लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन जब सत्ता और प्रशासन के नशे में चूर 'खाकी' ही इस लोकतांत्रिक अधिकार को लाठियों के जोर पर कुचलने लगे, तो व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होना लाजमी है। उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद से एक ऐसा ही आक्रोशित कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति और दलित विमर्श में भूचाल ला दिया है। मेरठ कलेक्ट्रेट (Meerut Collectorate) के द्वार के बाहर अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर शांतिपूर्ण धरना दे रहे निहत्थे दलित समाज के लोगों पर पुलिस द्वारा की गई बर्बर कार्रवाई और लाठीचार्ज ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है।READ ALSO:-बिजनौर में मिलावटखोरों में मचा हड़कंप: लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे कारखानों पर FSDA का बड़ा 'सर्जिकल स्ट्राइक', 5 तहसीलों में एक साथ छापेमारी
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इस घटना के बाद राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। विशेष रूप से दलितों और शोषितों की आवाज उठाने वाले 'शोषित क्रांति दल' (Shoshit Kranti Dal - SKD) ने पुलिस की इस अमानवीय कार्यप्रणाली के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है।
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 पुलिस ने लाठी फटकार के प्रदर्शन कर रहे लोगों को भगाया।

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शोषित क्रांति दल का कड़ा रुख: "लाठीचार्ज घोर निंदनीय है" कलेक्ट्रेट पर हुए इस बवाल के बाद शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने एक बेहद तल्ख और तीखा प्रेस बयान जारी किया है। उन्होंने पुलिस की इस दमनात्मक कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे दलित समाज के स्वाभिमान और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया है।
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रविकांत ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "मेरठ कलेक्ट्रेट द्वार के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे निहत्थे और बेबस दलितों पर पुलिस द्वारा स्वयं लाठीचार्ज करना और बल प्रयोग करवाना अत्यंत ही घोर निंदनीय कृत्य है। एक तरफ समाज का वह शोषित वर्ग है जो प्रशासन से न्याय की भीख मांग रहा था, और दूसरी तरफ प्रशासन ने उनकी फरियाद सुनने के बजाय उन्हें लाठियों से पीटना मुनासिब समझा। इसकी जितनी भर्त्सना की जाए, उतनी कम है।"
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 SSP अविनाश पांडेय ने पुलिस वैन में घुसकर प्रदर्शनकारियों से मारपीट की।

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पुलिस की भूमिका पर उठे सीधे सवाल इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा निशाने पर जिले के पुलिस कप्तान आ गए हैं। शोषित क्रांति दल का सीधा आरोप है कि यह लाठीचार्ज किसी निचले स्तर के अधिकारी की चूक नहीं थी, बल्कि इसमें उच्चाधिकारियों की मूक सहमति या प्रत्यक्ष भागीदारी शामिल थी। जब निहत्थे और शांतिपूर्ण तरीके से बैठे प्रदर्शनकारियों पर बिना किसी उकसावे के लाठियां बरसाई जाती हैं, तो यह सीधे तौर पर मानवाधिकारों का हनन है। पार्टी का आरोप है कि पुलिस का काम जनता की सुरक्षा करना और कानून व्यवस्था बनाए रखना है, न कि अपने ही नागरिकों और वो भी समाज के सबसे निचले और शोषित तबके पर अपनी ताकत का बेजा इस्तेमाल करना।
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मुख्यमंत्री के आगामी मेरठ मंडल दौरे पर टिकी निगाहें शोषित क्रांति दल इस मामले को केवल बयानों तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि वह इसे राज्य के शीर्ष नेतृत्व तक ले जाने की पूरी तैयारी कर चुका है। पार्टी आलाकमान को सूचना मिली है कि आगामी दिनों में उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) मेरठ मंडल या उसके आसपास के जनपदों का महत्वपूर्ण दौरा करने वाले हैं। मुख्यमंत्री का यह दौरा विकास कार्यों की समीक्षा और कानून व्यवस्था का जायजा लेने के लिए प्रस्तावित है।
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इस दौरे को लेकर SKD के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल मेरठ प्रवास के दौरान सीधे मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट करेगा। इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री को कलेक्ट्रेट पर दलितों के साथ हुए इस पूरे बर्बर घटनाक्रम से साक्ष्यों सहित अवगत कराया जाएगा और पुलिस की ज्यादतियों का पूरा चिट्ठा उनके सामने खोला जाएगा।
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क्या हैं शोषित क्रांति दल की प्रमुख मांगें? खबरीलाल से मिली जानकारी के अनुसार, शोषित क्रांति दल ने इस मामले में किसी भी तरह के समझौते से इनकार कर दिया है। उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
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    तत्काल दंडात्मक कार्रवाई: निहत्थे दलितों पर लाठीचार्ज का आदेश देने वाले और इसे अंजाम देने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों (जिसमें वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हों) की तत्काल पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए।
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    निलंबन की मांग: दोषी पुलिसकर्मियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित किया जाए ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से हो सके और वे अपने पद का दुरुपयोग कर जांच को प्रभावित न कर सकें।
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  5. \r\n
    मुकदमा दर्ज हो: जिन निर्दोष दलितों को लाठीचार्ज में चोटें आई हैं, उनका सरकारी खर्चे पर इलाज कराया जाए और पुलिस की बर्बरता के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट (SC/ST Act) और अन्य सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत किया जाए।
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पश्चिमी यूपी की राजनीति में गर्माया दलित उत्पीड़न का मुद्दा मेरठ हमेशा से ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक दिशा तय करने वाला केंद्र रहा है। यहाँ हुई कोई भी घटना सीधे लखनऊ और दिल्ली तक असर डालती है। दलितों पर हुए इस लाठीचार्ज ने विपक्ष और अन्य सामाजिक संगठनों को भी बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। बहुजन समाज और दलित विचारक इस घटना को शासन-प्रशासन की दलित विरोधी मानसिकता से जोड़कर देख रहे हैं।
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अगर समय रहते प्रशासन ने इस मामले में डैमेज कंट्रोल नहीं किया और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह चिंगारी एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकती है। शोषित क्रांति दल ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे सड़कों पर उतरकर व्यापक प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।
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न्याय की आस और प्रशासन की जवाबदेही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमेशा से कहते आए हैं कि उनकी सरकार में हर वर्ग को न्याय मिलेगा और कानून का राज स्थापित होगा। ऐसे में मेरठ कलेक्ट्रेट की यह घटना सरकार के दावों की सीधे तौर पर परीक्षा ले रही है। अब यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या मेरठ का जिला प्रशासन अपनी गलती मानते हुए दलितों के आंसू पोछने का काम करेगा, या फिर खाकी वर्दी के रसूख को बचाने के लिए इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। मुख्यमंत्री से शोषित क्रांति दल की संभावित मुलाकात इस पूरे प्रकरण में 'टर्निंग पॉइंट' साबित हो सकती है।
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अस्वीकरण (Disclaimer): यह समाचार शोषित क्रांति दल (SKD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान और प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। लेख में प्रस्तुत किए गए आरोप, विचार और दावे पूर्ण रूप से संबंधित राजनीतिक दल और उनके प्रतिनिधियों के हैं। यह न्यूज़ पोर्टल या लेखक इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और पुलिस या प्रशासन के खिलाफ लगाए गए आरोपों के लिए उत्तरदायी नहीं है। मामले की सत्यता जांचने का अधिकार संबंधित जांच एजेंसियों और प्रशासन के पास सुरक्षित है।
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