराब की दुकानें पूर्णतः बंद: शिवभक्तों की आस्था और धार्मिक भावनाओं के सम्मान को सर्वोपरि रखते हुए, डीजीपी ने सख्त आदेश दिए हैं कि पूरे कांवड़ रूट पर पड़ने वाली सभी मीट (मांस) और शराब (Liquor) की दुकानें यात्रा समाप्त होने तक पूरी तरह से बंद रखी जाएंगी।\r\n \r\n
- \r\n घाटों पर बैरिकेडिंग: हरिद्वार और अन्य जल उठाने वाले स्नान घाटों पर गहरे पानी से बचाने के लिए मजबूत बैरिकेडिंग और गोताखोरों (Divers) की तैनाती बढ़ाई जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n महिला कांवड़ियों के लिए विशेष सुविधा: महिला और पुरुष कांवड़ियों के लिए रास्तों और शिविरों में अलग-अलग शौचालय, चेंजिंग रूम और स्नान की सुरक्षित व्यवस्था की जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n शिविरों के नियम: कांवड़ सेवा शिविर (Camps) मुख्य सड़क से बाईं ओर कम से कम 20 फीट अंदर बनाए जाएंगे, ताकि सड़क पर जाम न लगे।\r\n \r\n
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3. डीजे (DJ) और डाक कांवड़ पर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का होगा सख्ती से पालन
\r\n\r\nकांवड़ यात्रा में डीजे (DJ) और देशभक्ति व शिव भजनों का विशेष महत्व होता है, लेकिन अक्सर डीजे की अत्यधिक ऊंचाई और कान फोड़ू आवाज़ हादसों का कारण बनती है। डीजीपी राजीव कृष्ण ने इसे लेकर स्पष्ट और कड़े नियम लागू किए हैं:
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- \r\n 12 फीट से ऊंचे डीजे पर प्रतिबंध: किसी भी हाल में डीजे की ऊंचाई (Height) 12 फीट से ज्यादा नहीं होगी। इसका मुख्य कारण रास्तों में लटकते हाई-टेंशन बिजली के तार और पुल हैं, जिनसे टकराकर पूर्व में कई दर्दनाक हादसे हो चुके हैं।\r\n \r\n
- \r\n आवाज़ की सीमा (Decibel Limit): डीजे की आवाज़ 75 डेसिबल (75 Decibels) से अधिक नहीं होगी। मानक से अधिक शोर करने वालों पर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के तहत कार्रवाई होगी।\r\n \r\n
- \r\n डीजे कंपटीशन पर पूर्ण रोक: रास्तों में कई बार कांवड़िए डीजे की आवाज़ को लेकर आपस में कंपटीशन करने लगते हैं। डीजे संचालकों को सख्त चेतावनी दी गई है कि इस प्रकार की कोई भी प्रतियोगिता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n डाक कांवड़ में रेस पर लगाम: डाक कांवड़ (Dak Kanwar) लेकर दौड़ने वाले वाहनों की रफ्तार अक्सर जानलेवा साबित होती है। इसे रोकने के लिए डाक कांवड़ समूहों के इंचार्ज/मुखिया को पाबंद किया गया है कि वे अपने जत्थे में रेस (Racing) या स्टंटबाज़ी न होने दें।\r\n \r\n
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4. मुख्य सचिव का मानवीय आदेश: "कांवड़ खंडित हो तो तुरंत उपलब्ध कराएं गंगाजल"
\r\n\r\nबैठक के दौरान यूपी के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने एक बेहद संवेदनशील और आस्था से जुड़ा आदेश जारी किया, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। कांवड़िए बड़ी श्रद्धा से मीलों दूर से जल लाते हैं, लेकिन कई बार भीड़ या किसी दुर्घटना के कारण उनकी कांवड़ खंडित (Kanwar Khandit) हो जाती है, जिससे शिवभक्त गहरे अवसाद में चले जाते हैं।
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- \r\n तत्काल गंगाजल की व्यवस्था: मुख्य सचिव ने कहा कि अगर रास्ते में किसी भी कारण से किसी शिवभक्त की कांवड़ खंडित होती है, तो प्रशासन उसे तत्काल पवित्र गंगाजल उपलब्ध कराएगा।\r\n \r\n
- \r\n रिजर्व टीमें: इसके लिए प्रशासन पहले से ही हरिद्वार से गंगाजल मंगाकर सुरक्षित रखेगा और विशेष टीमें हर जिले में तैनात रहेंगी ताकि शिवभक्तों की आस्था को ठेस न पहुंचे और वे अपनी यात्रा पूरी कर सकें।\r\n \r\n
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5. ढाबों पर शुद्ध शाकाहारी भोजन और विभागों की ज़िम्मेदारी तय
\r\n\r\nकांवड़ यात्रा को सफल बनाने के लिए केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि लोक निर्माण विभाग (PWD), बिजली और सिंचाई विभाग की भूमिका भी अहम होती है। मुख्य सचिव ने इन विभागों के लिए भी टास्क तय कर दिए हैं:
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- \r\n पीडब्ल्यूडी (PWD) की ज़िम्मेदारी: PWD विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वह कांवड़ मार्गों को गड्ढामुक्त करे और रास्तों को पूरी तरह से दुरुस्त करे।\r\n \r\n
- \r\n सिंचाई विभाग: गर्मी और उमस को देखते हुए कांवड़िए अक्सर नहरों के किनारे से गुजरते हैं। सिंचाई विभाग को नहर में पानी की उचित मात्रा बनाए रखने और निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n बिजली विभाग (UPPCL): बिजली की लापरवाही से होने वाले हादसों को रोकने के लिए कांवड़ रूट के सभी बिजली के खंभों (Poles) को पॉलीथिन से और सड़क किनारे रखे ट्रांसफॉर्मर को मजबूत जाली (Mesh) से कवर किया जा रहा है।\r\n \r\n
- \r\n खाने की गुणवत्ता (Food Safety): रूट पर पड़ने वाले सभी ढाबों और होटलों पर केवल शुद्ध शाकाहारी (Pure Veg) खाना ही परोसा जाएगा। खाद्य सुरक्षा विभाग (FDA) की टीमें लगातार होटलों और कांवड़ सेवा शिविरों में बन रहे भोजन की गुणवत्ता और शुद्धता की जांच (Sampling) करेंगी।\r\n \r\n
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6. ट्रैफिक डायवर्जन: शहर में भारी वाहनों की 'नो-एंट्री'
\r\n\r\nकांवड़ियों के सुगम मार्ग के लिए एक व्यापक ट्रैफिक प्लान तैयार किया गया है।
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- \r\n शहर में भारी वाहनों (ट्रकों, डंपरों, बसों) का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित (No-Entry) रहेगा।\r\n \r\n
- \r\n प्रमुख मार्गों को दो हिस्सों में बांटा जाएगा: सड़क की एक लेन (Left Lane) विशेष रूप से केवल कांवड़ियों के पैदल चलने के लिए रिजर्व होगी, जबकि दूसरी लेन (Right Lane) से केवल जरूरी और छोटे वाहन (एम्बुलेंस, कार) ही गुजर सकेंगे।\r\n \r\n
- \r\n राष्ट्रीय राजमार्गों (NH), राज्य मार्गों (SH) और एक्सप्रेस-वे (Expressways) के एंट्री और एग्जिट प्वाइंट पर पर्याप्त संख्या में पुलिस और प्रशासनिक कर्मियों की तैनाती रहेगी, जिससे श्रद्धालु भ्रमित न हों और उन्हें तय सुरक्षित रास्तों पर भेजा जा सके।\r\n \r\n
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7. हाई-टेक मेडिकल इमरजेंसी प्लान
\r\n\r\nजुलाई-अगस्त के महीने में भारी उमस और मीलों पैदल चलने के कारण कांवड़ियों के पैरों में छाले पड़ना, डिहाइड्रेशन (Dehydration) और बुखार आना आम बात है। मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि कांवड़ उठाने की जगहों, प्रमुख स्नान घाटों और मंदिरों के पास मजबूत चिकित्सा व्यवस्था हो।
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- \r\n रूट पर हर कुछ किलोमीटर की दूरी पर चिकित्सा शिविर (Medical Camps) लगाए जाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n संकरे रास्तों पर तुरंत मदद पहुंचाने के लिए 'बाइक एंबुलेंस' (Bike Ambulances) तैनात की जाएंगी।\r\n \r\n
- \r\n आस-पास के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संख्या में बेड रिज़र्व (Beds Reserved) रखे जाएंगे ताकि श्रद्धालुओं को तत्काल इलाज मिल सके।\r\n \r\n
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8. एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का उद्घाटन और अफवाहबाजों को चेतावनी
\r\n\r\nकमिश्नरी में बैठक समाप्त होने के बाद डीजीपी राजीव कृष्ण पुलिस लाइन पहुंचे। वहां उन्होंने अत्याधुनिक 'एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर' (Integrated Command and Control Center) का विधिवत उद्धाटन किया। इसी सेंटर से पूरे जोन में लगे CCTV कैमरों और ड्रोन की लाइव फीड के जरिए यात्रा की 24 घंटे निगरानी की जाएगी।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में कड़ा संदेश: पत्रकारों से वार्ता करते हुए डीजीपी ने कहा, "हर साल कांवड़ यात्रा में नई चुनौतियां आती हैं। इस बार भी कुछ विशेष चुनौतियां हैं, जिन्हें देखते हुए अफसरों को समय रहते समस्याओं का समाधान निकालने के निर्देश दिए गए हैं।"
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उन्होंने सोशल मीडिया पर विशेष नज़र रखने की बात कही। डीजीपी ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि "जो भी व्यक्ति या असामाजिक तत्व सोशल मीडिया के जरिए किसी भी प्रकार की अफवाह (Fake News), भ्रामक सूचना या सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली पोस्ट फैलाएगा, उससे पुलिस बेहद सख्ती (NSA/Gangster Act) से निपटेगी।"
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9. ऐतिहासिक औघड़नाथ मंदिर में जलाभिषेक कर मांगी मंगल कामना
\r\n\r\nतमाम प्रशासनिक बैठकों और व्यवस्थाओं का जायज़ा लेने के बाद मुख्य सचिव एसपी गोयल और डीजीपी राजीव कृष्ण ने मेरठ छावनी स्थित ऐतिहासिक और प्रसिद्ध 'बाबा औघड़नाथ मंदिर' (Augharnath Temple) का दौरा किया।
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अधिकारियों ने पूरी श्रद्धा के साथ मंदिर में परंपरागत तरीके से बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक किया और प्रदेश में शांति व कांवड़ यात्रा की निर्विघ्न सफलता की कामना की। इस अहम मौके पर एडीजी मेरठ जोन भानु भास्कर, मंडलायुक्त भानु चंद गोस्वामी, डीआईजी रेंज कलानिधि नैथानी, डीएम डा. वीके सिंह और एसएसपी अविनाश पाण्डेय समेत कई पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
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ज्ञान खंड: कांवड़ यात्रा एक नज़र में (कहाँ से कहाँ जाते हैं शिवभक्त?)
\r\n\r\nकई लोगों के मन में यह सवाल होता है कि आखिर कांवड़िए जल कहाँ से लाते हैं और कहाँ चढ़ाते हैं?
\r\n\r\nकहाँ से उठाते हैं जल? कांवड़ यात्रा का मुख्य जल स्रोत उत्तराखंड स्थित हरिद्वार (Har Ki Pauri), ऋषिकेश, नीलकंठ और गोमुख होता है। इसके अलावा कुछ श्रद्धालु बिहार के सुल्तानगंज से भी जल उठाते हैं। यूपी, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के शिवभक्त इन्ही पावन स्थलों से गंगाजल कलशों (कांवड़) में भरते हैं।
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कहाँ करते हैं जलाभिषेक? जल उठाने के बाद शिवभक्त मीलों की पदयात्रा करते हुए अपने-अपने शहरों और गांवों के प्राचीन शिव मंदिरों की ओर प्रस्थान करते हैं। पश्चिमी यूपी और एनसीआर के सबसे प्रसिद्ध जलाभिषेक केंद्रों में शामिल हैं:
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- \r\n औघड़नाथ मंदिर (Augharnath Temple), मेरठ\r\n \r\n
- \r\n पुरा महादेव मंदिर (Pura Mahadev), बागपत\r\n \r\n
- \r\n दूधेश्वर नाथ मंदिर (Dudheshwar Nath Temple), गाजियाबाद\r\n \r\n
- \r\n काशी विश्वनाथ (Kashi Vishwanath), वाराणसी\r\n \r\n
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इन मंदिरों में 11 अगस्त (शिवरात्रि) के दिन जलाभिषेक के साथ ही इस पवित्र यात्रा का पूर्ण रूप से समापन होगा।
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प्रशासन की यह महा-तैयारी इस बात का प्रमाण है कि आस्था के इस महाकुंभ में शिवभक्तों की सुरक्षा ही सर्वोपरि है। हर-हर महादेव!
Sabse pehle comment karne wale banein.