मेरठ (06 अप्रैल 2026): कॉलेज के वार्षिक उत्सव (Fest) हमेशा से ही छात्र-छात्राओं के लिए मौज-मस्ती, कला के प्रदर्शन और यादगार पलों को संजोने का एक बेहतरीन अवसर होते हैं। लेकिन जब यही जश्न और उत्साह अनुशासनहीनता और हिंसा की भेंट चढ़ जाए, तो पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं। ऐसा ही एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर से सामने आया है। दिल्ली-देहरादून हाईवे पर स्थित प्रतिष्ठित सुभारती यूनिवर्सिटी (Subharti University) के प्रांगण में आयोजित एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम उस वक्त अखाड़े में तब्दील हो गया, जब मशहूर पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा के लाइव परफॉर्मेंस के दौरान हजारों छात्रों की भीड़ बेकाबू हो गई और उनके बीच जमकर लात-घूंसे चलने लगे।READ ALSO:-सोने-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल: 24 कैरेट सोना 1.48 लाख के पार, नए सरकारी नियमों ने बदली बाजार की चाल, जानें असली जेवर पहचानने के सटीक तरीके
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इस हिंसक घटना ने न केवल विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था (Security Arrangements) की कलई खोल कर रख दी है, बल्कि वहां मौजूद हजारों छात्र-छात्राओं की जान भी जोखिम में डाल दी थी। आइए इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।
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'स्पार्क-2026' का रंगारंग मंच और संगीत का खुमार

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सुभारती विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा परिसर में दो दिवसीय वार्षिक सांस्कृतिक समारोह ‘स्पार्क-2026’ (Spark-2026) का भव्य आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को अपनी प्रतिभा दिखाने का एक मंच प्रदान करना और उनके लिए एक मनोरंजक संध्या का आयोजन करना था। समारोह के पहले दिन कई रंगारंग कार्यक्रम हुए, लेकिन असली उत्साह दूसरे दिन का था।
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समारोह के दूसरे दिन के मुख्य आकर्षण के रूप में जानी-मानी पंजाबी सिंगर और यूथ आइकन सुनंदा शर्मा (Sunanda Sharma) का लाइव कॉन्सर्ट रखा गया था। सुनंदा शर्मा के गानों का युवाओं में भारी क्रेज है। इसी क्रेज के चलते शाम ढलते ही विश्वविद्यालय के प्रांगण में छात्रों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। आस-पास के परिसरों से भी छात्र इस परफॉर्मेंस को देखने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे थे। जैसे ही सुनंदा शर्मा ने मंच पर एंट्री ली और अपने लोकप्रिय गानों की शुरुआत की, पूरा ग्राउंड तालियों और सीटियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। सब कुछ योजना के अनुसार चल रहा था, लेकिन यह संगीतमय माहौल कुछ ही देर में खौफनाक मंजर में बदल गया।
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विवाद की जड़: मंच के पास जाने और वीआईपी सीट की होड़

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प्रत्यक्षदर्शियों और मौके पर मौजूद छात्रों के अनुसार, विवाद की शुरुआत एक बेहद छोटी सी बात से हुई। जब लाइव कॉन्सर्ट अपने चरम पर था, तब हर कोई मंच (Stage) के करीब जाना चाहता था ताकि अपने पसंदीदा कलाकार को करीब से देख सके और अपने मोबाइल फोन में उनके वीडियो रिकॉर्ड कर सके।
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मंच के बिल्कुल सामने और आगे की कतारों (Front Rows) में खड़े होने और सीटों पर कब्जा जमाने को लेकर छात्रों के दो अलग-अलग गुटों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पहले तो यह सिर्फ एक मामूली कहासुनी और जुबानी जंग तक सीमित था। वहां मौजूद बाउंसरों और आयोजकों ने उन्हें शांत कराने की कोशिश भी की, लेकिन युवाओं का जोश और गुस्सा उस वक्त आउट ऑफ कंट्रोल हो गया। देखते ही देखते इस विवाद ने एक हिंसक रूप ले लिया और दोनों गुट पूरी तरह से आमने-सामने आ गए।
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लात-घूंसे, फटे कपड़े और मची भारी भगदड़

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गायन और संगीत के बीच अचानक गालियों और चीख-पुकार की आवाजें आने लगीं। दर्जनों छात्र एक-दूसरे पर जंगली जानवरों की तरह टूट पड़े। इस दौरान जमकर लात-घूंसे और बेल्टें चलीं। जो कुर्सियां दर्शकों के बैठने के लिए लगाई गई थीं, उनका इस्तेमाल हथियार के रूप में किया जाने लगा।
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इस अप्रत्याशित और हिंसक माहौल को देखकर वहां मौजूद आम छात्र-छात्राओं, विशेषकर लड़कियों में भारी दहशत फैल गई। अपनी जान बचाने के लिए लोगों ने इधर-उधर भागना शुरू कर दिया, जिससे वहां भगदड़ (Stampede) जैसी बेहद खतरनाक स्थिति उत्पन्न हो गई। भागदौड़ और मारपीट के इस खौफनाक मंजर में कई छात्रों के कपड़े पूरी तरह से फट गए। कई छात्र जमीन पर गिर गए जिन्हें भीड़ ने रौंदने की कोशिश की, जिससे उनके गंभीर रूप से घायल होने और लहूलुहान होने की सूचना मिली है।
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आयोजकों के फूले हाथ-पांव, बीच में रोकना पड़ा शो

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हालात इतने बेकाबू हो गए कि विश्वविद्यालय प्रशासन और कार्यक्रम के आयोजकों के हाथ-पांव फूल गए। मंच से लगातार शांति बनाए रखने की अपील की जाती रही, लेकिन हिंसक हो चुके छात्रों पर किसी बात का कोई असर नहीं हो रहा था। अंततः स्थिति की गंभीरता और सुरक्षा के खतरे को भांपते हुए आयोजकों को सुनंदा शर्मा का लाइव कॉन्सर्ट तुरंत प्रभाव से अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। कलाकारों को सुरक्षित रूप से बैकस्टेज ले जाया गया। संगीत बंद होने के बावजूद काफी देर तक ग्राउंड में अराजकता और मारपीट का दौर जारी रहा।
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पुलिस की एंट्री और उपद्रवियों का दुस्साहस

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मामला हाथ से निकलता देख विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी। खबर मिलते ही भारी संख्या में सुभारती चौकी पुलिस सायरन बजाती हुई आयोजन स्थल पर पहुंची। पुलिस ने लाठियां फटकार कर भीड़ को तितर-बितर करने और लड़ रहे गुटों को अलग करने का प्रयास किया।
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लेकिन हैरानी की बात यह रही कि खून सवार इन उपद्रवी छात्रों के हौसले इतने बुलंद थे कि वे शांति बहाल करने आई पुलिस टीम से ही उलझ पड़े। कुछ छात्रों ने पुलिसकर्मियों के साथ भी बदसलूकी और नोकझोंक की। पुलिस को इस बेकाबू भीड़ पर नियंत्रण पाने के लिए काफी पसीना बहाना पड़ा। अतिरिक्त पुलिस बल बुलाए जाने और कड़ी मशक्कत के बाद अंततः पुलिस और कॉलेज प्रबंधन ने हालात को काबू में किया। माहौल थोड़ा शांत होने के बाद, भारी पुलिस सुरक्षा व्यवस्था के बीच कार्यक्रम को दोबारा शुरू कराया जा सका।
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वायरल वीडियो ने खोली सुभारती प्रबंधन की पोल

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इस पूरी घटना के दौरान वहां मौजूद कई छात्रों ने अपने स्मार्टफोन से इस खूनी संघर्ष का वीडियो बना लिया। कुछ ही घंटों में ये वीडियो व्हाट्सएप, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आग की तरह फैल गए। वायरल हो रहे इन वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे हजारों की भीड़ के बीच कुछ छात्र गुंडागर्दी पर उतारू हैं और एक-दूसरे को बेरहमी से पीट रहे हैं।
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सोशल मीडिया पर लोग अब सीधे तौर पर विश्वविद्यालय की साख और वहां पढ़ने वाले छात्रों की मानसिकता पर सवाल उठा रहे हैं। अभिभावक भी इस वीडियो को देखकर दहशत में हैं और अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
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पुलिस कार्रवाई और प्रबंधन की चुप्पी

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इस गंभीर मामले में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर जब जानी थाना पुलिस से संपर्क किया गया, तो पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें अब तक इस मामले में किसी भी छात्र, गुट या विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई लिखित शिकायत (तहरीर) प्राप्त नहीं हुई है। शिकायत न मिलने के कारण अभी तक कोई आधिकारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है, लेकिन पुलिस वायरल वीडियो के आधार पर उपद्रवियों की पहचान करने में जुटी है।
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वहीं दूसरी ओर, इतने बड़े बवाल के बाद सुभारती विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से एक रहस्यमयी चुप्पी साध ली गई है। मीडिया कर्मियों द्वारा इस पूरे घटनाक्रम और सुरक्षा चूक पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए विश्वविद्यालय के निदेशक डॉ. कृष्णमूर्ति सेन से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन न तो उन्होंने फोन उठाया और न ही कोई आधिकारिक बयान (Press Release) जारी किया गया है।
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उठ रहे हैं गंभीर सवाल

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यह घटना कई ऐसे सुलगते हुए सवाल पीछे छोड़ गई है, जिनका जवाब विश्वविद्यालय प्रशासन को देना ही होगा:
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    जब हजारों की संख्या में छात्रों की भीड़ जुटने का अनुमान था, तो पर्याप्त संख्या में निजी बाउंसर और पुलिस बल की तैनाती क्यों नहीं की गई?
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    विश्वविद्यालय परिसर के अंदर इस स्तर की गुंडागर्दी करने वाले छात्रों पर प्रबंधन क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा?
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    यदि इस भगदड़ में किसी छात्र या छात्रा की जान चली जाती, तो इसका जिम्मेदार कौन होता?
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यह घटना उन सभी शिक्षण संस्थानों के लिए एक कड़ा सबक है, जो बड़े स्तर पर आयोजनों की योजना तो बना लेते हैं, लेकिन भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) और आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था (Emergency Security) को ताक पर रख देते हैं। फिलहाल, मेरठ शहर में सुभारती यूनिवर्सिटी का यह 'स्पार्क-2026' अपनी सांस्कृतिक छटा के लिए कम और इस हिंसक बवाल के लिए ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है।
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